पंजाब: 'नशे की आसान पहुंच मेरे बेटे को बहुत दूर ले गई'

रिकी की मां
इमेज कैप्शन, नशे ने लक्ष्मी देवी के 25 साल के बेटे की जान ले ली
    • Author, अरविंद छाबड़ा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, चंडीगढ़ से

"मैं सारी रात अपने बेटे की तस्वीर देख-देख कर रोती हूं. उसका चेहरा मेरी आंखों के सामने घूमता रहता है."

ये शब्द हैं लक्ष्मी देवी के, जिनके 24 साल के बेटे रिकी की तीन हफ़्ते पहले ही मौत हुई है. वो बेटे की मौत के सदमे से बाहर नहीं आ पा रही हैं.

रिकी ने दसवीं की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी जिसके बाद वो ज़्यादातर समय अपने दोस्तों के साथ बिताने लगा और नशे की लत में पड़ गया.

पंजाब के जालंधर कैंट में दो कमरों के मकान में रहने वाली लक्ष्मी लोगों के घरों में काम करके गुज़ारा करती हैं. उनके पति दिहाड़ी मज़दूरी करते हैं.

वो बताती हैं, "हम हमेशा से ही गरीब थे. हमारे बेटे ने ड्रग्स खरीदने के लिए हमारा सबकुछ बेच दिया था. दो महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी. ड्रग्स के लिए उसने शादी में मिले सारे तोहफे भी बेच दिए."

लक्ष्मी बताती हैं कि रिकी के कई दोस्त थे. उनके साथ मिलकर वो नशा करने लगा. धीरे-धीरे वो चिट्टा (हेरोइन) और दूसरे नशों का आदी हो गया. एक समय बाद उसकी ज़िंदगी में नशे के अलावा कोई और काम नहीं था.

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एक मां का दर्द

लक्ष्मी बताती हैं कि रिकी ने आखिरी समय में नशा छोड़ने की काफी कोशिश की. "मैंने उसे अस्पताल में भर्ती भी कराया. लेकिन वो बच ना सका." ये कहते हुए लक्ष्मी देवी की भरी आंखों से आंसू छलक पड़े.

लक्ष्मी देवी कहती हैं, "आसानी से नशा मिलने की वजह से नौजवान मौत के मुंह में जा रहे हैं. गली-गली में नशे का सामान मिल रहा है. इस कारण ही छोटे-छोटे बच्चे भी नशे के आदी हो रहे हैं."

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आंकड़े क्या कहते हैं?

बीते सालों के मुकाबले पंजाब में इस साल नशे की वजह से मरने वालों की तादाद दोगुनी हो गई है. इस साल जून तक 60 लोगों की मौत हुई है और ये आंकड़ा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है.

एक अधिकारी की मानें तो ड्रग्स के चलते हर दिन औसतन एक व्यक्ति की मौत हो रही है.

पंजाब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया,"जून तक पंजाब में ड्रग्स की वजह से 60 संदिग्ध मौते हुई हैं. जबकि पिछले दो सालों तक ये आंकड़ा 30 से 40 था."

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पंजाब पुलिस की ओर से मुहैया कराई गई जानकारी के मुताबिक़ पिछले साल कुल 38 लोगों की मौत हुई थी, जबकि साल 2018 में अप्रैल से जून के दौरान ही 37 लोगों ने नशे की वजह से अपनी जान गवां दी.

बॉर्डर ज़ोन के अमृतसर, गुरदासपुर और तरन तारन इलाकों में सबसे ज़्यादा 14 मौतें हुई हैं, जबकि जालंधर में 11 और बठिंडा में 10 मौतें हुई हैं.

साल 2017 में इन तीन महीनों के दौरान बठिंडा में 16 लोगों की मौत हुई थी.

सभी मौतों की जांच के आदेश देते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि पुलिस की सख्ती की वजह से हेरोइन की तस्करी मुश्किल हो गई है, इसलिए तस्करों ने हेरोइन को सस्ते पदार्थ के साथ मिलाना शुरू कर दिया, जिससे ये और खतरनाक हो गई है.

हाल में आई बॉलीवुड फिल्म 'उड़ता पंजाब' में भी राज्य की ड्रग्स से जुड़ी समस्या पर रोशनी डाली गई थी.

ड्रग्स का मुद्दा राज्य की राजनीति में भी गरमाता रहा है.

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ड्रग्स और पंजाब

पंजाब में शराब का चलन आम है. राज्य के ग्रामीण इलाकों में किसान और मज़दूर ज़्यादा काम करने के लिए भुक्की और अफीम का नशा करते हैं.

लेकिन पिछले कुछ समय में पंजाब में नशे की खपत बहुत ज़्यादा बढ़ गई है. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के लिए एम्स ने साल 2015 में एक अध्ययन किया था, जिसके मुताबिक पंजाब की कुल आबादी में से 2.32 लाख लोग नशे के आदी हैं.

अध्ययन के मुताबिक पंजाब में ड्रग्स का सालाना मार्केट करीब 7,500 करोड़ का है.

ड्रग्स के इस पैटर्न को समझने के लिए बीबीसी ने पुलिस, सीमा सुरक्षा बल और इंटेलिजेंस के अधिकारियों से बात की.

पुनर्वास केंद्र
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क्या कहते हैं अधिकारी?

अधिकारियों के मुताबिक पंजाब के लोग कई तरह के ड्रग्स लेते हैं, मसलन भुक्की, अफीम, हेरोइन, मेडिकल नशा और सिंथेटिक नशा. लेकिन इन सब में हेरोइन, जिसे चिट्टा (सफेद) भी कहा जाता है, सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होती है. पिछले कुछ सालों में चिट्टा नशेड़ियों की पसंद बनता जा रहा है.

पटियाला के पुलिस कमिशनर डॉ. सुखचैन सिंह का कहना है कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोग अलग-अलग तरह का नशा करते हैं.

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लुधियाना शहर में मेडिकल नशे की शिकायतें ज़्यादा मिलती हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में हेरोइन या चिट्टे की शिकायतें ज़्यादा मिलती हैं.

उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वक्त में उन्होंने अपने क्षेत्र में ड्रग्स पर नकेल कसी है.

इस मुद्दे पर एसटीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि नशे करने वाले सप्लाई के हिसाब से नशा करते हैं.

उन्होंने बताया कि अगर एक नशे के खिलाफ सख्ती होती है तो नशेड़ी दूसरे किस्म के नशे करने लगते हैं.

पुलिस का कहना है कि हेरोइन काफी महंगा होता है. एक ग्राम हेरोइन की कीमत 4000 से 6000 रुपए तक होती है. हेरोइन का आदी शख्स एक दिन में 0.5 ग्राम से दो ग्राम तक हेरोइन लेता है.

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अलग-अलग रास्ते से ड्रग्स तस्करी

एसटीएफ के मुताबिक हेरोइन अफगानिस्तान से पाकिस्तान होती हुई पंजाब पहुंचती है.

पंजाब की सरहद पाकिस्तान के साथ लगती है. जब नशे के सौदागरों के खिलाफ कार्रवाई होती है तो वो दूसरे रूट का इस्तेमाल करते हैं. ये दूसरा रूट राजस्थान या जम्मू-कश्मीर हो सकता है.

पंजाब पुलिस के आईजी राकेश कुमार जैसवाल का कहना है, "पाकिस्तान भले ही ड्रग्स का रूट है, लेकिन हमने दिल्ली रूट से आती हुई नशे की खेपें पकड़ी हैं."

उन्होंने बीबीसी को बताया कि नशे के सौदागर इसकी सप्लाई का रूट बदलते रहते हैं.

पिछले साल मई में लुधियाना पुलिस पार्टी ने पांच किलो हेरोइन ज़ब्त की थी.

पुलिस की जांच में पता चला कि गांव के सरपंच के बेटे गुरमेल सिंह और फिरोज़पुर ज़िले के चार लोगों के पास पाकिस्तान के सिम कार्ड थे, जिसके ज़रिए वो सरहद पार के तस्करों से बात करते थे.

पुलिस के मुताबिक अभियुक्त सरहद पार से भारी मात्रा में हेरोइन मंगवाते थे और पूरे पंजाब में सप्लाई करते थे और ब्रोकरों की मदद से तस्करों को पैसे पहुंचाए जाते थे. ये मामला फिलहाल कोर्ट में है.

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इस साल जुलाई में अमृतसर के कस्टम अधिकारियों ने 3.75 करोड़ कीमत के ड्रग्स पकड़े थे. पुलिस ने बताया कि ये हेरोइन के पैकेट पाकिस्तान से आ रही एक माल गाड़ी के डब्बे में छिपाए गए थे.

अमरिंदर सिंह जब पिछले साल पंजाब के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने राज्य को ड्रग्स से मुक्त कराने का वादा किया था.

हालांकि सरकार ने ड्रग्स की सप्लाई को काफी हद तक रोक दिया है, लेकिन उन्होंने अभी सिर्फ आधा काम किया है.

एक अधिकारी ने माना, "हमने कार्रवाइयां की हैं. लेकिन पंजाब से ड्रग्स को पूरी तरह निकालने के लिए जागरूकता और नशामुक्ति केंद्रों को बेहतर करने की ज़रूरत है."

साफ तौर पर अमरिंदर सिंह के सामने अभी चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं.

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