कोरोना: कश्मीर में संक्रमण तेज़, वैक्सीनेशन की धीमी रफ़्तार और पर्यटन पर ग्रहण

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- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में भी सरकार ने, बाक़ी भारत की तरह, एक मई से 18 से 44 वर्ष के लोगों के लिए टीकाकरण की घोषणा की थी. लेकिन केंद्र शासित प्रदेश के कुछ हिस्सों में पंजीकरण आसानी से नहीं हो रहा है.
उधर, केंद्र शासित प्रदेश में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव भी बढ़ रहा है. कोरोना की ताज़ा लहर के कारण केंद्र शासित प्रदेश में कर्फ़्यू है. इसकी वजह से पर्यटन का काम भी थम गया है. और इससे जुड़े कई लोगों का रोज़गार खटाई में पड़ गया है.
जम्मू -कश्मीर में कोरोना के मामले
गुरुवार को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू -कश्मीर में 4,926 कोरोना के मामले दर्ज किए गए और 52 कोरोना मरीज़ों की मौत हो गई. कोरोना की दूसरी लहर में ये जम्मू -कश्मीर में अबतक का सबसे बड़ा आँकड़ा है.
जम्मू-कश्मीर में गुरुवार तक 41,666 एक्टिव पॉज़िटिव मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि 2,562 लोगों की मौत हो चुकी है. अब तक कश्मीर में 1494 जबकि जम्मू में 1068 लोग कोरोना से मर चुके हैं. जम्मू-कश्मीर में कुल 20151 मामले दर्ज हो चुके हैं. सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ 157283 लोग ठीक हो चुके हैं.
इस समय पूरे जम्मू-कश्मीर में कोरोना कर्फ़्यू जारी है. केंद्र शासित प्रदेश के श्रीनगर ज़िले में सबसे अधिक कोरोना के मामले रिकॉर्ड किए जा रहे हैं.
मुश्किलों का सामना
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर फ़ारूक़ अब्दुल्लाह कहते हैं कि ये सरकार की चौतरफ़ा नाकामी है.
बीबीसी को उन्होंने बताया, "अगर हम ये कहें कि सब कुछ ठीक है तो सही नहीं होगा. सरकार कई मामलों में नाकाम हो गई है. बात दवा की हो या फिर वैक्सीन की या फिर ऑक्सीजन की. कई चीज़ों का पता ही नहीं लग रहा."
जम्मू-कश्मीर बीजेपी के महासचिव अशोक कौल कहते हैं कि सरकार से जितना हो सका, वो कर रही है.
वह कहते हैं, "इसमें कोई शक नहीं कि वैक्सीन की कमी है. सरकार से जितना हो सका, वो कर रही है. विपक्षी दल तो रोटियां सेंक रहे हैं. इतनी बड़ी संख्या है लोगों की, मुश्किलात का सामना तो होगा. ये मुश्किलें आने वाले दिनों में कम होंगीं."

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कारोबार पर कोरोना का प्रभाव
कोरोना की ताज़ा लहर एक बार फिर अर्थव्यवस्था पर मार कर रही है. लोगों की नौकरियों पर असर पड़ रहा है और जो लोग ख़ुद का धंधा करते हैं उन्हें भी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है. अनंतगान के हिलाल अहमद कहते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर ने उनके रोज़गार पर भी गहरा असर डाला है.
वह बताते हैं, "मैं एक सरकारी विभाग में दिहाड़ी पर काम कर रहा हूँ, वहाँ से पैसे कई महीनों के बाद मिल पाते हैं. अब ये था कि प्राइवेट काम इधर-उधर से मिलता था, तो मेरा गुज़ारा चलता था. लेकिन अब बाज़ार बंद हैं तो काम मिलना भी बंद हो गया है."
छोटे व्यवसायी और दुकानदार एक बार फिर पिछले साल की तरह हालात होने से डरे हुए हैं.
कुलगाम ज़िला में नदीम अहमद की तीन दुकानें हैं, जहाँ वे किताबें बेचते हैं. उनका कहना है कि बीते कई महीनों से उनका धंधा चौपट हो गया है. उनको उम्मीद थी कि अब सब ठीक हो जाएगा लेकिन फिर कोरोना की ये नई लहर आ गई.
नदीम कहते हैं, "मेरे पास काम करने वालों को तो तनख्वाह देनी पड़ती है, चाहे मेरी दुकान खुले या न खुले. बिजली का बिल भरना पड़ता है. बैंक का लोन चुकाना पड़ता है. हाल हमारा ख़राब है."
नदीम को उम्मीद है कि वैक्सीन लगने के बाद उनकी मुश्किल बड़ी हद तक कम हो सकती है. वो बताते हैं कि जब उनको वैक्सीन लगेगी, तो वो बड़ी आसानी के साथ बाज़ार जा सकते हैं.

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पर्यटन को नुक़सान
गर्मियों में लोगों को पर्यटकों का इंतज़ार रहता है. गर्मियों की इसी कमाई से कई स्थानीय लोग सारे साल का गुज़ारा करते हैं. लेकिन गर्मियों की शुरुआत में ही कोरोना की ताज़ा लहर आने की वजह से इन लोगों का काम ठप पड़ गया है.
गुलमर्ग में फ़ोटोग्राफ़र का काम करने वाले मोहमद शफ़ी सख़्त मुश्किलों से गुज़र रहे हैं.
उन्होंने बताया, "इस बार उम्मीद थी की गर्मियों के इस मौसम में हमारा काम फिर लंबे समय के बाद पटरी पर आएगा. लेकिन कोरोना ने हमारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. मार्च में 20-25 हज़ार कमाए था, जो अब ख़त्म हो चुके हैं. अब तो हम घर पर बैठे हैं."
इस वर्ष कश्मीर में अब पर्यटक आना शुरू हो गए थे, लेकिन अचानक कोरोना की दूसरी लहर की वजह से एक बार फिर कश्मीर का पर्यटन उद्योग चुनौतियों का सामना कर रहा है.
कश्मीर हाउसबोट एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी फ़य्याज़ अहमद ने बताया कि उनकी सारी बुकिंग्स कैंसल हो चुकी हैं और श्रीनगर के डल झील के हाउसबोट्स में सन्नाटा है.
उधर पहलगाम में दाना-पाना होटल के मैनेजर जावेद अहमद कहते हैं कि बीते तीन साल से लगातार बंदी के चलते इस बार उन्होंने दो दर्जन कर्मचारयों की छुट्टी कर दी है.
वैक्सीनेशन में दिक़्क़तें
श्रीनगर से दूर गाँवों में इंटरनेट की सुविधा नहीं होने की वजह से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. उरी के गरकोट गाँव के रहने वाले राशीद यूसुफ़ को वैक्सीन की रजिस्ट्रेशन कराने के लिए 10 किलोमीटर का सफ़र करना पड़ा है.
वह कहते हैं, "पहले मैंने कोविन ऐप से रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश की थी, लेकिन सफल नहीं हुआ. फिर मैंने सीधा वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन की. ये सब करने के लिए मुझे 10 किलोमीटर का सफ़र तय करना पड़ा है. मेरे गाँव में इंटरनेट की रफ़्तार बहुत ही सुस्त है."
राशिद को उम्मीद थी कि रजिस्ट्रेशन के बाद उनको टीका लग जाएगा. लेकिन उन्हें डर है कि अभी तो उनके यहाँ 45 से ऊपर के लोगों को ही दूसरा टीका नहीं लगा है, ऐसे में न जाने उनका नंबर कब आएगा.
ज़िला बांदीपोरा के सुम्बल इलाक़े के रहने वाले 23 वर्ष के फ़िदा हुसैन कहते हैं कि उनके इलाक़े में रजिस्ट्रेशन के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
वो बताते हैं, "मैंने अभी ऐसा नहीं किया है. हमारे इलाक़े में लोग इस बात से बेख़बर हैं. हालाँकि, मुझे थोड़ी बहुत जानकारी तो है, लेकिन अभी तक मैंने कोविन ऐप डाउनलोड नहीं किया है. 45 वर्ष से ऊपर के लोगों ने तो वैक्सीन लगवाई है. 45 वर्ष से कम उम्र के लोगों ने फ़िलहाल टीकाकरण के बारे में आख़िरी फ़ैसला नहीं किया है."
फ़िदा इस बात से निराश हैं कि सरकार वैक्सीनेशन के बारे में जानकारी लोगों तक नहीं पहुँचा पा रही है. फ़िदा ने बताया कि वो ऐसे गाँव में रहते हैं, जहाँ पढ़े-लिखे लोगों को भी कोविन ऐप के बारे में जानकारी नहीं है.
फ़िदा हुसैन कहते हैं कि जिस चीज़ से इंसानी जान बच जाए, हमें खुले दिल से ऐसी जगहों पर जाना चाहिए और अगर लोगों की वैक्सीन से मुश्किल हल होती है, तो आगे आकर टीकाकरण का हिस्सा बनना चाहिए.
इसी तरह दक्षिण कश्मीर के ज़िला अनंतनाग के रहने वाले 36 वर्ष के हिलाल अहमद कहते हैं कि वो पहली बार कोविन ऐप का नाम सुन रहे हैं. वो ये भी बताते हैं कि वैक्सीन के बारे में कई अफ़वाहें हैं, जिसके कारण लोग डरे हुए हैं.
आम लोगों के दिमाग़ में अफ़वाहों पर कश्मीर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर सुहैल नाइक कहते हैं कि लोगों ने शुरू-शुरू में वैक्सीन के हवाले से अफ़वाहें उड़ाई थीं.
डॉक्टर नाइक कहते हैं कि जब बच्चों को पोलियो का टीका लगवाना होता है तो वे अब तुरंत हेल्थ सेंटर पहुँच जाते हैं, वैसे इस बार भी बिना शक किए उन्हें कोविड-19 की वैक्सीन भी लगवा लेनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि वैक्सीन से ख़तरा नहीं है और लोगों को किसी भी अफ़वाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए.
स्वास्थ्य विभाग भी इस बात को मान रहा है कि शुरू-शुरू में लोगों के बीच वैक्सीन के हवाले से अफ़वाहें गर्म थीं.
स्वास्थ्य निदेशालय कश्मीर के प्रवक्ता डॉक्टर मीर मुश्ताक़ कहते हैं कि विभाग को जानकारी है कि लोगों के बीच अफ़वाहें थीं और लोग वैक्सीन लगाने से डरते थे.
वो कहते हैं कि सोशल मीडिया के कुछ अनजान एकाउंट्स पर तरह-तरह की कहानियाँ फैलाई जा रही थीं.
डॉक्टर मीर बताते हैं कि विभाग की मुहिम के बाद लोग अब वैक्सीन लगाने के लिए आ रहे हैं.

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पंजीकरण पर सरकार का जवाब
उरी के इरशाद ने तीन दिन पहले कोविन ऐप के ज़रिए वैक्सीन के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाया लिया है ,लेकिन फ़िलहाल उनका नंबर नहीं आया है.
कोविन के ज़रिए पंजीकरण में आ रही दिक़्क़तों के बारे में हमने सरकारी अधिकारियों से बात की.
केंद्र शासित प्रदेश के परिवार कल्याण विभाग के डायरेक्टर जनरल डॉक्टर सलीम उर रहमान का कहना है कि सिर्फ़ राज्य के तंगधार इलाक़े में ही दिक़्क़त है.
हमने उनको बताया कि उरी के दूर दराज़ इलाक़ों में लोग रजिस्टर नहीं कर पा रहे, इस पर डॉ रहमान ने कहा, "जिस केस की आप बात कर रहे हैं, वो एक इकलौता मामला हो सकता है. दूसरी बात ये है कि कोविन ऐप पर इतना दबाव है कि करोड़ों लोग उस साइट पर जा रहे हैं. इसकी वजह से भी दिक़्क़त है."
लेकिन उरी के ब्लॉक मेडिकल ऑफ़िसर डॉक्टर मोहम्मद रमज़ान ने माना कि इलाक़े की कुछ जगहों पर नेटवर्क का मसला है.
उन्होंने कहा कि सीमा पर ज़ीरो लाइन के नज़दीक रहने वालों को अपने इलाक़े से नीचे आकर रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा.
सरकार का कहना है ति बुधवार को 18-44 आयु वर्ग के 15,783 लोगों को वैक्सीन लगाई गई.

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इस आयु वर्ग के लिए फ़िलहाल राज्य में 10 वैक्सीन सेंटर खोले गए हैं.
श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ के नोडल अफ़सर डॉक्टर यातू के मुताबिक़ उनके अस्पताल में बुधवार तक 480 लोगों को वैक्सीन लगाई गई है.
वैक्सीनेशन इस बीमारी से लड़ने का कारगर हथियार है लेकिन गाँव-देहात में इंटरनेट की स्पीड और जानकारी का अभाव बाधा बन रही है.
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