कोरोना वायरस: नए वैरिएंट पर वैक्सीन नहीं होगा कारगर?

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    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

महामारी पर शोध करने वाले विशषज्ञों को लगता है कि कोविड-19 के संक्रमण का उसी तरह से शोध होना चाहिए जिस प्रकार पोलियो वायरस को लेकर शोध होते आ रहे हैं. शोध की वजह से ही पोलियो के संक्रमण पर पूरी दुनिया में क़ाबू करने में सफलता मिल पाई है.

इन शोधकर्ताओं ने कोविड-19 के वायरस की 'मॉल्युकूलर सिक्वेन्सिंग' करते रहने की आवश्यकता पर बल दिया है.

विशेषज्ञों का ये सुझाव ऐसे समय में आया है जब ब्रिटेन में कोविड-19 के वायरस में बदलाव देखने को मिला है जिसकी वजह से इसका संक्रमण और भी तेज़ी से फैल रहा है.

भारत ने ब्रिटेन से आने वाली सभी उड़ानों पर रोक लगा दी है मगर कुछ विशेषज्ञों को लगता है कि अभी तक तो नया संक्रमण भारत में भी आ चुका होगा.

वीडियो कैप्शन, कोरोना वायरस का नया रूप कितना ख़तरनाक है?

मगर विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन का कहना है कि वायरस में बदलाव से घबराने की बात नहीं है.

उनका कहना था कि नए वायरस के विभिन्न दशों में फैलने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है. वो कहती हैं कि ब्रिटेन में कोविड-19 के वायरस को लेकर लगातार 'जीनोम सिक्वेंसिंग' जारी है और यही वजह है कि नए वायरस के बारे में जल्द ही पता लगा लिया गया.

स्वामीनाथन के अनुसार कोविड-19 के नए प्रकार से बचने के लिए अभी तक जो वैक्सीन आई है उसी पर भरोसा करना होगा.

गिरिधर आर बाबू भारत में कोविड-19 को लेकर बनाए गए टास्क फ़ोर्स के सदस्य हैं.

वो मानते हैं कि भारत में भी 'जीनोम सिक्वेंसिंग' पर काम चल रहा है जिससे वैक्सीन को और असरदार बनाने में मदद मिलेगी. हाल ही में बेंगलुरू स्थित एक शोध संस्था ने इसको लेकर किए गए अपने शोध के पेपर जारी किए हैं.

स्वभाविक है बदलाव

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बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं कि वायरस में बदलाव बेशक हो रहा हो मगर जो वैक्सीन बन रही है वो नए वायरस पर भी कारगर होगी.

गिरिधर बाबू मानते हैं कि सितंबर में ब्रिटेन में ये वायरस पाया गया इसलिए लंदन या ब्रिटेन से आने वाली उड़ानों में सफ़र करने वालों को ढूंढ कर उनकी नए सिरे से जाँच होनी चाहिए.

वो कहते हैं, "इन सबके संपर्कों को भी ढूंढ निकालना चाहिए और उनकी जाँच होनी चाहिए. ये इस महामारी के इलाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम होगा. वायरस में बदलाव आने के बाद संक्रमण के फैलाव में कमी लाई जा सकती है बशर्ते लोगों के बारे में और उनके संपर्क में आने वालों के बारे में जल्द से जल्द पता लगाया जा सके."

सफ़दरजंग अस्पताल में सामुदायिक चिकित्सा के प्रमुख जुगल किशोर कहते हैं कि वायरस में बदलाव कोई नई बात नहीं है.

वो कहते हैं कि सिर्फ़ कोविड-19 के वायरस में आठ बदलाव देखने को मिले हैं. उनका ये भी कहना था कि वायरस का जो प्रकार चीन के वुहान में मिला था वो दूसरे देशों में फैले संक्रमण के वायरस से अलग है.

वो कहते हैं कि किसी भी संक्रमण का वायरस क्यों न हो, उसमें बदलाव स्वाभाविक हैं जिससे घबराने की कोई बात नहीं है.

बदले हुए स्वरूप पर वैक्सीन असर नहीं करेगी?

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ब्रिटेन में वायरस की नई क़िस्म के फैलने की ख़बर ऐसे समय आई है जब भारत में कोविड-19 के संक्रमण के मामलों में पिछले दो हफ़्तों से काफ़ी कमी दर्ज की गई है. संक्रमित लोगों की तदाद घटने से कई महीनों के बाद लोगों ने राहत की सांस ली है. मगर ब्रिटेन से आ रही ख़बरों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है.

इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि अब इस वायरस के प्रकार को लेकर शोध और भी सघन कर देना चाहिए ताकि इसका कारगर इलाज भी निकाला जा सके. उनका कहना है कि अभी तक जो वैक्सीन आई हैं वो कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए हैं, चाहे उसका प्रकार कुछ भी हो.

जुगल किशोर कहते हैं, "अभी तक ये बात नहीं आई है कि वायरस के बदले हुए स्वरूप पर वैक्सीन असर नहीं करेगी. वैक्सीन, संक्रमण से बचाव के लिए है. अभी तक के शोध में ये बात आई है कि वायरस का स्वरूप कैसा भी हो जाए, वैक्सीन उस पर काम करेगी."

विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन वायरस के प्रोटीन को ख़त्म करती है इसलिए उसका इस्तेमाल सुरक्षित है. समय-समय पर वैक्सीन में भी शोध के आधार पर बदलाव हो सकते हैं लेकिन ये कहना ग़लत होगा कि अभी जो वैक्सीन आई है वो कारगर साबित नहीं होगी.

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