कश्मीर में कोविड से अनाथ हुए बच्चों की तस्करीः क्या है पूरा मामला

इमेज स्रोत, JmuKmrPolice
- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत-प्रशासित कश्मीर में पुलिस ने कोरोना महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों की कथित ट्रैफ़िकिंग के आरोप में एक निजी संस्था के दफ़्तर को सील कर दो लोगों को गिरफ़्तार किया है.
दक्षिण कश्मीर के पुलवामा ज़िला के पम्पोर में स्थित "ग्लोबल वेलफ़ेयर चैरिटेलब ट्रस्ट" को पुलिस ने गुरुवार को सील कर दिया.
कश्मीर पुलिस ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दो लोगों की गिरफ़्तारी की जानकारी दी.
पुलिस के अनुसार पम्पोर पुलिस स्टेशन को पुलवामा ज़िले के चाइल्ड वेलफ़ेयर कमेटी के चेयरपर्सन से एक लिखित शिकायत मिली थी. शिकायत पत्र में चेयरपर्सन ने पम्पोर ज़िले में ग़ैर-क़ानूनी तौर से बच्चों को गोद लेने और फिर उन्हें बेच देने के मामले में एफ़आईआर दर्ज करने की अपील की थी.
इसी शिकायत के बाद पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की और जाँच शुरू कर दी.
पुलिस ने बेमीना के रहने वाले मोहम्मद अमीन राठेर और पम्पोर के रहने वाले एजाज़ अहमद डार को गिरफ़्तार किया है.
पुलिस के अनुसार यह दोनों पम्पोर में ग्लोबल वेलफ़ेयर चैरिटेबल नाम की एक ग़ैर-सरकारी संस्था चला रहे थे जिसे साल 2020 में रजिस्टर किया गया था.
पुलिस ने दफ़्तर को सील कर दिया है और वहां से कई दस्तावेज़ ज़ब्त कर लिया है.
पुलिस का कहना है कि आगे की जाँच जारी है और उसे इस मामले में और भी कई चीज़ें रिकवर करने की उम्मीद है.
जम्मू-कश्मीर के चीफ़ सेक्रेटरी डॉक्टर अरुण कुमार मेहता ने मामले का सख़्त नोटिस लेते हुए कहा है कि ऐसे मामलों को किसी भी हॉल में बख़्शा नहीं किया जाएगा.
मेहता ने गुरुवार को एक आला बैठक बुलाकर कहा कि मामले की समीक्षा हो रही है और केस की गंभीरता को देखते हुए क़ानून की सख़्त धाराओं को लागू किया जाएगा.
चीफ़ सेक्रेटरी ने सोशल वेलफ़ेयर विभाग को निर्दश दिया कि केंद्र शासित प्रदेश के सभी अनाथालयों और आश्रमों की पिछले पाँच साल की ऑडिट की जाए.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ जम्मू-कश्मीर में अब तक कोवीड से 635 बच्चे अनाथ हुए हैं.
बच्चों के लिए बनी एक सरकारी कमेटी सिलेक्शन कम ओवरसाइट कमेटी के पूर्व चेयरपर्सन और अनंतनाग से नेशनल कॉन्फ्रेंस के मौजूदा लोकसभा सांसद जस्टिस हसनैन मसूदी (सेवानिवृत्त) ने पम्पोर घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये बड़े अफ़सोस की बात है कि सरकार की आँखों से ये मामला ओझल रहा.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "इससे पहले कि ऐसे बच्चों का अनुचित लाभ उठाया जाए, इसे रोकने के लिए हमारे पास एक पूरा सिस्टम मौजूद नहीं है. बच्चों की सुरक्षा के लिए एक पूरा ढांचा मौजूद तो है, लेकिन ज़मीन पर उसको अभी तक लागू नहीं किया गया है, जिसकी वजह से ये सब कुछ हो रहा है. कुछ निजी संस्थाएं काम तो कर रही हैं लेकिन हम ज़्यादा सरकारी विभागों पर निर्भर करते हैं, जहाँ अभी तक पूरी तरह से काम नहीं हो रहा है."
उन्होंने कहा कि प्रशासन की नज़रों में अगर ये बच्चे आते और प्रशासन को ये पता होता कि कोवीड के कारण ये बच्चे अनाथ हो गए हैं तो उनके बचाव में पहले ही आया जा सकता था.
वो आगे कहते हैं, "इसकी ज़िमेदारी सिर्फ़ चाइल्ड प्रटेक्शन पर नहीं आती है, ज़िला प्रशासन की भी ज़िमेदारी बनती थी. अगर सरकार कह रही है कि हमने कोविड के हवाले से सब कुछ किया तो ये सब फिर क्या हो रहा है?"
एक सरकारी संस्था इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन सर्विस(आईपीएससी ) की जम्मू-कश्मीर की मिशन डायरेक्टर शबनम कमाली के अनुसार यह पहली ऐसी घटना है जो सामने आई है.
उनका दावा है कि कोरोना महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों समेत सभी बच्चों की सुरक्षा के लिए पूरा ढांचा मौजूद है. लेकिन फिर भी पम्मोर जैसी घटना क्यों हुई, यह पूछे जाने पर उनका कहना है, "मैं अभी कुछ कहने से रुक रही हूँ, क्योंकि पुलिस अभी इस मामले में जाँच कर रही है. मैं कोई जल्दबाज़ी में बयान देना नहीं चाहती हूँ. इस तरह के बच्चों को बेचना ही अपराथ नहीं है बल्कि जिसने भी ख़रीदा है वह भी अपराधी है."
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