भारत का कोयला संकट: बिजली की 'कालाबाज़ारी' पर केंद्र सरकार को क्यों देनी पड़ी चेतावनी?

इमेज स्रोत, NTPC
कोयला संकट को लेकर लगातार आ रही रिपोर्टों के बीच केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे खुले बाज़ारों में बिजली न बेचें.
केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि अगर बढ़ती हुई क़ीमतों का राज्यों ने फ़ायदा उठाने की कोशिश की तो केंद्र की तरफ़ से की जाने वाली बिजली आपूर्ति में कटौती की जाएगी.
सरकार की तरफ़ से ये बयान ऐसे समय में आया है जब भारत के कम होते जा रहे कोयला स्टॉक को लेकर चेतावनी जारी की जा रही है. इसका असर कोयले से चलने वाले पावर प्लांट पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
कुछ राज्यों में कई घंटों की बिजली कटौती शुरू हो गई और कोयले की किल्लत के कारण उन्हें इस संकट का सामना करना पड़ रहा है. एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था व्यापक स्तर पर ऊर्जा संकट का सामना कर रही है.
दुनिया भर में बिजली की कीमत अचानक से बढ़ी है और इस बीच भारत में कोयले से चलने वाले पावर प्लांट में कोल स्टॉक कम हो गया है. भारत में बिजली के उत्पादन का तकरीबन 70 फ़ीसदी हिस्सा कोयले से चलने वाले पावर प्लांट से आता है.
कोयले के आयात को मंज़ूरी
केंद्र सरकार ने मंगलवार को बिजली बनाने वाली कंपनियों को बाहर से कोयला मंगाने की इजाज़त दे दी.
बढ़ती हुई ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बिजली कंपनियों को घरेलू कोयले में आयातित कोयले की 10 फ़ीसदी तक मात्रा मिलाने की मंज़ूरी दी गई है.
माना जा रहा है कि वैश्विक बाज़ार में पहले से ही तेज़ भाव पर बिक रहा कोयला भारत के इस कदम से और महंगा हो सकता है.
भारत में कोयला आधारित पावर प्लांट चलाने वाली कंपनियां अभी तक प्रमुख रूप से देसी कोयले का इस्तेमाल करती रही हैं और आयात पर उनकी निर्भरता बहुत कम रही है.
सरकार की ओर से कहा गया है कि जिस तरह से बिजली की खपत बढ़ी है, सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड की ओर से उतनी आपूर्ति नहीं हो पा रही है. बाहर से कोयला मंगाने को लेकर सरकारी नीति में बदलाव को इस पहलू से जोड़कर देखा जा रहा है.
कोरोना से जुड़ी पाबंदियां हटने के बाद जैसे ही भारत में अर्थव्यवस्था ने रफ़्तार पकड़नी शुरू की, बिजली की मांग भी उसी रफ़्तार से बढ़ने लगी है.

इमेज स्रोत, ANI
केंद्र सरकार की चेतावनी
केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक़ कुछ राज्य अपने उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति करने के बजाय लोड शेडिंग (बिजली की आपूर्ति में कटौती) कर रहे थे और इस तरह से बचाई गई बिजली को एनर्जी एक्सचेंज में ऊंची क़ीमतों पर बेचा जा रहा था. हालांकि केंद्र सरकार ने इस पर विस्तार से कुछ नहीं कहा है कि कौन से राज्य ऐसा कर रहे थे.
सरकार ने कहा है, "जो राज्य ऐसा कर रहे हैं, उन्हें केंद्र की तरफ़ से दी जाने वाली बिजली की आपूर्ति में कटौती कर दी जाएगी. अगर राज्यों ने ऐसा किया तो उनके हिस्से की बिजली दूसरे ज़रूरतमंद राज्यों को दे दी जाएगी."
एनटीपीसी और दामोदर घाटी निगम जैसे केंद्र सरकार के उपक्रम वितरण कंपनियों के साथ बिजली बेचने के लिए लंबी अवधि के समझौते करती हैं. उनके उत्पादन का 15 फ़ीसदी हिस्सा केंद्र सरकार के नियंत्रण में रहता है जो राज्यों को आवंटित किया जाता है.
विद्युत मंत्रालय ने कहा है कि अगर किसी राज्य के पास अतिरिक्त बिजली है तो वो केंद्र सरकार को इसकी जानकारी दे ताकी ज़्यादा ज़रूरतमंद राज्यों को इसका आवंटन किया जा सके.

इमेज स्रोत, ANI
राज्य सरकारों की शिकायत
केंद्र सरकार की तरफ़ से ये चेतावनी राज्यों की शिकायत के बाद आई है. राज्य सरकारों ने शिकायत की थी कि एनर्जी एक्सचेंज में ऊंची क़ीमतों पर बिजली बेची जा रही है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन एक्सचेंज लिमिटेड के शेयरों में पिछले दिनों आई रिकॉर्ड तेज़ी की वजह का यही कारण था.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिजली की तेज़ होती क़ीमतों को लेकर शिकायती चिट्ठी लिखी है. उन्होंने लिखा कि 15 सितंबर से 8 अक्टूबर की अवधि के लिए आंध्र प्रदेश को तीन गुणा ज़्यादा कीमत देकर 15 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली ख़रीदनी पड़ी.
वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने प्रधानमंत्री से कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के लिए भी आग्रह किया है. मंगलवार को इंडियन एनर्जी एक्सचेंज पर एक यूनिट बिजली की कीमत 20 रुपये प्रति यूनिट थी.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी शनिवार को ऊर्जा संकट को लेकर आगाह किया था. कुछ पूर्वी और उत्तरी राज्यों में लोगों को पहले से ही बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है.

इमेज स्रोत, ANI
केजरीवाल का पीएम को पत्र
जगनमोहन रेड्डी से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 9 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की थी.
उन्होंने अनुरोध किया था कि दिल्ली को बिजली देने वाले ताप विद्युत संयंत्रों को कोयले की पर्याप्त आपूर्ति की जाए. केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को बताया कि कोयले की कमी के चलते दिल्ली को बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है.
वहीं, दिल्ली के बिजली मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया था कि दिल्ली की अधिकांश बिजली एनटीपीसी से ख़रीदी जाती है और यदि उसने आपूर्ति बंद कर दी, तो दिल्ली को 'ब्लैकआउट' के हालात का भी सामना करना पड़ सकता है.
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 10 अक्टूबर को कहा है कि केंद्र सरकार किसी भी समस्या को स्वीकार न करके उसे और विकराल बना देती है.
सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार ये स्वीकार नहीं कर पा रही है कि देश में कोयला संकट है और उसकी हर समस्या से आंख मूंदने की नीति की वजह से कोई भी समस्या देश के लिए विकराल साबित हो सकती है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ऊर्जा मंत्रालय ने एनटीपीसी और दामोदर वैली कॉरपोरेशन को दिल्ली वितरण कंपनियों को बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा है.
योगी ने कहा, यूपी रात में नहीं काटी जाएगी बिजली
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोगों आश्वासन दिया कि गांव या शहर कहीं भी रात में बिजली नहीं काटी जाएगी.
देश के कई राज्यों में कोयले की आपूर्ति में कमी की आशंका जताई जा रही है. कहा जा रहा है कि कोयले की किल्लत की वजह से बिजली के उत्पादन पर असर पड़ सकता है और इसकी सप्लाई में कटौती की जा सकती है.
योगी आदित्यनाथ ने यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के निदेशक एम देवराज को राज्य में बिजली संयंत्रों को हो रही कोयले की आपूर्ति के संबंध में गहन समीक्षा करने और राज्य के बिजली संयंत्रों को पर्याप्त कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया.
साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में शाम छह बजे से सुबह सात बजे तक लगातार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए.

इमेज स्रोत, ANI
बिहार ऊंची कीमत पर ख़रीद रहा है बिजली
वहीं, बिहार ने पिछले पांच दिनों में निजी स्रोतों से बिजली ख़रीदने के लिए 90 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को इसकी जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि इस स्थिति के बावजूद बिहार रोज़ाना 5,500 मेगावाट की अपनी पीक लोड मांग को पूरा कर रहा है.
उन्होंने बताया कि राज्य के बिजली विभाग के अधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि बिहार को जल्द ही नियमित बिजली आपूर्ति मिलेगी.
नीतीश कुमार ने कहा, "मैं ख़ुद स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा हूं. हम किसी भी संकट को टालने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि राज्य को पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है."
उन्होंने कहा, "इस कमी को पूरा करने के लिए बिहार ऊंची दर पर निजी स्रोतों से बिजली ख़रीदने के लिए अतिरिक्त राशि खर्च कर रहा है."

इमेज स्रोत, ANI
ऊर्जा संकट पर क्या था कोयला मंत्री ने
इससे पहले केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयला के महंगा होने से इसकी आपूर्ति और बिजली के उत्पादन में कमी आई है. हालांकि उन्होंने भरोसा दिया है कि अगले तीन से चार दिनों में हालात "ठीक" हो जाएंगे.
एक पुस्तक के विमोचन के मौके पर शनिवार को उन्होंने बताया कि इस साल भारी बारिश के चलते भी कोयले के उत्पादन और आपूर्ति में कमी आई है.
कोयला मंत्री ने हालांकि कहा, "यदि पिछले कई सालों के आंकड़ों को मिलाएंगे तो पाएंगे कि इस साल सितंबर और ख़ासकर अक्टूबर में कोयले का उत्पादन और इसकी आपूर्ति सबसे अधिक रही है. उम्मीद है कि अगले तीन से चार दिनों में हालात सामान्य हो जाएंगे."
प्रह्लाद जोशी ने कहा, "आयात किए जाने वाले कोयले के अंतरराष्ट्रीय दाम अचानक से बढ़ गए हैं. इसलिए आयातित कोयले से चलने वाले बिजली घरों ने अपना उत्पादन बंद कर दिया है. ऐसे संयंत्रों के बंद हो जाने के बाद समूचा भार घरेलू कोयले पर आ गया है."
कोयला मंत्री ने कहा था कि वो अगले एक-दो दिनों में कोयले की उपलब्धता का 'पूरा ब्यौरा' पेश करेंगे.
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने रविवार को कहा था कि देश में अगले 28 दिनों के लिए पर्याप्त कोयला है और ईंधन ख़त्म होने का डर आधारहीन है. उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति में कोई दिक्कत नहीं आएगी.
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस समय भारत के 135 कोयला संचालित बिजली संयंत्रों में से आधे से अधिक गंभीर कोयला संकट से जूझ रहे हैं. कई प्रांतों में कोयला संचालित प्लांट बंद भी हो गए हैं और कई बंद होने की कगार पर हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, कोयला मंत्रालय ने भरोसा दिया है कि देश की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कोयला है. कोयला बिजली संयंत्रों में रोज़ाना 18.5 लाख टन कोयले की ज़रूरत होती है जबकि प्रतिदिन 17.5 लाख टन कोयले की ही आपूर्ति हो पा रही है.
कॉपीः विभुराज
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)




















