कोरोनाः क्या आंध्र प्रदेश वाला वैरिएंट कई गुना ज़्यादा ख़तरनाक है

भारत में कोरोना महामारी

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    • Author, बल्ला सतीश
    • पदनाम, बीबीसी तेलुगू संवाददाता

कोरोना वायरस का आंध्र प्रदेश वैरिएंट. ये शब्द अब हर किसी को डरा रहा है. कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस का एक वैरिएंट कुर्नूल में सबसे पहले देखा गया और विशाखापत्तनम में ये मौजूदा वायरस की तुलना में 1000 गुना तेज़ी से फैल रहा है.

इस ख़बर से लोग बुरी तरह से डरे हुए हैं और राजनीतिक तूफान आने की भी आशंका जताई जा रही है.

यहां तक कि दिल्ली सरकार ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से आने वाले लोगों पर पाबंदी भी लगा दी है.

ऐसे में सवाल उठता है कि कोरोना वायरस का आंध्र प्रदेश वैरिएंट क्या सचमुच में इतना शक्तिशाली है?

और विशेषज्ञ इस पर क्या कह रहे हैं?

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वायरस का वैरिएंट क्या होता है?

एक वायरस किसी व्यक्ति के शरीर में पनपने लगता है. विज्ञान की भाषा में कहें तो मनुष्य के शरीर में ये वायरस अपने सेल्स (कोशिकाओं) की संख्या बढ़ाने लगता है. इस प्रक्रिया को हम रेप्लिकेशन या प्रतिकृति बनाना कहते हैं.

फिर ये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने लगता है और इसी तरह से इसका विकास होता है. इस प्रक्रिया में ये आप बदलने भी लगता है जिसे विज्ञान की भाषा में म्यूटेशन कहा जाता है.

अलग-अलग हो रहे ये म्यूटेशन दो-तीन महीने की अवधि में एक वैरिएंट बन जाते हैं.

जब एक वायरस बीमारी के लक्षण बदल देता है, तो इसके फैलने की रफ्तार और शरीर पर बीमारी का असर भी बदल जाता है.

ठीक इसी तरह जब से कोरोना वायरस अस्तित्व में आया है, इसके सैकड़ों-हज़ारों म्युटेशन हुए हैं और उनमें से कुछ वैरिएंट बन गए हैं.

लेकिन कोरोना वायरस के सभी वैरिएंट्स पर चर्चा नहीं हो रही है. उनमें से कुछ कहीं ज़्यादा तेजी से फैल रहे हैं.

निज़ामाबाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर मदाला किरण कहती हैं, "विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आज दुनिया में कोरोना वायरस के सैकड़ों वैरिएंट्स हैं लेकिन उनमें से हमें केवल तीन को गंभीरता से लेना चाहिए. वे दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और ब्रितानी वैरिएंट हैं. यही वो वैरिएंट्स हैं जिनका ऊपर जिक्र किया गया है. इसके अलावा सात अन्य वैरिएंट हैं जिन पर हमें नजर रखनी है. इन सात वैरिएंट्स में एक महाराष्ट्र वैरिएंट है."

जिसे ब्रितानी वैरिएंट बताया जा रहा है, उसके 23 म्यूटेशन हो चुके हैं और महाराष्ट्र वैरिएंट के 15 म्यूटेशन हैं.

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भारत में इस समय कितने वैरिएंट्स सक्रिय हैं?

भारत में इस समय कोरोना वायरस के कई वैरिएंट्स हैं जो यहां फैले हुए हैं. इनमें से कुछ वैरिएंट्स को महामारी के तेजी से फैलने की वजह बताया जा रहा है.

कुछ वैरिएंट्स के संक्रमण के मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम है.

सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्युलर बॉयोलॉजी के पूर्व निदेशक राकेश मिश्र बीबीसी से कहते हैं, "ये वैरिएंट डबल म्यूटेंट के नाम से जाना जा रहा है. महाराष्ट्र में 50 से 60 फीसदी संक्रमण के मामलों के लिए यही जिम्मेदार है. इस डबल म्यूटेंट की कुछ गंभीर खूबियां हैं."

"ब्रितानी वैरिएंट इस समय पंजाब में पाया गया है. महाराष्ट्र वैरिएंट अब आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में फैल रहा है. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में संक्रमण के 20 फीसदी मामले इसी वैरिएंट के हैं. मुझे लगता है कि अन्य वैरिएंट शायद खत्म हो जाएंगे और हर कोई अब कोरोना के इसी वैरिएंट से संक्रमित होगा."

राकेश मिश्र कहते हैं, "हजारों म्यूटेशन और वैरिएंट आते हैं और चले जाते हैं. उनका संक्रमण बहुत ज्यादा नहीं होता है. लेकिन अगर हम उन पर सावधानी से निगाह नहीं रखें तो कोई भी वैरिएंट बड़ी संख्या में संक्रमण के मामलों के लिए ज़िम्मेदार हो सकता है."

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क्या N440K वैरिएंट 1000 गुना तेज़ी से फैलता है?

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में फैले कोरोना वैरिएंट को N440K का नाम दिया गया है.

राकेश मिश्र बताते हैं, "ये केवल एक अफवाह है. कोरोना के N440K की अब कोई अहमियत नहीं रह गई है. कई महीनों पहले ये अस्तित्व में था और अब ये ख़त्म हो गया है."

वे इस वैरिएंट को लेकर तस्वीर साफ़ करते हुए कहते हैं, "दक्षिण भारत के पांच फीसदी मामलों के लिए भी शायद ये वैरिएंट अब ज़िम्मेदार नहीं है. इससे भी ऊपर ये कहना ग़लत है कि ये 1000 गुना तेज़ी से फैलता है."

उनका ये भी कहना है कि इस वैरिएंट और कोरोना संक्रमितों के मौत के बढ़ते आंकड़ों के बीच कोई संबंध नहीं है.

राकेश मिश्र कहते हैं, "सच तो ये है कि महाराष्ट्र का डबल म्यूटेंट वैरिएंट और ब्रितानी वैरिएंट कोरोना के N440K वैरिएंट से अधिक तेजी से फैलते हैं."

उनका कहना है कि मनुष्य के शरीर में वायरस में वायरस के फैलने की रफ्तार और लैब में इसकी तेजी को एक ही तरह से नहीं देखा जाना चाहिए.

वे कहते हैं, "लैब में एक वायरस तेजी से फैल सकता है लेकिन मनुष्य के शरीर में ये उतनी तेजी से नहीं पनपता है. क्योंकि लैब में वायरस को किसी प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं करना पड़ता है. शरीर के पास प्रतिरोधक क्षमता भी होती है जो लैब में नहीं होती है."

राकेश मिश्र बताते हैं, "इसलिए वायरस वहां ग्रोथ तो करता है. इससे हमें ये नहीं समझना चाहिए कि जो चीज़ में लैब में विकसित होगी वो मनुष्य के शरीर में भी बढ़ेगी."

इन हालात में आंध्र प्रदेश वैरिएंट शब्द का इस्तेमाल राजनीतिक संदर्भ में होने लगा है और लोगों में इसका डर बढ़ रहा है.

यहां तक कि आंध्र प्रदेश सरकार को इस पर स्पष्टीकरण देने के लिए सामने आना पड़ा.

आंध्र प्रदेश कोविड कमांड कंट्रोल सेंटर के चेयरपर्सन केएस जवाहर रेड्डी ने कहा, "कोरोना वायरस के N440K वैरिएंट को लेकर चिंता करने जैसी कोई बात नहीं है. पिछले साल जून-जुलाई में इसकी पहचान की गई थी. ये दिसंबर, जनवरी और फरवरी में फैला और मार्च में खत्म हो गया. इसके संक्रमण के मामले तीन राज्यों में देखने को मिले थे लेकिन ये बहुत कम फैला था."

वे कहते हैं, "अगर ये सचमुच खतरनाक होता तो विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके बारे में बात की होती. इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च ने इसे खतरनाक घोषित कर दिया होता. ये कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसे लेकर हमें परेशान होना चाहिए."

ग्लोबल इन्फ्लुएंज़ा सर्विलांस एंड रिस्पॉन्सिव सिस्टम (जीआईएसएआईडी) से दुनिया भर के कई संगठन और प्रमुख वैज्ञानिक जुड़े हुए हैं. जीआईएसएआईडी का भी कहना है कि कोरोना वायरस का N440K म्यूटेंट उतना गंभीर नहीं है.

डॉक्टर मदाला किरण कहती हैं, "कोरोना वायरस का N440K वैरिएंट कुर्नूल से पूरे देश में फैला लेकिन ये पिछले साल हुआ था. अभी नहीं."

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क्या महाराष्ट्र वैरिएंट खतरनाक है?

इस समय महाराष्ट्र वैरिएंट आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तेजी से फैल रहा है. इसे डबल म्यूटेंट का नाम दिया गया है. कोरोना वायरस के दो म्यूटेशन L452R और E484Q की खूबियां महाराष्ट्र वैरिएंट में उच्च स्तर पर मौजूद है.

डॉक्टर मदाला किरण कहती हैं, "महाराष्ट्र के दोनों ही म्यूटेंट ने इंसानी शरीर से अपना जुड़ाव मजबूत कर लिया है. इस वजह से संक्रमित लोगों में इसके गंभीर लक्षण देखने को मिल रहे हैं."

दूसरी तरफ़ स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि विशाखपत्तनम में संक्रमण के मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.

आंध्र मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और उत्तरी आंध्र प्रदेश में कोविड प्रबंधन के नोडल ऑफ़िसर डॉक्टर सुधाकर कहते हैं, "वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड (संक्रमण के लक्षण सामने आने में लगने वाला समय) ज़बरदस्त रूप से कम हो गया है. अतीत में सात दिनों में इसके लक्षण सामने आते थे. अब इसमें केवल तीन दिन का समय लग रहा है. कफ़ की प्रॉब्लम बढ़ गई है. नौजवान लोगों पर इसका असर दिख रहा है. मृत्यु दर के आँकड़े भी बढ़े हैं. ठीक इसी तरह ऑक्सीजन की ज़रूरत वाले मरीजों की संख्या भी 15 फीसदी बढ़ गई है. कुल मिलाकर देखें तो इसका गंभीर असर पड़ा है. ऐसा लगता है कि अगले दो महीने तक ये इसी तरह से जारी रहेगा."

हालांकि इस बात को लेकर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है कि विशाखपत्तनम में कोरोना महामारी की गंभीरता महाराष्ट्र वैरिएंट की वजह से या फिर किसी अन्य वैरिएंट के कारण.

जीआईएसएआईडी के आंकड़ों को हम देखें तो पाएंगे कि महाराष्ट्र वैरिएंट के अलावा A2A नाम का एक अन्य वैरिएंट विशाखपत्तनम में पाया गया है. ये पहली लहर के समय का ही एक पुराना वैरिएंट है.

डॉक्टर मदाला किरण कहती हैं, "जब हमने विशाखपत्तनम के 36 सैंपल्स का परीक्षण किया था तो हमने पाया कि एक तिहाई सैंपल में महाराष्ट्र वैरिएंट मिले. कोरोना का N440 K वैरिएंट पांच फीसदी सैंपल में पाया गया जबकि A2A नाम का वैरिएंट 62 फीसदी सैंपल में पाया गया. दक्षिण अफ्रीका, ब्राज़ील और ब्रिटेन के वैरिएंट विशाखपत्तनम में नहीं फैले हैं."

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क्या हम नए वैरिएंट को आने से रोक सकते हैं?

जैसे ही वायरस खुद को बदलता है, नई समस्याएं सामने आनी शुरू हो जाती हैं.

क्या होगा अगर वायरस का म्यूटेशन न हो और नए वैरिएंट बन ही न पाए? तो कोई समस्या ही पैदा नहीं होगी.

ऐसे में ये पूछा जा सकता है कि वायरस को म्यूटेट होने से रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए?

राकेश मिश्र कहते हैं, "कोई दवा या वैक्सीन वायरस को म्यूटेट होने से रोक नहीं सकती है. केवल इंसान वायरस को म्यूटेट होने से रोक सकता है."

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ये कैसे संभव है?

वायरस एक व्यक्ति के शरीर में म्यूटेट करने के साथ-साथ जब दूसरे व्यक्ति में प्रवेश करता है, अगले ठिकाने पर भी वो म्यूटेट करता है.

अगर पहला व्यक्ति इस बात को लेकर एहतियात बरते कि उससे किसी और को संक्रमण न हो तो वायरस पहले व्यक्ति के शरीर में ही रहेगा.

इसका मतलब ये हुआ कि पहले व्यक्ति में ही म्यूटेशन की प्रक्रिया रुक जाएगी.

एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में वायरस को फैलने से रोकने का तरीका है- मास्क पहनना.

राकेश मिश्र कहते हैं, "अगर आप मास्क पहनते हैं तो चाहो वे महाराष्ट्र वैरिएंट हो या ब्रितानी वैरिएंट या फिर चाहे कोई अन्य वैरिएंट, आपको कोई कुछ नहीं कर सकता है. अगर आप मास्क पहनते हैं तो इससे वायरस नहीं फैलेगा. म्यूटेशन रुक जाएगा."

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क्या वैक्सीन नए वैरिएंट्स के लिए कारगर है?

राकेश मिश्र कहते हैं, "मैं ये बात पूरी पुष्टि के साथ नहीं कह सकता हूं कि वैक्सीन कोरोना वायरस के सभी वैरिएंट्स के लिए कारगर है या नहीं. लेकिन आज जो वैक्सीन दिए जा रहे हैं, वे भारत में मौजूद सभी वैरिएंट्स से प्रभावी रूप से मुकाबला कर रहे हैं."

"ये मुमकिन है कि एक नया वैरिएंट सामने आए जो खतरनाक हो. इसलिए हमें नए वैरिएंट को पनपने से रोकना चाहिए. एक नए वैरिएंट को जन्म नहीं लेने देना है, इसका मतलब ये हुआ कि कोरोना वायरस फैलने से रोकना है. और इसके लिए हम सबको मास्क पहनना चाहिए."

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