लखीमपुर खीरी में घायल किसानों ने बताया, क्या हुआ था वहाँ

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- Author, सुशीला सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
''मुझे जैसे ही पापा के बारे में पता चला, घबराहट होने लगी. डर लगने लगा कि पापा ठीक हैं या नहीं. पापा को कुछ ज़्यादा तो नहीं हो गया.''
सहज विर्क के पिता तेजिंदर सिंह विर्क गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं.
पेशे से किसान तेजिंदर विर्क उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में रविवार को हुए किसानों के प्रदर्शन में शामिल थे.
रविवार को लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में हुई हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई थी.
सहज बीबीसी को फ़ोन पर बताते हैं कि वे हादसे के वक़्त वहाँ मौजूद नहीं थे, लेकिन वॉट्सऐप के ज़रिए उन्हें हादसे के बारे में पता चला. लेकिन फिर उनके पिता की ख़ैरियत पूछने के लिए फ़ोन आने लगे तब जाकर उन्हें पता चला कि कुछ घटना हुई है. लेकिन वास्तविकता में हुआ क्या था, वो इससे बेख़बर थे.

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उन्होंने पिता और वहाँ मौजूद चचेरे भाई से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई.
सहज के चचेरे भाई युवराज सिंह विर्क ने बीबीसी को बताया कि घटना के दौरान वो वहाँ मौजूद थे.
किसान घर लौट रहे थे
वे बताते हैं कि प्रदर्शन ख़त्म करने की घोषणा हो गई थी और किसानों को ये बताया जा रहा था कि गुरुद्वारे से चाय आ चुकी है. चाय पीकर किसानों को घर लौटना था.
उनके अनुसार, ''किसान घर जाने के लिए गाड़ियों की तरफ़ बढ़ रहे थे. तभी पीछे से तेज़ी से गाड़ियाँ आईं और पैदल चल रहे लोगों पर गाड़ी चढ़ा दी गई. इन्हीं में एक मेरे चाचा भी थे. वो गाड़ी के साथ फिसलते हुए नाले में गिर गए. लोगों को चोटें आई और एक दो की मौक़े पर मौत हो गई.''
उनके अनुसार, ''चाचा को हम पहले लखीमपुर अस्पताल लाए, फिर उन्हें बरेली के लिए रेफ़र किया गया. लेकिन फिर हम रूद्रपुर ले आए. वहाँ सिटी स्कैन कराया तो पता लगा कि सिर की हड्डी टूट गई है. इसके बाद हम गुरुग्राम में मेदांता अस्पताल ले आए. उनका ऑपरेशन हो चुका है और वे आईसीयू से बाहर आ गए हैं.''
युवराज बताते हैं कि वे बेहोश हो गए थे और ज़्यादा बोलने की स्थिति में नहीं थे. रूद्रपुर में कोई कह रहा था कि ऑपरेशन कराना ठीक रहेगा, किसी का कहना था मत करवाओ तो इसलिए हम यहाँ आ गए.

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डॉक्टरों का कहना है कि अब ख़तरे की कोई बात नहीं. इसलिए अब उन्हें थोड़ी राहत है.
सहज आगे बताते हैं कि वॉट्सऐप ग्रुप पर पापा का वीडियो आया, तो पता चला कि उनकी हालत ख़राब है. हरियाणा में जिस तरह से हिंसा हुई थी, तो डर लगता था कि कहीं कुछ हो ना जाए. लेकिन पापा इस आंदोलन के साथ शुरू से जुड़े रहे हैं तो उनका जाना भी ज़रूरी था.
वो कहते हैं, ''मेरी माँ तो इस ख़बर के बाद बहुत घबरा गई थी, रो रही थी. लेकिन अब पापा का ऑपरेशन हो चुका है और वो ख़तरे से बाहर हैं. माँ दो दिन से सोई नहीं है. डॉक्टर का कहना है कि कुछ महीने लगेंगे क्योंकि सिर में चोट लगने के साथ-साथ उनकी पीठ की हड्डी में भी फ़्रैक्चर है.''
घबराहट
वो आगे बताते हैं कि हर बार पापा जाते थे, तो माँ घबराई रहती थी और पापा को ध्यान रखने के लिए कहती थी. किसान आंदोलन जब से शुरू हुआ है, पापा तब से उसमें शामिल हैं और इतने महीनों में वे घर भी बहुत कम आए हैं.
उनके अनुसार, ''मैं ऑपरेशन के बाद आईसीयू में उनसे मिलने गया था तो उन्होंने कहा कि मैं ठीक हूँ और तुम लोग अपना ध्यान रखों. टेंशन ना लेना सब ठीक होगा.''
सहज बताते हैं कि उनका संयुक्त परिवार है और उनकी लगभग 10 से 12 एकड़ ज़मीन है. उनके पिता और ताऊ जी मिलकर खेती का काम करते हैं, जिसमें उनका भाई और वे भी मदद करते हैं.
क्या हुआ था लखीमपुर में

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बीते रविवार को लखीमपुर खीरी में तीन कृषि क़ानूनों के विरोध में किसान इकट्ठा हुए थे और उन्होंने वहाँ धरना प्रदर्शन किया था.
किसानों का आरोप है कि जब वे प्रदर्शन को ख़त्म कर घर लौटने की तैयारी कर रहे थे तो उन्हें गाड़ियों से कुचलने की कोशिश की गई और उन गाड़ियों को कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता चला रहे थे.
ये गाड़ियाँ राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के स्वागत में जा रही थीं. दरअसल संयुक्त किसान मोर्चा ने उपमुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के विरोध और काफ़िले के घेराव की कॉल दी थी जिसमें लखीमपुर और उत्तर प्रदेश के तराई इलाक़े के दूसरे ज़िलों से किसानों को शामिल होने आह्वान किया गया था.
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का आरोप था कि गाड़ियों ने किसानों को तेज़ी से भीड़ पर चला कर रोंधना शुरू कर दिया जिसमें चार किसान कुचल कर मर गए और लगभग एक दर्जन लोग घायल हो गए.
इस घटना में आठ लोगों की मौत हो गई थी.
प्रदर्शन में शामिल और हादसे के चश्मदीद संयुक्त मोर्चा के सदस्य पिंडर सिंह सिद्धू ने बीबीसी को बताया था, "सब माहौल ठीक था, क़रीब ढाई बजे अजय मिश्र जी का बेटा कुछ गुंडों के साथ आया और जो किसान वहाँ अपने झंडे लेकर घूम रहे थे उन पर अपनी गाड़ी चढ़ा दी. उनके लड़के ने गोली भी चलाई."

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हालांकि अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र ने इन आरोपों से साफ़ इनकार किया है. उनका कहना है कि अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए वो सबूत पेश करेंगे.
इस घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, "इस प्रकार की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. सरकार इस घटना के तह में जाएगी और घटना में शामिल तत्वों को बेनकाब करेगी और दोषियों के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई करेगी. घटना स्थल पर अपर मुख्य सचिव नियुक्ति, कार्मिक एंव कृषि, एडीजी क़ानून व्यवस्था, आयुक्त लखनऊ और आईजी लखनऊ मौजूद हैं और स्थिति पर नियंत्रण रखते हुए घटना के कारणों की गहराई से जांच कर रहे हैं."
इस बीच किसान नेता राकेश टिकैत और एडीजी(क़ानून और व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने एक प्रेस वार्ता के ज़रिए जानकारी दी है कि इस घटना में जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को 45-45 लाख रुपए दिए जाने पर सहमति बनी है. इस मामले की जांच हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे.
लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के बाद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्र के ख़िलाफ़ केस दर्ज कर लिया है.
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'पिता को खो दिया'

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राजदीप सिंह 16 साल के हैं और बताते हैं कि 11वीं कक्षा में पढ़ते हैं.
वे लखीमपुर में हुई हिंसा में अपने पिता दलजीत सिंह को खो चुके हैं.
बहराइच से राजदीप बताते हैं, ''मैं अपने पापा के साथ गया था. वो किनारे खड़े थे लेकिन टक्कर मार दी गई. मुझे और मेरे भाई को भी टक्कर लगी, हम खेत में गिर गए और हमें भी चोटें आईं हैं. मेरे पापा की मौत हो गई. मेरी माँ का रो-रोकर बुरा हाल है.''
'हम रुकने वाले नहीं'
शमशेर सिंह 23 साल के हैं.

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वे बीबीसी से बताते हैं, ''रविवार को मुझे गाड़ी से ठोकर मारी गई और मेरा पाँव फ़्रैक्चर हो गया है. सिर पर चोट आई है और शरीर पर रगड़न लगी है. मेरे पिता पीछे थे लेकिन वो बच गए.''
शमशेर कहते हैं कि वहाँ मौजूद किसान उन्हें उठाकर अस्पताल ले गए. उन्होंने सोचा नहीं था कि ऐसे हादसा हो जाएगा.
उनके अनुसार, ''मेरी माँ मुझे ऐसी हालत में देखकर रोने लगी. अगर ऐसे ही आगे प्रदर्शन होंगे तो जाएँगे, माँ रोकेगी भी तो क्या हम इंसाफ़ लेकर रहेंगे. हम रुकने नहीं वाले हैं.''
संसद में साल 2020 में कृषि संबंधी तीन विधेयकों को पारित किया गया था. इन क़ानूनों के प्रवाधानों को लेकर किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
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