पंजाब की राजनीति में फँसीं पाकिस्तान की पत्रकार अरूसा आलम कौन हैं?

कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ अरूसा आलम

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    • Author, सुशीला सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पंजाब के मुख्यमंत्री पद से कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद से महिला पत्रकार अरूसा आलम के साथ उनके संबंधों को लेकर राज्य की राजनीति गरमाई हुई है. उन्होंने इस साल के सितंबर महीने में अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

कैप्टन अमरिंदर सिंह के विरोधी, पत्रकार अरूसा आलम के पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी आईएसआई के साथ संबंध होने का दावा कर रहे हैं तो वहीं पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने फ़ेसबुक पन्ने पर भारतीय पदाधिकारियों के साथ अरूसा आलम की कई फ़ोटो पोस्ट की हैं.

इस बीच अरूसा आलम ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए साक्षात्कार में कहा है कि मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि अमरिंदर ने इतनी बड़ी दुनिया में मुझे अपना दोस्त चुना है... हमारा मेंटल और आईक्यू लेवल एक बराबर है.

सोनिया गांधी के साथ - एक प्रतिनिधिमंडल के साथ आईं अरूसा आलम

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दरअसल पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शुक्रवार को अरूसा आलम के आईएसआई से संबंधों को लेकर जाँच के आदेश दे दिए थे. इसके बाद ट्विटर पर बहस भी छिड़ गई थी.

अमरिंदर सिंह ने इसके बाद कहा था,"मेरी कैबिनेट में आप मंत्री थे. आपने कभी अरूसा आलम को लेकर शिकायत नहीं की. वह 16 सालों से भारत सरकार से मंज़ूरी लेकर आ रही हैं."

साक्षात्कार में क्या कहा अरूसा आलम ने?

अपने साक्षात्कार में अरूसा ने कांग्रेस के राजनीतिज्ञों पर हमला बोलते हुए कहा कि वो पंजाब के कांग्रेस राजनीतिज्ञों के बयान से बहुत दुखी और निराश हैं और कभी भारत नहीं आएँगी.

साथ ही उन्होंने उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और राज्य के कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू पर भी निशाना साधते हुए कहा, ''मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि वो इतना नीचे गिर सकते हैं. सुखजिंदर रंधावा, पीपीसीसी चीफ़ नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी(नवजोत कौर सिद्धू) लकड़बग्घे हैं. वो कैप्टन को शर्मिंदा करने के लिए मेरा इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं. मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि क्या उनके पास मुद्दों की कमी हो गई है कि वो मेरा सहारा लेकर राजनीतिक मकसद साध रहे हैं?''

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वाराज के साथ अरूसा आलम

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अमरिंदर सिंह के साथ उनकी दोस्ती पर सवाल उठाने वाले कांग्रेसी नेताओं को जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ''मेरा उनके लिए संदेश है. प्लीज़ थोड़े बड़े हो जाइए और अपने घर को ठीक करें. कांग्रेस ने पंजाब में अपनी ज़मीन खो दी है. युद्ध के बीच में कौन अपने जनरल को बदलता है. कांग्रेस दिशाहीन है और गहराई से बंटी हुई है.''

आईएसआई के साथ संबंध होने के आरोप को ख़ारिज करते हुए अरूसा आलम ने साक्षात्कार में कहा, ''मैं दो दशकों से भारत आ रही हूं, कैप्टन के निमंत्रण पर पिछले 16 साल से और उससे पहले एक पत्रकार के नाते और प्रतिनिधिमंडल के साथ भी आई हूं. क्या वो मेरे लिंक्स को लेकर अचानक जागे हैं.''

पाकिस्तान में भारत के राजदूत जेएन दीक्षित के साथ

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अरूसा आलम अपने पाकिस्तान दौरे और वीज़ा पर उठे सवालों पर कहती हैं कि जब कोई पाकिस्तान से भारत आता है तो उसे बड़ी जटिल क्लीयरंस प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है. किसी भी प्रक्रिया को बाइपास नहीं किया गया है. जो स्क्रीनिंग होती है वो की गई है. ये क्लीयरंस आर एंड एडब्ल्यू (R&AW), आईबी, केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से लेना होता है. वो ऑनलाइन वीज़ा फॉर्म भी नहीं भरने देते हैं. ये लोग सोचते हैं कि ये सभी एजेंसियां क्या मुझे बस ऐसे ही अनुमति दे रही थीं.

अरूसा आलम और राजनीति

पंजाब की राजनीति को करीब से जानने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि अमरिंदर सिंह और अरूसा आलम की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है. उनका मानना है कि अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए इस मामले को तूल दिया जा रहा है.

साथ ही अमरिंदर सिंह के फ़ेसबुक पर अरूसा आलम की भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ फ़ोटो पोस्ट करना ये दर्शाता है कि उनके भारत के दौरे कोई रहस्य नहीं थे और जिनके साथ वो मिलती थी क्या वो भी आईएसआई के एजेंट हैं?

राजनीतिक विश्लेषक विपिन पब्बी बीबीसी से बातचीत में कहते हैं, ''आज सिद्धू, रंधावा जो सवाल उठा रहे हैं वो पहले से कैप्टन और अरूसा की दोस्ती को जानते थे और उन्हें ये भी पता था कि वो कैप्टन के घर पर ही रहती हैं. उन्होंने तब क्यों सवाल नहीं उठाए? अब जब वो (कैप्टन) मुख्यमंत्री के पद पर नहीं रहे , उनके विरोधी पावर में आ गए हैं तो इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश है. ताकि अमरिंदर सिंह को बदनाम किया जाए, ख़ासतौर पर तब जब वो कह रहे हैं मैं अलग से पार्टी बनाऊंगा और कांग्रेस और सिद्धू का विरोध करूंगा. हालांकि इससे कोई असर नहीं होगा.''

पंजाब की राजनीति में नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच रिश्ते किसी से छिपे नहीं हैं.

नवजोत सिंह सिद्धू

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विपिन पब्बी मानते हैं कि अगामी विधानसभा चुनाव से पहले ये विरोधियों की अमरिंदर सिंह की छवि को धूमिल करने की कोशिश है, लेकिन इसका असर नहीं पड़ेगा.

लेकिन वे ये भी बताते हैं कि विरोधियों के ये आरोप कि अरूसा आलम अमरिंदर सिंह के साथ बैठकों में भाग लेती थीं और कई फैसलों में उनका प्रभाव रहता था, अब ये बातें ज़्यादा मुखर तौर पर कही जाने लगी हैं. हालांकि अरूसा आलम इस बात से इंकार करती रही हैं लेकिन आम लोगों में ये भावना रही है.

कौन हैं अरूसा आलम

बीबीसी उर्दू की सहयोगी हुदा इकरम बताती हैं कि अरूसा आलम ने पत्रकारिता की शुरूआत 80 के मध्य में की थी और वे रक्षा मामलों पर रिपोर्टिंग करती हैं.

उन्होंने अगस्ता-90 बी पडुब्बी सौदे पर रिपोर्टिंग की थी और घोटाले को उजागर किया था. ये सौदा फ्रांस और पाकिस्तान के बीच हुआ था. माना जाता है कि उनकी रिपोर्टिंग की वजह से पाकिस्तान के तत्कालीन नौसेना प्रमुख मंसरूल हक़ की गिरफ्तारी हुई थी.

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वे अकलीम अख़्तर की बेटी हैं और माना जाता है कि उनकी मां तत्कालीन राष्ट्रपति याह्या ख़ान के करीबी दोस्त थी. उनकी काफ़ी जान पहचान थी और वो प्रभावशाली थीं. और इसी वजह से उन्हें 'जनरल रानी' कहकर भी बुलाया जाता था.

वे साउथ एशिया फ्री मीडिया एसोसिएशन की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. उनके दो बेटे हैं. एक बेटा अभिनेता है तो दूसरा बेटा वकील है.

ये बताया जाता है कि अमरिंदर सिंह जब साल 2004 में पाकिस्तान दौरे पर गए थे उस समय उनकी मुलाकात लाहौर में अरूसा आलम से हुई थी.

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की थी.

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साल 2017 में जब अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री बने तब उनके शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुईं थीं साथ ही उनकी बायोग्राफ़ी 'द पीपल्स महाराजा' के विमोचन में भी अरूसा आलम ने भाग लिया था.

अमरिंदर सिंह की किताब में भी अरूसा आलम का ज़िक्र मिलता है.

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं अमरिंदर सिंह जल्द ही अपनी पार्टी की घोषणा करने वाले हैं और चंद महीनों में चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में कांग्रेस पार्टी में कहीं न कहीं ये डर है होगा कि कहीं वो उन्हें नुकसान ना पहुंचा दे , इसलिए उनकी छवि पर चोट पहुंचाने की कोशिश है.

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