चीन के अरुणाचल प्रदेश में 'गांव बसाने' पर भारत की दो-टूक, जनरल रावत की राय अलग- प्रेस रिव्यू

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भारत ने कहा है कि वह किसी भी क़ीमत पर ना तो चीन के "अवैध" कब्ज़े और ना ही सीमा को लेकर उसके "अनुचित" दावों को स्वीकार करेगा.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने सीमावर्ती क्षेत्रों में, विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश में, चीन के निर्माण (विवादित इलाक़े में बना 100 घरों वाले गांव ) से जुड़ी रिपोर्ट्स पर सवालों के जवाब में यह बात कही.
गुरुवार को पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए बागची ने कहा कि भारत ने राजनयिक स्तर पर पूरी मज़बूती के साथ इस तरह की गतिविधियों के प्रति अपना विरोध दर्ज किया है. और भारत भविष्य में भी ऐसा ही करेगा.
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि चीन ने पिछले कई सालों में सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ उन क्षेत्रों में भी निर्माण किया जहां उसने दशकों से कब्ज़ा कर रखा है. भारत ना तो इस तरह के किसी कब्ज़े को स्वीकार करता है और ना ही चीन के अनुचित दावों को.
चीन ने अपने नए सीमा क़ानून के तहत पूर्वी इलाक़े में सीमावर्ती क्षेत्रों में 'दोहरे इस्तेमाल के लिए' गांवों का निर्माण किया है. इन गांवों को ख़तरे के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि इन्हें लेकर दावा है कि ये गांव स्थायी सैन्य शिविर में तब्दील हो चुके हैं.
इससे पूर्व एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अरुणाचल प्रदेश के साथ लगी चीन की सीमा पर विवादित इलाक़े में चीन ने करीब 100 घरों वाला एक गांव बसा लिया है. पहाड़ियों से भरे जिस इलाक़े में चीनी सेना ने निर्माण किए हैं वहां 1962 के युद्ध से पहले भारत की आख़िरी सैन्य पोस्ट हुआ करती थी. तब उसे माज़ा कैंप कहा जाता था. इस इलाक़े के विवादित इलाक़ा घोषित होने के बाद भारतीय सेना का ये कैंप भारतीय इलाक़े में 4 से 5 किलोमीटर अंदर आ गया है.
एक ओर जहां विदेश मंत्रालय ने चीन के निर्माण को लेकर भारत की प्रतिक्रिया दी वहीं चीफ़ ऑफ़ डिफेंस जनरल बिपिन रावत ने भी एक टीवी चैनल पर इस मुद्दे पर अपनी बात रखी.

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द हिंदू अख़बार के मुताबिक़, चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेस स्टाफ़ जनरल बिपिन रावत ने गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश में पूर्वी क्षेत्र में चीनी निर्माण के संबंध में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान से अलग बयान दिया.
इस मसले पर अरिंदम बागची के बयान से अलग रावत ने एक न्यूज़ चैनल पर कहा कि चीनी निर्माण एलएसी के उनकी तरफ़ के क्षेत्र में थे.
उन्होंने कहा," वे बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहे हैं और ये तथाकथित गांव एलएसी पर उनके अधिकार क्षेत्र में हैं. उन्होंने एलएसी पर हमारे क्षेत्र का कभी उल्लंघन नहीं किया. कई तरह की धारणाएं हैं. हम इस बात को लेकर बेहद स्पष्ट हैं कि एलएसी कहां है क्योंकि हमें बताया गया है कि एलएसी पर हमारी स्थिति कहां है और यही वो क्षेत्र है जिसकी सुरक्षा की हमसे अपेक्षा की जाती है. "
इस दौरान बिपिन रावत ने कहा कि चीन की एक धारणा है जिसे कुछ क्षेत्रों में हम जानते हैं और कुछ में नहीं क्योंकि उन्होंने कभी भी स्पष्ट तौर पर यह नहीं बताया कि उनकी मान्यता के अनुसार एलएसी कहां है.
इस टीवी कार्यक्रम में जनरल बिपिन रावत ने कहा कि जहां तक हमारा सवाल है, एलएसी के हमारे क्षेत्र में ऐसे किसी भी गांव का निर्माण नहीं हुआ है.

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उत्तर प्रदेश जीतने के लिए बीजेपी की 'चाणक्य नीति'
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी ने कई राज्यों में जीत हासिल की है और अब जबकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कुछ महीने ही शेष रह गए हैं तो बीजेपी के चाणक्य ने कमान संभाल ली है.
रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की तैयारियों की निगरानी करने के लिए अमित शाह आज यानी शुक्रवार को वाराणसी पहुंच रहे हैं.
वहाँ वो 403 निर्वाचन क्षेत्रों के प्रभारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करेंगे. इसमें राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित राज्य के शीर्ष नेता भी शामिल होंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र में होने वाली इस बैठक में पार्टी के 98 ज़िला स्तरीय नेता और क्षेत्रीय इकाई अध्यक्षों के अलावा प्रदेश प्रभारी व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधा मोहन सिंह, राज्य चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल होंगे.
बीजेपी के एक नेता के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि -अमित शाह राज्य के सभी संगठनात्मक पदाधिकारियों को संबोधित करेंगे. वह चुनाव की तैयारियों के बारे में फ़ीडबैक भी लेंगे. इस बैठक में चुनाव कार्यक्रमों का रोडमैप तैयार किए जाने की संभावना है.

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राजस्थान में भी पंजाब जैसी स्थिति से बचने के लिए सोनिया गांधी से मिले अशोक गहलोत
कांग्रेस शासित राजस्थान में पंजाब जैसी स्थिति ना हो इसके लिए कैबिनेट विस्तार से पहले राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात की.
जनसत्ता की ख़बर के अनुसार, कांग्रेस पार्टी राजस्थान में पंजाब जैसी स्थिति से बचना चाहेगी और संभव है कि इसके लिए पार्टी राजस्थान में एक व्यक्ति एक पद का फॉर्मूला लागू करे. दो साल बाद राजस्थान में चुनाव होने हैं और उससे पहले मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाना है.
सोनिया गांधी से मुलाक़ात के बाद अशोक गहलोत ने कहा कि मंत्रीमंडलमें फेरबदल का फ़ैसला आलाकमान का ही होगा. उन्होंने कहा मंत्रिमंडल को लेकर उन्होंने अपने विचार सोनिया गांधी से साझा किये हैं लेकिन जो भी आलाकमान का फ़ैसला होगा वो उन्हें मंज़ूर होगा.
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