पंजाब चुनाव: चरणजीत सिंह चन्नी होंगे कांग्रेस के सीएम उम्मीदवार, राहुल गांधी ने सिद्धू के सामने किया एलान

चरणजीत सिंह चन्नी

इमेज स्रोत, ANI

    • Author, बीबीसी पंजाबी
    • पदनाम, दिल्ली

लंबे समय तक सस्पेंस रखने के बाद पंजाब में कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है.

राहुल गांधी ने लुधियाना में वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए ख़ुद यह एलान किया है.

इस दौरान चरणजीत सिंह चन्नी के अलावा पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी मंच पर मौजूद थे.चन्नी के नाम का एलान करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "हमें ग़रीब घर का मुख्यमंत्री चाहिए. हमें वो व्यक्ति चाहिए जो ग़रीबी को समझे, भूख को समझे, जो ग़रीब व्यक्तियों के दिल की घबराहट को समझे. क्योंकि पंजाब को उस व्यक्ति की ज़रूरत है. मुश्किल फ़ैसला था, आपने आसान बना दिया. पंजाब के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार, चरणजीत सिंह चन्नी जी होंगे."

राहुल गांधी के एलान करते ही सिद्धू ने चन्नी का हाथ उठाया और फिर दोनों को गांधी मंच की ओर लाए. इस दौरान पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ भी साथ दिखे. राहुल गांधी ने घोषणा के बाद चन्नी-सिद्धू और जाखड़ तीनों ही नेताओं को गले लगाया.

बता दें कि बीते कई दिनों से सिद्धू ने अपने बयानों से ये संकेत देने की कोशिश कर रहे थे कि राज्य में वह पार्टी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं. इस बीच सुनील जाखड़ भी चरणजीत सिंह चन्नी पर ट्वीट के ज़रिए निशाना साध रहे थे.

चरणजीत सिंह चन्नी

इमेज स्रोत, ANI

पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री

चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब में दलित समुदाय के पहले ऐसे नेता हैं जिन्हें राज्य के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालने का मौक़ा मिला.

कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफ़े के बाद कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए नवजोत सिंह सिद्धू, सुनील जाखड़, अंबिका सोनी और सुखजिंदर सिंह रंधावा के नामों पर अफवाहों का बाज़ार गर्म था. लेकिन कांग्रस हाई कमान ने पंजाब के नए मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत सिंह चन्नी के नाम का एलान करके सबको चौंका दिया था.

राजनीतिक हलकों में हर तरफ़ यही कहा जा रहा था कि कांग्रेस ने पंजाब विधानसभा के चार महीने पहले दलित कार्ड खेलने की कोशिश की लेकिन इससे इस बात की अहमियत कम नहीं हो जाती कि पंजाब की राजनीति में ये एक ऐतिहासिक घटना थी.

चमकौर साहिब विधानसभा से तीसरी बार विधायक बने चरणजीत सिंह चन्नी पहली पीढ़ी के राजनेता हैं. साल 2007 में चन्नी ने पहली बार विधानसभा का चुनाव जीता था और वो भी स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में. लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें कांग्रेस में शामिल करा लिया. साल 2012 का विधानसभा चुनाव उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीता.

कैप्टन अमरिंदर सिंह की कैबिनेट में चन्नी टेक्नीकल एजुकेशन और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग, पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री थे.

चरणजीत सिंह चन्नी

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, पंजाब कांग्रेस के नेताओं के साथ चन्नी

चन्नी की पारिवारिक पृष्ठभूमि

चरणजीत सिंह के तीन भाई हैं- डॉक्टर मनमोहन सिंह, मनोहर सिंह और सुखवंत सिंह. चरणजीत सिंह चन्नी की पत्नी कमलजीत कौर एक डॉक्टर हैं और उनके दो बेटे हैं.

चन्नी परिवार के क़रीबी बाल कृष्ण बिट्टू ने बीबीसी के सहयोगी पत्रकार पाल सिंह नौली को बताया कि उनके परिवार के पास रोपड़ में एक पेट्रोल पंप और एक गैस एजेंसी है.

चन्नी के पिता हर्ष सिंह कुछ साल आजीविका के लिए अरब देशों में रहे थे. देश वापस लौटने पर उन्होंने मोहाली के खरर में टेंट हाउस का कारोबार शुरू किया.

बाल कृष्ण बिट्टू ने बताया कि नौजवानी के दिनों चन्नी अपने पिता के काम में हाथ बँटाया करते थे और खरर नगर पालिका के काउंसिलर बनने पर भी वे टेंट लगाने से हिचकते नहीं थे.

उनके भाई डॉक्टर मनमोहन सिंह ने बीबीसी को बताया कि चन्नी ने चंडीगढ़ के गुरुगोविंद सिंह खासला कॉलेज से पढ़ाई की और फिर पंजाब यूनिवर्सिटी से एलएलबी किया. इसके बाद चन्नी ने पंजाब टेक्नीकल यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की.

चन्नी के एक अन्य क़रीबी सहयोगी मुकेश कुमार मिनका के मुताबिक़ पढ़ाई में उनकी दिलचस्पी इतनी अधिक थी कि मंत्री रहते हुए वे पंजाब यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे थे.

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करते हुए चरणजीत सिंह चन्नी

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करते हुए चरणजीत सिंह चन्नी

चन्नी की राजनीतिक यात्रा

58 साल के चरणजीत सिंह चन्नी की राजनीतिक यात्रा साल 1996 में उस वक़्त शुरू हुई जब वे खरर नगर पालिका के अध्यक्ष बने. इसी दौरान वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश दत्त के संपर्क में आए. चन्नी राजनीति के अपने शुरुआती दिनों से ही रमेश दत्त से जुड़े हुए थे. हालांकि चन्नी के संपर्क दलित कांग्रेस नेता चौधरी जगजीत सिंह से भी थे लेकिन साल 2007 के चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिल पाया. चन्नी ने फ़ैसला किया कि वे चमकौर साहिब से स्वतंत्र उम्मीदवार की हैसियत से चुनाव लड़ेंगे और वे जीते भी.

साल 2012 में जब कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें टिकट दिया तो वे फिर विधानसभा का चुनाव जीते. साल 2015 से 2016 तक वे सुनील जाखड़ के बाद पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे.

चरणजीत सिंह चन्नी ने कांग्रेस हाई कमान के पास भी अपनी पहुँच बनाई और ये माना जाता है कि कांग्रेस नेता अंबिका सोनी से उनके अच्छे रिश्ते हैं. साल 2017 का चुनाव जीतने के बाद चन्नी कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार में पहली बार मंत्री बने.

कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के अधूरे वादों को लेकर उठ रही आवाज़ों की अगुवाई करने वालों में चन्नी भी थे. कहते हैं कि पंजाब कांग्रेस कमेटी की कमान नवजोत सिंह सिद्धू को देने का समर्थन चन्नी ने भी किया था.

बीते साल राज्य कांग्रेस के तत्कालीन प्रभारी हरीश रावत से मिलने के लिए देहरादून जाने वाले पंजाब के मंत्रियों और विधायकों में चन्नी भी थे. साल 2017 के विधानसभा चुनावों में चन्नी ने जो शपथ पत्र दाखिल किया था, उसके मुताबिक़ उनके पास उस वक़्त लगभग 14.53 करोड़ की संपत्ति थी.

चरणजीत सिंह चन्नी

इमेज स्रोत, ANI

चन्नी और विवाद

राज्य में कांग्रेस के नए मुख्यमंत्री के रूप में चन्नी के नाम के एलान के साथ ही पंजाब बीजेपी के एक नेता ने तीन साल पुराने उनसे जुड़े एक मामले का ज़िक्र ट्विटर पर किया था.

साल 2018 में चन्नी पर ये आरोप लगाया गया था कि उन्होंने मंत्री पद पर रहते हुए एक महिला आईएएस अधिकारी को कथित तौर पर 'अनुचित मैसेज' भेजा था.

जब ये मामला उठा तो तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक बयान दिया था, "कुछ महीनों पहले जब ये मामला मेरे संज्ञान में लाया गया था तो मैंने मंत्री चन्नी से महिला अधिकारी से माफी मांगने के लिए कहा और मंत्री ने माफी मांग ली. ये मामला सुलझ गया है."

उस वक़्त चन्नी ने अपनी सफ़ाई में कहा था कि टेक्स्ट मैसेज अनजाने में महिला अधिकारी के मोबाइल नंबर पर चला गया था और अब ये मामला सुलझ गया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)