कोरोना लॉकडाउन: क्या आज रात 9 बजे बत्तियां बुझाने से इलेक्ट्रिकल ग्रिड फ़ेल हो सकते हैं?

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, अनंत प्रकाश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपील की है कि सभी भारतीय नागरिक पांच अप्रैल को शाम 9 बजे 9 मिनट के लिए अपने घरों की बत्तियां बुझाकर मोमबत्ती, दिया, टॉर्च और मोबाइल की फ़्लैश लाइट जलाएं.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि चारों ओर हर व्यक्ति जब एक-एक दिया जलाएगा तब प्रकाश की उस महाशक्ति का अहसास होगा जिसमें ये उजागर होगा कि हम सब एक ही मक़सद से (कोरोना वायरस के ख़िलाफ़) लड़ रहे हैं.
लेकिन इस अपील से एक सवाल और चिंता पैदा हुई है कि कहीं अचानक बिजली की खपत कम होने और फिर 9 मिनट के अंदर बढ़ने से ग्रिड पर क्या असर पड़ेगा?
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
आख़िर ग्रिड फ़ेल होने की बात क्यों हो रही है?
महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने कहा है कि अगर अचानक से सभी लाइटें बंद कर दी गईं तो इससे ग्रिड फ़ेल हो सकता है, हमारी सभी आपातकालीन सेवाएं बंद हो सकती हैं जिसके बाद सुचारू ढंग से बिजली आपूर्ति में एक हफ़्ते का समय लग सकता है.
उन्होंने लोगों से बिना बत्तियां बुझाए मोमबत्तियां जलाने की अपील की है.
कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताई है.
उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि ऊर्जा क्षेत्र से लगभग तीन दशकों तक जुड़े रहने और मंत्री के रूप में काम करने वाले शख़्स के रूप में उन्हें लगता है कि पांच अप्रैल को 9 बजे 9 मिनट के लिए अंधेरा करने से ग्रिड और उसके संतुलन पर गहरा असर पड़ सकता है.
और वह उम्मीद करते हैं कि इस बात का ठीक से ध्यान रखा जा रहा है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
लेकिन जयराम रमेश समेत कई जानकार ग्रिड फ़ेल होने की आशंकाएं क्यों जता रहे हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपे लेख के मुताबिक़, भारत दुनिया का ऐसा देश है जहां बिजली की ऊर्जा आपूर्ति प्रतिदिन 150 गीगावॉट से ज़्यादा है.
और पॉवर सिस्टम ऑर्गनाइज़ेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड वो संस्था है जो भारत में ऊर्जा की ग्रिड का संचालन करती है.
ये संस्था प्रत्येक दिन की मांग का आकलन करके ज़रूरत के मुताबिक़ बिजली पैदा करने वाले प्लांट्स से बिजली लेती है.
इस प्रक्रिया के तहत पॉवर सिस्टम ऑर्गनाइज़ेशन कॉरपोरेशन मांग और आपूर्ति में संतुलन स्थापित करती है.
ये संतुलन (फ्रिक्वेंसी) पचास हर्ट्ज़ होता है जिसके अंतर्गत ही बिजली से चलने वाले उत्पाद काम करते हैं.
ये संतुलन बिगड़ने की वजह से आपूर्ति ज़्यादा होगी तो हमारे घरों में वोल्टेज में बढ़ोतरी देखी जाएगी और मांग बढ़ने पर वोल्टेज में कमी देखी जाएगी.
बिजली के उत्पादन में कमी आने पर ग्रिड ऑपरेटर को बिजली की कटौती करके आपूर्ति को घटाना पड़ता है जिससे संतुलन बना रह सके.
बीबीसी ने ऑल इंडिया पॉवर फ़ेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे से इसके तकनीकी पहलू को समझने की कोशिश की है.
शैलेंद्र दुबे बताते हैं, "बिजली एक ऐसी कमोडिटी है जिसे संग्रहित नहीं किया जा सकता है. ऐसे में जितना उत्पादन किया जाता है, उसको इस्तेमाल किया जाना ज़रूरी है. इस समय पूरे देश में लॉकडाउन होने की वजह से उत्पादन घटकर 120000 मेगावॉट हो रहा है. सामान्य रूप से ये उत्पादन 167000 मेगावॉट होता है."
"ऐसे में रविवार को जब लोग रात नौ बजे अचानक से बत्तियां बंद करेंगे तो ये माना जा रहा है कि खपत में 17000 मेगावॉट की कमी आएगी. जब अचानक से बिजली की खपत कम होती है तो वोल्टेज अचानक से बढ़ जाता है. इससे फ्रिक्वेंसी जो कि पचास हर्ट्ज़ रहती है उसके बढ़ने की संभावना रहती है. और फ्रिक्वेंसी ज़्यादा या कम होने से ग्रिड फ़ेल होने का ख़तरा उत्पन्न होता है."
ग्रिड फ़ेल होने की आशंका क्यों?
भारत में पैदा होने वाली बिजली का एक तिहाई हिस्सा लोगों के घरों में ख़र्च होता है. और ये ख़र्च घरों में एसी, कूलर, पंखे, टीवी, फ्रिज और इलेक्ट्रिक ओवन जैसे उत्पादों में ख़र्च होता है.
शैलेंद्र दुबे मानते हैं कि अगर खपत अचानक से कम हो जाए तो ग्रिड फ़ेल होने का ख़तरा रहता है.
वो कहते हैं, "चूंकि हमें इस बारे में पहले से पता है, इसलिए हम लोग इसके लिए पहले से क़दम उठा रहे हैं ताकि ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े."
लेकिन एक चिंता ये भी जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद अगर बड़े रिहायशी इलाक़ों में, हाउसिंग कॉम्प्लेक्स वालों ने और बहुमंज़िला इमारतों ने अतिउत्साह में अचानक से मुख्य लाइन को बंद कर दिया तो उसके बाद क्या होगा?
इससे पहले इस तरह का उत्साह थाली बजाने की अपील के समय देखा गया था.
शैलेंद्र दुबे बताते हैं, "ये बात सही है कि अगर लाइटें बंद करने की जगह सामूहिक रूप से बिजली बंद की गई तो जिस खपत का आकलन हम कर रहे हैं, खपत उससे ज़्यादा कम हो जाएगी और वैसी स्थिति में ग्रिड फ़ेल होने का ख़तरा पैदा हो जाएगा."
ऊर्जा मंत्रालय ने अपने ट्वीट्स में ये स्पष्ट किया है कि बिजली की खपत में आने वाले अचानक बदलाव से निपटने के लिए सारे इंतज़ाम किए गए हैं ताकि 9 बजे बत्तियां बुझाए जाने के बाद ग्रिड को संतुलित रखा जा सके.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 3
पंखे न बंद किए जाएं
इसके साथ ही ऊर्जा मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से इस अपील के मायने समझाने के लिए सिलसिलेवार ट्वीट किए हैं.

इमेज स्रोत, Ministry of Power
ऊर्जा मंत्रालय ने सफ़ाई देते हुए कहा है, ''प्रधानमंत्री की अपील पाँच अप्रैल को रात में नौ बजे से नौ मिनट तक केवल लाइट ऑफ करने के लिए है. स्ट्रीट लाइट या कंप्यूटर्स, टीवी, पंखा, फ़्रीज और एसी ऑफ़ करने के लिए नहीं कहा गया है. केवल लाइट ऑफ़ करने की अपील की गई है. हॉस्पिटल, पुलिस स्टेशन, म्यूनिसिपल सर्विस और मैन्युफ़ैक्चरिंग सर्विस में यह अपील लागू नहीं है. पीएम की अपील केवल घरों के लिए है. सभी स्थानीय निकायों से कहा गया है कि स्ट्रीट लाइट ऑन रखें.''
शैलेंद्र दुबे ने भी उन उपायों के बारे में बताया है जिनसे ग्रिड फ़ेल होने के ख़तरे को टाला जा रहा है.
वो कहते हैं, "हम 9 बजे बिजली की खपत अचानक से कम न हो इसके लिए पहले से ही बिजली काटने की योजना बना रहे हैं. उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में बिजली की खपत 3000 मेगावॉट कम होने की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में इसका झटका ग्रिड पर न पड़े इसके लिए उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन शाम आठ बजे से ही बिजली कटौती शुरू करके खपत को कम करेगा. ऐसे में जब नौ बजे बिजली की खपत कम होगी तो वो तीन हज़ार मेगावाट न होकर काफ़ी कम होगी जिससे ग्रिड पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा."

इमेज स्रोत, Shailndra Dubey
पहले कब फ़ेल हुआ था ग्रिड?
इससे पहले साल 2012 में वो मौक़ा आया था जब ग्रिड फ़ेल होने की वजह से भारत का एक बड़ा हिस्सा अंधेरे में डूब गया था.
ट्रेनें बीच रास्ते में खड़ी हो गई थीं और कारखानों के उत्पादन पर इसका भारी असर पड़ा था.

इमेज स्रोत, Getty Images
2012 में ग्रिड फ़ेल होने की वजह बीना-ग्वालियर लाइन का ट्रिप होना था. इस लाइन के ट्रिप होने के बाद आगरा-बरेली ट्रांसमिशन सेक्शन में भी सर्किट्स ट्रिप हो गए.
और इसके बाद देखते ही देखते भारत के कई पॉवर ग्रिड फ़ेल हो गए जिसे ठीक करने में 15 घंटे से ज़्यादा का समय लगा था.
लेकिन इससे पहले ऐसा मौक़ा कभी नहीं आया है जब पूरा देश एक साथ बत्तियां बुझाने की ओर बढ़ रहा हो.
और ग्रिड का संतुलन इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रधानमंत्री की अपील का अक्षरश: पालन किया जाए और ग्रिड के संतुलन के लिए बनाए गयी योजना को ठीक ढंग से लागू किया जाए.

- कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव
- कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क पहनना क्यों ज़रूरी है?
- अंडे, चिकन खाने से फैलेगा कोरोना वायरस?
- कोरोना वायरस: संक्रमण के बाद बचने की कितनी संभावना है
- कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का अपमान क्यों
- कोरोना वायरस: क्या करेंसी नोट और सिक्कों से भी फैल सकता है?


इमेज स्रोत, MohFW, GoI

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















