क्या कोरोना वायरस के 'एंडेमिक' बनने से ख़त्म हो जाएगा संक्रमण का ख़तरा?

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    • Author, कीर्ति दुबे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत में कोरोना के मामले एक बार फिर बढ़ रहे हैं. देश में तीसरे लहर के आने की संभावना भी जतायी जा रही है. इसी बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख वैज्ञानिक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने कहा है कि ''भारत में कोविड-19, एंडेमिक की अवस्था में पहुंचता हुआ प्रतीत हो रहा है , जहां वायरस का ट्रांसमिशन लो से मीडियम स्तर तक होगा.''

डॉक्टर स्वामीनाथन ने ये बात ऐसे वक़्त में कही है जब भारत में कोरोना के रोज़ाना 40 हज़ार तक मामले सामने आ रहे हैं. स्वास्थ्य मामलों के जानकार, लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं. एंडेमिक क्या है, इससे लोगों पर क्या प्रभाव होगा और भारत में कोरोना के एंडेमिक बन जाने के क्या मायने होंगे? इन सभी सवालों के जवाब हमने वायरोलॉजिस्ट्स की मदद से समझने की कोशिश की.

एंडेमिक क्या है?

देश के जाने-माने वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर टी जैकब ज़ॉन ने मार्च 2020 में ही एक साइंस पेपर लिखा था जिसमें उन्होंने तथ्यों के आधार पर ये आशंका जताई थी कि ये बीमारी पैनडेमिक से एंडेमिक बन सकती है.

एंडेमिक किसी भी बीमारी की वो अवस्था है जो लोगों के बीच हमेशा के लिए बनी रहती है.

डॉक्टर जॉन कहते हैं, ''हमारे बीच कई ऐसी बीमारी हैं जो एंडेमिक बन कर अब हमारे बीच ही है और वो पूरी तरह ख़त्म नहीं होती. जो बीमारियां इंसानों से इंसानों में पहुंचती है वो एंडेमिक बन जाती है. जैसे- ख़सरा, साधारण फ्लू, हेपेटाइटिस-ए, हेपेटाइटिस-बी, चेचक ये सभी एंडेमिक हैं.''

कोविड-19 जानवरों से इंसानों में आया है या नहीं इसे लेकर कोई पुख़्ता सबूत नहीं है, ऐसे में कोविड19 एंडेमिक बन पाएगा? इस सवाल के जवाब में डॉक्टर जॉन कहते हैं, ''अभी कोरोना वायरस इंसानों से ही इंसानों में फैल रहा है तो ये एंडेमिक बन रहा है. ये हो सकता है कि एक वक़्त में ये जानवर से इंसान में आया हो लेकिन अब ये इंसान से ही इंसान में फैल रहा है.''

पैनडेमिक का अर्थ है वो बीमारी जो लोगों को बड़े स्तर पर संक्रमित करे और जिसका आउटब्रेक हो. वहीं एंडेमिक का अर्थ है वो बीमारी जो लोगों के बीच बनी रहे और मानव समुदाय में लंबे वक़्त तक टिकी रह जाए. ये एक जगह से दूसरी जगह फैल सकती है.

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भारत में कोरोना कब तक एंडेमिक बन जाएगा?

वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील कहते हैं, '' कोरोना वायरस धीरे-धीरे एंडेमिक बन जाएगा, ज्यादातर वायरस एंडेमिक बन जाते हैं. जैसे जैसे लोग संक्रमित होते जाएंगे या वैक्सीन लगवा लेंगे आप देखेंगे कि संक्रमण तो हो रहा है लेकिन ये उतनी बड़ी तादाद में नहीं होगा जितना हमने अतीत में देखा है. ''

''आप ब्रिटेन का उदाहरण देखिए जहां 60 फ़ीसदी लोगों को वैक्सीन लगी है, वहां गंभीर संक्रमण और मौत के मामले सामने नहीं आ रहे लेकिन वायरस का संक्रमण हो रहा है. ''

जानकार मानते हैं कि भारत जैसी बड़ी आबादी वाले देश में जहां सिर्फ़ 15 फ़ीसद लोगों को ही वैक्सीन लगी है वहां वायरस 6 महीने या साल भर में एंडेमिक बन जाएगा ये कहना थोड़ी जल्दबाज़ी होगी.

हालांकि डॉक्टर जॉन मानते हैं कि एंडेमिक बीमारियों का भी आउटब्रेक हो सकता है और वो पैनडेमिक बन सकती हैं. वो कहते हैं, ''ये आम लोगों के व्यवहार पर निर्भर करता है अगर लोग बिलकुल भी सावधानी नहीं बरतेंगे तो मामले तेज़ी से बढ़ेंगे. लेकिन अभी एवरेज केस 40 हज़ार हैं और वो संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ती नहीं दिख रही है. ऐसे में भारत में कोविड एंडेमिक की स्टेज में पहुंच रहा है ये मेरा मानना है.''

वीडियो कैप्शन, कोरोना की तीसरी लहर और वैक्सीन डोज़ पर क्या बोला WHO?

कोरोना की तीसरी लहर की आशंका कितनी ज़्यादा है? डॉक्टर जॉन इस सवाल का जवाब देते हुए कहते हैं- मुझे नहीं लगता की बड़ी तीसरी लहर आएगी लेकिन ये वायरस है तो कुछ भी पक्के तौर पर तो नहीं कहा जा सकता.

वो कहते हैं, ''जब देश में कोरोना की पहली लहर आई तो केस तेज़ी से बढ़े. संक्रमण का ये उतार चढ़ाव पैनडेमिक कहलाता है. इसी तरह दूसरी लहर में भी केस तेज़ी से बढ़े और फिर घटे तो ये पैनडेमिक था. अगर तीसरी बार भी संक्रमण की संख्या में उछाल आता है तो ये पैनडेमिक होगा. लेकिन कोरोना की इस लहर के बीच में संक्रमण के कुछ मामले लागातार आते रहे, ये नए केस आना बंद नहीं हुए ये अवस्था ही एंडेमिक है.''

''जब कोरोना वायरस साल 2020 में आया तो लोगों से पूछना शुरू किया कि क्या ये पैनडेमिक है जो चला जाएगा? उस वक़्त ही मैंने ये कहा था कि ये वायरस हमारे साथ बना रहेगा और ये बीमारी एंडेमिक हो सकती है.''

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क्या कोरोना के एंडेमिक होने पर वैक्सीन बूस्टर की ज़रूरत होगी?

अमेरिका सहित दुनिया के कुछ देशों ने कोरोना वैक्सीन का बूस्टर डोज़ लोगों को देना शुरू किया है. भारत में अभी बूस्टर डोज़ शुरू तो नहीं हुए हैं लेकिन हाल ही में कोवैक्सीन के तीसरे डोज़ के ट्रायल को अनुमति दी गई है. ऐसे में सवाल ये भी उठ रहा है कि जब कोरोना एंडेमिक बन जाएगा और इसके संक्रमण की दर कम होगी तो क्या बूस्टर डोज़ लेने की ज़रूरत होगी?

इसका जवाब देते हुए डॉक्टर जॉन कहते हैं, ''हां! खसरा और बाक़ी कई ऐसे एंडेमिक हैं जिनका टीका लगाया जाता रहा है, तब तक जब तक बीमारी पूरी तरह ख़त्म ना हो जाए, इसके टीके लगने चाहिए. वैसे भी जिन लोगों को डायबटीज़ और ब्लड प्रेशर की परेशानी है या जो बुज़ुर्ग हैं उनकी कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, वैक्सीन से ही मज़बूत करके गंभीर संक्रमण से बचाया जा सकता है.''

इस वजह से टीके और बूस्टर डोज़ हमेशा ही ज़रूरी होंगे.

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भारत सरकार क्या कह रही है?

भारत सरकार लोगों से सावधानी बरतने की अपील कर रही है. ज़ाहिर तौर भारत में संक्रमित लोगों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है और कई राज्यों में लॉकडाउन में राहत दी जा रही है. लेकिन सरकार के स्वास्थ्य अधिकारी बार-बार लोगों को तीसरी लहर की चेतावनी देते रहे हैं. कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर में भारत में कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है.

अब तक के आँकड़ों के मुताबिक़ भारत दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के मामले में दूसरे नंबर पर है. आधिकारिक आंकड़े कहते हैं कि भारत में 4 लाख 35 हज़ार लोग की मौत कोविड19 बीमारी से हुई है.

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