अमित शाह के अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार कश्मीर पहुँचने से सरगर्मी

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- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी के लिए
गृह मंत्री अमित शाह तीन दिन के अपने जम्मू-कश्मीर दौरे पर शनिवार सुबह श्रीनगर पहुँचे.
श्रीनगर के हवाई अड्डे पर उतरने से पहले ही कश्मीर घाटी में ज़बर्दस्त बारिश और कई जगहों पर बर्फ़बारी हो रही थी.
पाँच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाने के बाद अमित शाह का जम्मू-कश्मीर का यह पहला दौरा है.
अमित शाह का यह दौरा कश्मीर में एक ऐसे समय में हो रहा है, जब संदिग्ध चरमपंथियों ने हाल के दिनों में 11 आम नागरिकों की हत्या कर दी है.
मरने वालों में पाँच प्रवासी मज़दूरों के अलावा कश्मीर के अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी शामिल थे. इन हत्याओं के बाद कई प्रवासी मज़दूर और कश्मीरी पंडित घाटी छोड़कर चले गए हैं.
अमित शाह की जम्मू-कश्मीर यात्रा शुरू होने से पहले ही कश्मीर घाटी ख़ासकर श्रीनगर में सुरक्षा प्रबंध को काफ़ी सख़्त किया गया है. जगह-जगह चेक पोस्ट, स्नाइपर डॉग्स, शार्प शूटर्स को तैनात किया गया है. श्रीनगर की डल झील भी सुरक्षाबलों की निगरानी में है.
श्रीनगर के राजभवन इलाक़े के आस-पास गुज़रने वाली सड़कों को आम ट्रैफिक के लिए अगले दो दिनों तक बंद किया गया है.
गृह मंत्री के दौरे से पहले सुरक्षाबलों ने चरमपंथियों के ख़िलाफ़ भी अपने अभियान तेज़ कर दिए हैं और बीते 23 दिनों में क़रीब 18 से अधिक चरमपंथियों को मारने का भी पुलिस ने दावा किया है.
अमित शाह के दौरे से पहले ही कश्मीर में टू व्हीलर्स को पुलिस बड़े पैमाने पर ज़ब्त कर रही थी.
हालांकि, पुलिस ने आधिकारिक तौर पर मोटर साइकिलों के न चलने के आदेश जारी नहीं किए हैं लेकिन अब तक सैंकड़ों मोटर साइकिलें ज़ब्त की गई हैं. ऐसी मोटर साइकिलों को भी ज़ब्त किया जा रहा है, जिनके पास पूरे काग़ज़ात हैं.
पुलिस ने मोटर साइकिल ज़ब्त करने पर बताया है कि ऐसा गृह मंत्री के दौरे के लिए नहीं किया जा रहा है बल्कि ये मामला चरमपंथी हिंसा से जुड़ा हुआ है.
ख़बरों के मुताबिक़ कश्मीर घाटी में बीते कुछ दिनों में क़रीब 700 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें बड़ी संख्या युवाओं की है.
कश्मीर के दौरे पर केंद्रीय मंत्री
मोदी सरकार के जम्मू-कश्मीर में आउटरीच प्रोग्राम के तहत बीते एक महीने से भी ज़्यादा समय से केंद्रीय मंत्री जम्मू-कश्मीर के दौरे पर पहुँच रहे हैं.

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जम्मू-कश्मीर में साल 2018 से विधानसभा चुनाव नहीं हुए हैं. साल 2018 में बीजेपी-पीडीपी की गठबंधन सरकार बीजेपी का समर्थन वापस लेने के बाद गिर गई थी.
हालांकि, केंद्र में बीजेपी की सरकार बीते तीन वर्षों से यह कह रही है कि समय आने पर चुनाव कराए जाएंगे.
जम्मू-कश्मीर के सभी राजनीतिक दल राज्य का विशेष दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं. गृह मंत्री अमित शाह ने ख़ुद बताया था कि सही समय पर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा.
अनुच्छेद 370 हटाने के बाद कश्मीर की राजनीतिक गतिविधियों पर एक लंबा सन्नाटा छाया हुआ है. अनुच्छेद 370 हटाने के दिन ही कश्मीर के मुख्य राजनीतिक दलों के नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था, जिनमें तीन पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल थे.
उधर, जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की भी आख़िरी तैयारियां हो रही हैं और परिसीमन करने के बाद चुनाव कराने की भी बातें हो रही हैं.
जम्मू-कश्मीर में चुनाव करवाने के हवाले से भी गृह मंत्री अमित शाह के इस दौरे को राजनीतिक अहमियत मिल रही है.
भारत के गृह मंत्री ऐसे समय में जम्मू-कश्मीर के दौरे पर हैं, जब केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की सरकार ने दुबई सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर दस्तख़त किए हैं.
इस MoU में दुबई सरकार ने बताया है कि वह जम्मू-कश्मीर में निवेश करेगी.
कश्मीर में जारी चरमपंथ और भारत और दुबई के इस क़दम से पाकिस्तान को झटका लगने की बातें हो रही हैं. कुछ विश्लेषक कहते हैं कि मुस्लिम देशों का भारत के साथ रिश्ते बढ़ाना पाकिस्तान के लिए कोई अच्छे संकेत नहीं हैं.
क्यों अहम है दौरा
अमित शाह के जम्मू कश्मीर के दौरे को स्थानीय बीजेपी नेता बहुत अहम मान रहे हैं. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं, "कश्मीर में जो इस समय हालात हैं, उन्हें देखते हुए देश के गृह मंत्री की यात्रा बहुत मायने रखती है. इससे सबका हौसला बढ़ेगा. कश्मीर में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग और कश्मीर में रहने वाले ग़ैर-कश्मीरी मज़दूरों का भी हौसला बढ़ेगा."
कश्मीर के राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि गृह मंत्री अमित शाह के जम्मू-कश्मीर दौरे की अहमियत इसलिए और भी बढ़ जाती है क्योंकि जम्मू-कश्मीर में हालात शांतिपूर्ण नहीं हैं.
कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हारून रेशी कहते हैं, "कश्मीर में हाल के दिनों में मज़दूरों, पंडितों और सिखों की हत्याएं हुईं हैं और दूसरी ओर जम्मू के पुंछ में बीते 12 दिनों से चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सुरक्षाबलों का अभियान जारी है. इन हालात के बीच भारत के गृह मंत्री का दौरा और भी अहम हो जाता है."
"लोग ये उम्मीद कर रहे हैं कि गृह मंत्री सुरक्षा एजेंसियों को इन हालात को लेकर सख़्त आदेश दे सकते हैं. यह भी मुमकिन है कि कई सारे प्रश्न जो जम्मू-कश्मीर के हवाले से गृह मंत्री के दिमाग़ में होंगे, उनका वो जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे."
रेशी ये भी कहते हैं कि अनुच्छेद 370 हटाने के फ़ौरन बाद भारत सरकार ने कहा था कि कश्मीर का मसला हमेशा के लिए हल हो गया है और अनुच्छेद 370 विकास के रास्ते में एक रुकावट था.
वो कहते हैं, "हालात ने बाद में साबित किया कि जो बातें बीजेपी सरकार ने बताई थीं, उन बातों में कोई ख़ास ज़मीनी सच्चाई नहीं थी. दो वर्ष का अनुभव हमारे सामने है. हिंसा की घटनाएं बराबर जारी हैं. कश्मीर समस्या की गूंज लगतार सुनाई दे रही है. बालाकोट स्ट्राइक्स के बाद भारत सरकार ने ये भी दावा किया था कि अब घुसपैठ बिलकुल बंद होगी लेकिन पुंछ के ताज़ा हालात हमें बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर में हालात ठीक नहीं हैं."
"ज़ाहिर है कि जब गृह मंत्री इन सब बातों का जायज़ा लेंगे तो उसके बाद में वह इज़हार भी करेंगे. ये बात भी मालूम होगी कि जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात पर किस तरह की सोच रखते हैं. ये सभी बातें गृह मंत्री के जम्मू-कश्मीर के दौरे को अहम बना रही हैं."

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अमित शाह के आगे और कौन-से मुद्दे होंगे
राजनीति शास्त्र के पूर्व प्रोफ़ेसर और विश्लेषक नूर अहमद बाबा कहते हैं कि कई मामले हैं जो गृह मंत्री अमित शाह के जम्मू-कश्मीर दौरे को अहम बना रहे हैं.
उन्होंने कहा, "साल 2019 में जम्मू-कश्मीर में जो तब्दीलियां की गईं, उस समय अमित शाह गृह मंत्री थे और इन तब्दीलियों को ज़मीन पर लागू करने के लिए वह आगे थे. बीते इन दो वर्षों में कोई ख़ास सियासी गतिविधियां भी नहीं हुईं. प्रधानमंत्री ने महज़ जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों के साथ एक बैठक की थी और उसको फिर फॉलो भी नहीं किया गया.
"लोगों को उम्मीद थी कि शायद उनको विश्वास में लिया जाएगा और ये सन्देश चला जाए कि इन्होंने कश्मीर को नज़रअंदाज़ नहीं किया. फ़िलहाल, गृह मंत्री ने श्रीनगर में चरमपंथी हमले में मारे गए एक पुलिस अधिकारी के घर जाकर ये विश्वास दिलाया कि आप अकेले नहीं हैं. इसका सीधा मतलब ये है कि गृह मंत्री पुलिस और सुरक्षाकर्मियों का हौसला भी बढ़ा रहे हैं."
"गृह मंत्री यह भी देखेंगे कि जिन नीतियों के तहत वह कश्मीर में चल रहे हैं, क्या उनको बदलने की ज़रूरत है? जम्मू-कश्मीर में चुनाव नहीं हो रहे हैं, परिसीमन का मामला है, राज्य का दर्जा वापस करने की मांग है. लोग सब बातों को देख रहे हैं कि किस तरह की घोषणा गृह मंत्री करेंगे. बीते दो साल के समय में लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं और लोग ये भी देख रहे हैं कि क्या इन चिंताओं पर गृह मंत्री कुछ आश्वासन दे सकते हैं?"
श्रीनगर एयरपोर्ट पर उतरने के बाद गृह मंत्री अमित शाह सीधे श्रीनगर के नौगाम इलाक़े में पहुँचे और मारे गए पुलिस अधिकारी परवेज़ अहमद के परिवारवालों से मिले. बीते महीने चरमपंथियों ने परवेज़ अहमद की घर के नज़दीक गोली मार कर हत्या कर दी थी.
ग़ौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह इससे पहले भी वर्ष 2019 में श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर पुलिस के इंस्पेक्टर अरशद ख़ान के घर चले गए थे. ख़ान की भी एक चरमपंथी हमले में मौत हो गई थी.
परवेज़ के घर जाने के बाद गृह मंत्री ने श्रीनगर में सुरक्षा व्यवस्था पर एक बैठक की जिसमें शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल थे. इस बैठक में गृह मंत्री ने चरमपंथ और कट्टरपंथ पर अधिकारियों से जवाब तलब किए हैं.
हाल ही में मारे गए अल्पसंख्यक समूह के कुछ लोगों के परिजनों से भी गृह मंत्री श्रीनगर में मिलने वाले हैं. इसके इलावा अमित शाह कई संगठनों और राजनीतिक दलों के नेताओं से भी मिलेंगे.

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बाक़ी दो दिन का क्या है कार्यक्रम
गृह मंत्री रविवार को (दौरे के दूसरे दिन) जम्मू के लिए रवाना होंगे और शाम को वापस श्रीनगर लौटेंगे. हालांकि, जम्मू में उन्हें एक जनसभा को संबोधित करना था लेकिन ख़राब मौसम के कारण यह प्रोग्राम रद्द कर दिया गया है. इस बात की जानकारी बीबीसी को जम्मू-कश्मीर बीजेपी यूनिट के जनरल सेक्रेटरी अशोक कौल ने दी.
उनका कहना था कि अब गृह मंत्री सिर्फ़ जम्मू यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम में प्रोग्राम करेंगे और उसके बाद आईआईटी जम्मू भी जाएंगे. जम्मू यूनिवर्सिटी में वह बीजेपी के कार्यकर्ताओं से भी मिलेंगे.
तीसरे दिन श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में विभिन्न प्रतिनिधिमंडल से मिलेंगे. कश्मीर में बीजेपी के प्रवक्ता अल्ताफ़ ठाकुर ने बताया कि शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में भी गृह मंत्री को एक जनसभा को संबोधित करना था, लेकिन वह भी रद्द होने की आशंका है. तीसरे दिन गृह मंत्री शाम को वापस दिल्ली जा रहे हैं.
गृह मंत्री के इस दौरे को जम्मू-कश्मीर में बहुत दिलचस्पी से देखा जा रहा है.
एक आम नागरिक ख़ुर्शीद अहमद ने बताया कि गृह मंत्री अमित शाह के मौजूदा दौरे को लोग बहुत अहमियत दे रहे हैं. लोगों को ये उम्मीद है कि गृह मंत्री ऐसे कुछ क़दम उठाएंगे जिससे शायद आम लोगों को रहत मिले.
खुर्शीद बताते हैं कि अगर गृह मंत्री इसी तरह कश्मीर आते रहेंगे तो हो सकता है कि दूरियां ख़त्म हो जाएं.
ख़ुर्शीद का कहना था कि गृह मंत्री के दौरे को इसलिए भी अहमियत से देखा जा रहा है, शायद कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियां फिर से शुरू हो जाएं और लोगों को अपने नुमाइंदे चुनने का अधिकार मिल सके.
ख़ुर्शीद ये भी कहते हैं कि इस दौरे की अहमियत तब और पता चलेगी जब गृह मंत्री अपने दौरे के बाद कुछ ऐसी घोषणाएं करें जिससे हर किसी में विश्वास पैदा हो सके.
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