मोदी और योगी के ख़िलाफ़ भाषण देने पर ओवैसी के ख़िलाफ़ केस दर्ज -प्रेस रिव्यू

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उत्तर प्रदेश के बाराबंकी ज़िले में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है.
बाराबंकी के एसपी यमुना प्रसाद ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री योगी के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था और जनसभा के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का भी उल्लंघन किया था. इसलिए उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है.
उन्होंने कहा, "ओवैसी ने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए एक समुदाय विशेष के ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण दिया. उनके ख़िलाफ़ आईपीसी और महामारी अधिनियम के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है."
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इससे पहले यूपी के बाराबंकी ज़िले के कटरा बरादरी के पास एक इमामबाड़े में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कड़ा रुख़ अपनाते हुए गुरुवार को कहा था कि सात बरस पहले जब से वे सत्ता में आए हैं, देश को 'हिंदू राष्ट्र' बनाने की कोशिशें जारी हैं.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रिपल तलाक़ के क़ानून का जिक्र करते हुए हैदराबाद के सांसद ने प्रधानमंत्री मोदी पर निजी आक्षेप करते हुए हिंदू महिलाओं की तकलीफ़ का मुद्दा उठाया.
ओवैसी ने ये बयान उत्तर प्रदेश के अपने तीन दिनों के दौरे पर दिया. उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए होने वाले चुनावों में 100 सीटों पर लड़ने की योजना बना रही है.
ओवैसी ने आरोप लगाया कि साल 2014 से दलितों और मुसलमानों को मॉब लिचिंग (भीड़ के हमले) का शिकार बनाया जा रहा है.
ओवैसी ने साल 2015 में यूपी के गौतम बुद्ध नगर ज़िले में लिचिंग का शिकार हुए मोहम्मद अख़लाक़ के मामले का ज़िक़्र करते हुए कहा, "ऐसे अत्याचार इसलिए हो रहे हैं क्योंकि मोदी प्रधानमंत्री हैं और बीजेपी सरकार ऐसे तत्वों की मदद कर रही है."

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इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करने की डेडलाइन 31 दिसंबर तक बढ़ी
वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए भारत सरकार ने इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करने की आख़िरी तारीख़ 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी है.
बिज़नेस स्टैंडर्ड अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार डेडलाइन बढ़ाने का ये फ़ैसला उन व्यक्तिगत करदाताओं पर लागू होगा जो अमूमन ITR-1 या ITR-4 के फ़ॉर्म का इस्तेमाल करके रिटर्न भरते हैं और जिनके खातों के ऑडिट की ज़रूरत नहीं पड़ती है.
वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया कि करदाताओं और इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करने से जुड़े अन्य भागीदारों की समस्याओं को देखते हुए ये फ़ैसला किया गया है.
वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए आईटीआर फ़ाइल करने की डेडलाइन अमूमन 31 जुलाई, 2021 हुआ करती थी जिसे पहले ही बढ़ाया जा चुका है. लेकिन इनकम टैक्स ई-फ़ाइलिंग पोर्टल में आ रही तकनीकी समस्याओं के कारण रिटर्न भरने वालों की काफ़ी शिकायतें आ रही हैं.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नए इनकम टैक्स पोर्टल को तैयार करने वाली कंपनी इंफ़ोसिस को इन अड़चनों को दूर करने के लिए 15 सितंबर तक की मोहलत दी है.
पिछले साल सरकार ने आईटीआर फ़ाइल करने वालों के लिए डेडलाइन चार बार बढ़ाई थी और आख़िर में इसे बढ़ाकर 10 जनवरी, 2021 किया गया था.

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'कोविड वैक्सीन की एक ख़ुराक़, दो ख़ुराक़ के लगभग बराबर सुरक्षा देती है'
कोलकाता से छपने वाले टेलीग्राफ़ अख़बार की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने ये दावा किया है कि कोविड वैक्सीन की एक ख़ुराक़ मृत्यु से लगभग उतनी ही सुरक्षा देती है, जितनी की दोनों ख़ुराक़ से मिलती है.
अख़बार का कहना है कि विशेषज्ञ सरकार के इस दावे को अब तक हुए रिसर्च से मिले नतीज़ों के उलट बता रहे हैं.
हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने ये भी ज़ोर देकर कहा है कि पूर्ण सुरक्षा के लिए लोगों को वैक्सीन की दोनों ख़ुराक़ लेने की ज़रूरत है.
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि देश भर में कोविड से मरने वाले लोगों में जितने लोगों ने वैक्सीन ली थी और जितने लोगों ने नहीं ली थी, उनके आंकड़ों के आधार पर ये निष्कर्ष निकाला गया है कि वैक्सीन की सिंगल डोज़ मौत से बचाने में 96.6 फ़ीसदी कारगर है जबकि दूसरी ख़ुराक़ मृत्यु से बचाने में 97.5 फ़ीसदी तक प्रभावी रही है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ कोरोना संक्रमित 1000 लोग अगर वैक्सीन न लिए हुए हों तो उनकी मौत हो सकती है, लेकिन अगर उन्होंने पहली ख़ुराक़ ले रखी हो तो उनमें से 966 लोगों के बचने की संभावना है जबकि अगर उन्होंने दोनों ख़ुराक़ ले रखी हो तो 975 लोगों के बचने की संभावना रहेगी.

केरल सरकार की यूनिवर्सिटी के सिलेबस में सावरकर और गोलवलकर
केरल की कण्णूर यूनिवर्सिटी के एक पोस्ट ग्रैजुएट कोर्स के सिलेबस में विनायक दामोदर सावरकर और एमएस गोलवलकर के काम को शामिल करने पर विवाद छिड़ गया है.
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ छात्र संगठन सत्तारूढ़ सीपीएम पर केरल में शिक्षा के भगवाकरण में मदद पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं.
कण्णूर यूनिवर्सिटी के एमए (गवर्नेंस एंड पॉलिटिक्स) कोर्स के सिलेबस में सावरकर के 'हिंदुत्व: हू इज हिंदू', गोलवलकर के 'बंच ऑफ़ थॉट्स' और 'वी ऑर आवर नेशनहुड डिफ़ाइंड' के अलावा दीनदयाल उपाध्याय के 'एकात्म मानववाद' और बलराज मधोक के 'इंडियनाइज़ेशन: व्हॉट, वाई एंड हाउ' के कुछ हिस्सों को भी शामिल किया गया है.
कांग्रेस की छात्र शाखा केरल स्टूडेंट्स यूनियन ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी में मार्च निकाला और सिलेबस की प्रतियां जलाईं. उन्होंने आरोप लगाया कि सीपीएम के नियंत्रण वाली यूनिवर्सिटी में संघ परिवार के एजेंडे को आगे बढ़ाया जा रहा है.
यूथ कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष रिजिल मकूट्टी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा कि इससे पता चलता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंट केरल में उच्च शिक्षा को कंट्रोल कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "पिनराई विजयन की सरकार के नेतृत्व में उच्च शिक्षा के भगवाकरण के ख़िलाफ़ हम अपना विरोध जारी रखेंगे."
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