नवजोत सिंह सिद्धू का 'कैप्टन' से बग़ावत करने का है पुराना इतिहास

नवजोत सिंह सिद्धू

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क्रिकेट का मैदान हो या राजनीति का अखाड़ा, कप्तान से बग़ावत करने का नवजोत सिंह सिद्धू का पुराना इतिहास रहा है.

क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू 2004 में राजनीति में आए. पहले वो भारतीय जनता पार्टी के सांसद रहे और फिर कांग्रेस में विधायक, मंत्री रहे. इन दिनों वो पंजाब के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं.

क्रिकेट प्रेमियों को याद होगा कि 1996 के इंग्लैंड दौरे के वक्त नवजोत सिंह सिद्धू कप्तान मोहम्मद अज़हरूद्दीन से बग़ावत करके बीच दौरे में स्वदेश लौट आए थे.

जब वो बीजेपी में रहे तब अकाली दल-बीजेपी गठबंधन सरकार की आलोचना करते रहे. जब कांग्रेस में आए तो पार्टी के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं.

नवजोत सिंह के राजनीति में आने के बाद उनके जीवन की अहम घटनाओं पर एक नज़र-

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1. 1988 के हादसे पर 2006 में इस्तीफ़ा

नवजोत सिंह सिद्धू 2004 में बीजेपी के टिकट पर अमृतसर से लोकसभा पहुंचे थे. उन पर उस वक्त एक पुराना मुक़दमा चल रहा था.

आरोपों के मुताबिक उन्होंने कथित तौर पर पाटियाला निवासी गुरनाम सिंह को पार्किंग को लेकर हुए विवाद के दौरान पीटा था. गुरनाम सिंह की अस्पताल में मौत हो गई थी.

इस मामले में 2006 में नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने तीन साल क़ैद की सज़ा सुनाई थी. सिद्धू को तब अमृतसर के सांसद पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे अरुण जेटली ने सिद्धू की ओर से पैरवी की थी और सिद्धू को जमानत मिली थी.

इसके बाद अमृतसर में हुए उपचुनाव में सिद्धू एक बार फिर से चुनाव जीतने में कामयाब रहे. अरुण जेटली के साथ उनके रिश्ते गहरे हुए.

माना जाता रहा है कि सिद्धू का अमृतसर से बेहद लगाव है लेकिन जब 2014 में बीजेपी ने यहां से अरुण जेटली को अपना उम्मीदवार बनाया तो सिद्धू ने घोषणा की थी कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे.

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2. अकाली दल का विरोध

नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू हमेशा अकाली सरकार के आलोचक रहे. सिद्धू के न तो प्रकाश सिंह बादल से और ना ही सुखबीर बादल से मधुर संबंध रहे.

2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार थी जबकि पंजाब में अकाली दल-बीजेपी गठबंधन की सरकार थी.

सिद्धू ने भ्रष्टाचार, केबल माफ़िया, ख़नन माफ़िया जैसे मुद्दों को लेकर कई मौकों पर अकाली दल पर निशाना साधा था. सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू तब चीफ़ पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी हुआ करती थीं.

अप्रैल, 2016 में सिद्धू राज्य सभा के सांसद बनाए गए लेकिन उन्होंने तीन महीने बाद अपना इस्तीफ़ा दे दिया था.

उन्होंने कहा कि पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत के समर्थक होने के नाते उन्होंने बीजेपी से इस्तीफ़ा दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि उनसे कहा गया है कि राज्य सभा के सदस्य होने के नाते पंजाब से दूर रहो और मेरे लिए पंजाब से बड़ा कोई धर्म नहीं है. नवजोत कौर सिद्धू ने भी चीफ़ पार्लियामेंट सेक्रेटरी के पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

राजनीतिक गलियारों में तब यह चर्चा उभरने लगी थी कि नवजोत सिद्धू अब आम आदमी पार्टी का दामन थामेंगे और वही राज्य में मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे.

लेकिन इन पूर्वानुमानों से उलट उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनावों से कुछ सप्ताह पूर्व कांग्रेस का दामन थाम लिया.

कहा गया कि राहुल गांधी और प्रियंका गाधी की वजह से वे कांग्रेस पहुंचे. हालांकि उससे पहले उन्होंने आवाज़-ए-पंजाब फ़ोरम का गठन किया था, जिसमें बैंस भाई और परगट सिंह भी शामिल हुए थे.

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3. कैप्टन अमरिंदर सिंह से मतभेद और मंत्री पद से इस्तीफ़ा

2017 में कांग्रेस पार्टी पंजाब में सत्ता में आयी और सिद्धू कैबिनेट मंत्री बनाए गए. कुछ ही महीनों के बाद उन्होंने अमृतसर के मेयर के चुनाव पर अपनी नाराज़गी जाहिर की.

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि अमृतसर नगर निगम के सदस्यों की मेयर चुनने वाली मीटिंग में आमंत्रित नहीं किए जाने से सिद्धू नाराज़ हो गए थे. नगर निगम उनके मंत्रालय के अधीन ही आता था.

सिद्धू ने इसके बाद केबल नेटवर्कों पर मनोरंजन कर और रेत के ख़नन के लिए कार्पोरेशन बनाने का प्रस्ताव दिया, जिसे खारिज़ कर दिया गया.

अप्रैल, 2018 में गुरनाम सिंह की मौत का 1988 वाला मामला एक बार फिर अदालत में पहुंचा. पंजाब सरकार की ओर से सिद्धू के ख़िलाफ़ हलफनामा दाख़िल किया गया.

2019 में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कैबिनेट में बदलाव करते हुए सिद्धू का मंत्रिमंडल बदल दिया, इसके विरोध में सिद्धू ने पदभाग ग्रहण किए बिना इस्तीफ़ा दे दिया.

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4. पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख से मुलाक़ात

2018 में पाकिस्तान में हुए चुनाव में इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने. सिद्धू के दोस्त इमरान ख़ान ने उन्हें शपथ ग्रहण समारोह में आने का निमंत्रण दिया.

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिद्धू से इस समारोह में नहीं जाने की अपील की. लेकिन सिद्धू वाघा बार्डर के रास्ते पाकिस्तान गए. वहां करतारपुर कॉरिडोर खोलने की पेशकश पर वो पाकिस्तान सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा से गले भी मिले.

अमरिंदर सिंह ने इसको लेकर सिद्धू की आलोचना की, लेकिन सिद्धू ने कहा है कि फ्रेंडशिप बस से अटल बिहारी वाजपेयी भी लाहौर गए थे और नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में नवाज़ शरीफ़ को आमंत्रित किया था.

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5. जब सिद्धू ने कहा कि राहुल गांधी मेरे कैप्टन हैं

तेलंगाना में कांग्रेस का प्रचार करते हुए सिद्धू ने कहा था, "राहुल गांधी मेरे कैप्टन हैं. वही मुझे हर जगह भेज रहे हैं. कैप्टन अमरिंदर सिंह सेना में कैप्टन रहे हैं. कैप्टन अमरिंदर सिंह के भी कैप्टन राहुल गांधी ही हैं."

सिद्धू के इस बयान की पंजाब कांग्रेस में काफ़ी आलोचना हुई. पंजाब सरकार में शामिल तृप्त राजिंदर बाजवा ने सिद्धू के इस्तीफ़े की मांग की थी.

2019 के लोकसभा चुनाव के प्रचार में सिद्धू ज़्यादा नहीं दिखे. प्रियंका गांधी के कहने पर उन्होंने अमरिंदर सिंह के लिए भठिंडा में प्रचार किया.

इस चुनाव प्रचार के दौरान में भी उनके बयानों से विवाद उत्पन्न हो गया क्योंकि उन्होंने अपनी पार्टी की राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया यह भी कि 25 प्रतिशत का कमीशन लिया जा रहा है.

कांग्रेस के कई नेताओं ने इन बयानों के लिए सिद्धू पर कार्रवाई की मांग की.

अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू की बीच बढ़ती दूरी के बीच में जून, 2019 में उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया. उन्होंने अपना इस्तीफ़ा राहुल गांधी के नाम लिखा और बाद में कैप्टन अमरिंदर सिंह को भेजा.

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6. पंजाब में मिलेगी जीत

मंत्रिमंडल से इस्तीफ़े के बाद सिद्धू अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर नहीं दिखे.

फ़रवरी, 2020 में उन्होंने सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाक़ात की, मार्च महीने में उन्होंने 'जीतेगा पंजाब' नाम से अपना यूट्यूब चैनल बनाया.

इस चैनल पर वे पंजाब के लोगों की मुश्किलों और समस्याओं के बारे में अपने विचार शेयर करते हैं, मौजूदा समय में इसके एक लाख पांच हज़ार सब्सक्राइबर हैं.

दिल्ली में किसान आंदोलन के दौरान वो कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए. पंजाब में राहुल गांधी की ट्रैक्टर रैली में भी वो नज़र आए.

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिद्धू को अपने घर पर लंच के लिए भी आमंत्रित किया और ऐसा लगने लगा था कि दोनों में मतभेद कम हो रहे हैं.

इसके बाद सिद्धू ने कई मुद्दों पर अमरिंदर सिंह सरकार की आलोचना की, इन मामलों को देखने के लिए आलाकमान ने भी एक समिति बनायी.

इसके बाद उन्हें पंजाब प्रदेश की कमान सौंपी गई है, अगले साल होने वाले चुनाव को देखते हुए माना जा रहा है कि उन्हें पूरे राज्य में सरकार और पार्टी के प्रचार की कमान मिल सकती है.

नवजोत सिंह सिद्धू जब पाकिस्तान गए थे तब उनकी काफी आलोचना हुई थी लेकिन पंजाब का एक तबका मानता है कि सिद्धू की बदौलत ही करतारपुर कॉरिडोर खुल पाया.

2018 में सिद्धू के बेटे करण सिद्धू को पंजाब सरकार ने अस्सिटेंट एडवोकेट जनरल बनाया. नवजोत कौर सिद्धू को वेयरहाउस कॉरपोरेशन का चेयरपर्सन बनाया गया. लेकिन राजनीतिक विरोध के चलते उन्होंने यह ज़िम्मेदारी नहीं संभाली.

नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब की राजनीति में वह चेहरा बन कर उभरे हैं, जिन्हें पसंद नापसंद तो किया जा सकता है, लेकिन उनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती.

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