तेजस्वी यादव ने फिर दिया ऑफ़र, क्या नीतीश-बीजेपी के ख़िलाफ़ साथ आएंगे चिराग पासवान?

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राजनीति कहावतें गढ़ती है. कई बार राजनीति कहावतों के मुताबिक आगे बढ़ती है.
राजनीति में अक्सर इस्तेमाल होने वाली तीन मशहूर कहावते हैं. पहली है, 'दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है', दूसरी है, 'राजनीति में कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता. और तीसरी है, 'राजनीति संभावनाओं का खेल है.'
राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इन दिनों जिस तरह लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद चिराग पासवान को साथ आने का न्योता दे रहे हैं, वो कोशिश इन कहावतों का सटीक उदाहरण मालूम होती है.
नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोलने वाले और उन्हें अपनी पार्टी में फूट का जिम्मेदार बताने वाले चिराग पासवान बीते दिनों खुद को लेकर बीजेपी की बेरुखी पर भी नाखुशी जाहिर कर चुके हैं.
चिराग पासवान ने अभी बीजेपी और एनडीए से नाता तोड़ने का एलान नहीं किया है. न ही तेजस्वी यादव का ऑफ़र मंजूर किया है लेकिन बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में वो तेजस्वी यादव को 'छोटा भाई' बता चुके हैं और ये भी जाहिर कर चुके हैं कि दोनों के बीच 'संवाद होता है.'
यानी संभावनाएं दोनों तरफ तलाशी जा रही हैं.

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तेजस्वी की पेशकश
तेजस्वी ने संवाद के सिलसिले को साथ में बदलने के लिए एक बार फिर ऑफर दिया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक तेजस्वी यादव ने कहा है कि चिराग पासवान अपने पिता राम विलास पासवान की विरासत को तभी आगे बढ़ा सकते हैं जब वो 'आरएसएस की विचारधारा के ख़िलाफ़ संघर्ष का हिस्सा बनें.'
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तेजस्वी ने राम विलास पासवान को 'दलित मसीहा' बताते हुए कहा है कि उनकी पार्टी 'पासवान की जयंती के दिन राज्य के लिए उनके योगदान का स्मरण करेगी.'
चिराग पासवान ने भी एलान किया है कि वो राम विलास पासवान के जन्मदिन (5 जुलाई) पर 'आशीर्वाद यात्रा' की शुरुआत करेंगे.
लोक जनशक्ति पार्टी का गठन राम विलास पासवान ने किया था. पासवान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री थे. उन्होंने पार्टी की कमान अपने बेटे चिराग पासवान को सौंपी थी.
राम विलास पासवान के निधन के बाद भी लोक जनशक्ति पार्टी एनडीए का हिस्सा बनी रही लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी एनडीए के साथ चुनाव में नहीं उतरी. चुनाव के दौरान चिराग पासवान ने बीजेपी का तो समर्थन किया लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू नेता नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला.

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पार्टी में फूट
बीते दिनों लोक जनशक्ति पार्टी के पांच सांसदों ने पशुपति कुमार पारस की अगुवाई में चिराग के नेतृत्व के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया. इन सांसदों ने चिराग के चाचा पशुपति पारस को नेता चुन लिया.
लोकसभा में भी उन्हें पार्टी के नेता के तौर पर मान्यता भी मिल गई. चिराग और पशुपति के बीच पार्टी पर अधिकार को लेकर भी संघर्ष चल रहा है. चिराग पार्टी पर अपना अधिकार बता रहे हैं तो पशुपति पारस का दावा है कि अब पार्टी के अध्यक्ष वो हैं. ये मामला चुनाव आयोग के सामने है.
पार्टी में फूट के बाद चिराग पासवान ने इसके लिए नीतीश कुमार को ज़िम्मेदार बताया था और उन पर हमला बोला था.
बीबीसी संवाददाता प्रदीप कुमार से बातचीत में चिराग ने कहा, "मेरी पार्टी के मुट्ठी भर लोग मेरे पिता जी के विचारों के साथ समझौता करके उन लोगों के साथ जाकर खड़े हो गए हैं जो मेरे पिता की राजनीतिक हत्या कराना चाहते थे. मैं नीतीश कुमार की बात कर रहा हूं. पहली बार हमारी पार्टी में टूट नहीं कराई है. 2005 में हमारे 29 विधायक जीतकर आए थे, उन्हें तोड़ा. नवंबर, 2005 में चुनाव हुआ, उसमें तोड़ा. गाहे बगाहे एमएलसी को तोड़ा. इस बार एक विधायक जीत कर आए, उन्हें भी तोड़ लिया."

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नीतीश ने क्या कहा?
हालांकि, नीतीश कुमार चिराग पासवान के आरोपों को ख़ारिज करते रहे हैं. उन्होंने 22 जून को कहा था, "हमारी इसमें कोई भूमिका नहीं है. ये उनका आंतरिक मामला है. वो (चिराग पासवान) सार्वजनिक तौर पर मेरे ख़िलाफ़ बोलते हैं. हमारा इससे लेना देना नहीं है."
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सिर्फ़ चिराग पासवान ही नहीं नीतीश कुमार की सरकार में उप मुख्यमंत्री रह चुके तेजस्वी यादव भी साल 2015 में बने आरजेडी और जेडीयू का 'महागठबंधन' टूटने के बाद से उन पर लगातार निशाना साधते रहे हैं.
लोक जनशक्ति पार्टी में आई दरार को लेकर तेजस्वी ने भी नीतीश कुमार की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे.
तेजस्वी ने रविवार को भी कहा, "ऐसा कोई नहीं है जिसे उन्होंने (नीतीश कुमार ने) धोखा न दिया हो."
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तेजस्वी यादव लगातार चिराग पासवान से एनडीए छोड़ने की अपील कर रहे हैं और अब इसके लिए वो चिराग पासवान को राम विलास पासवान के आदर्शों की याद दिला रहे हैं.
तेजस्वी ने कहा, "राम विलास पासवान जी सोशलिस्ट थे. वो पूरे जीवन सामाजिक न्याय के विचार में भरोसा करते रहे. अपनी राजनीतिक यात्रा के दौरान उन्होंने जाति वर्चस्व, ग़रीबी और असमानता के ख़िलाफ़ संघर्ष किया."
चिराग पासवान ख़ुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'हनुमान' बताते रहे हैं. अपनी पार्टी में पड़ी दरार के बाद चिराग ने कहा था कि उन्हें भरोसा है कि इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी चुप नहीं रहेंगे. लेकिन अब तक प्रधानमंत्री मोदी या बीजेपी के किसी बड़े नेता ने ऐसा कुछ नहीं कहा है जिससे चिराग को लगे कि बीजेपी का समर्थन उनके साथ है.
इसे लेकर तेजस्वी यादव ने कहा, "बीजेपी दूसरी पार्टियों को बड़े वादे करके साथ जोड़ती है लेकिन जब लगता है कि वो काम के नहीं रहे हैं तो दूध से मक्खी की तरह निकालकर फेंक देती है. "
तेजस्वी ने लोक जनशक्ति पार्टी के पशुपति पारस गुट पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब चिराग को पार्टी का नेता चुना गया था तब उन्होंने विरोध क्यों नहीं किया.
उधर, चिराग ने अभी भविष्य की योजना का पूरा इशारा तो नहीं किया है लेकिन संभावनाओं के दरवाजे खुले ज़रूर रखे हैं.
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