पुदुचेरीः कांग्रेस सरकार गिरी, विश्वास मत में हार के बाद नारायणसामी का इस्तीफ़ा

पुद्दुचेरी में आज विश्वास मत, क्या गिर जाएगी कांग्रेस सरकार

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पुदुचेरी में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार सोमवार को विधान सभा में बहुमत साबित नहीं कर पाई. विश्वास मत हारने के बाद वहां की नारायणसामी सरकार गिर गई है.

वी नारायणसामी ने कहा है कि उन्होंने, उनके मंत्रियों और कांग्रेस, डीएमके तथा निर्दलीय विधायकों ने उपराज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन को अपने इस्तीफ़े सौंप दिए हैं.

इस्तीफ़ा देने के बाद नारायणसामी ने स्पीकर के फ़ैसले को ग़लत बताते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या बताया.

उन्होंने कहा,"केंद्र की बीजेपी सरकार, एनआर कांग्रेस और एआईएडीएमके ने तीन मनोनीत सदस्यों को वोटिंग करने देकर हमारी सरकार गिरा दी. ये लोकतंत्र की हत्या है. पुदुचेरी और इस देश की जनता उन्हें सबक सिखाएगी."

कांग्रेस-डीएमके गठबंधन सरकार के कई विधायकों के इस्तीफ़े के बाद सदन में उनका संख्या बल 11 रह गया था, जबकि विपक्ष के पास 14 विधायक थे.

एक दिन का विशेष सत्र शुरू होने के कुछ मिनटों बाद वी नारायणसामी ने विश्वास मत का प्रस्ताव रखा, लेकिन प्रस्ताव को मतदान के लिए रखे जाने से पहले ही वो और उनके सत्ताधारी पक्ष के विधायक वॉक आउट कर गए.

इसके बाद, स्पीकर पी शिवकोलंधु ने घोषणा की कि वो विश्वास मत हार गए हैं. इसके बाद नारायणसामी राज भवन के लिए निकल गए.

मतदान से पहले बोलते हुए पुदुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने आरोप लगाया था कि 'पूर्व उप राज्यपाल किरण बेदी और केंद्र सरकार ने विपक्ष के साथ सांठगांठ करके सरकार को गिराने की कोशिश की. हमारे विधायक एकजुट रहे तो हम बीते 5 साल निकालने में सफल रहे. हमने केंद्र सरकार से फंड की अपील की लेकिन वो नहीं देकर केंद्र ने पुदुचेरी के लोगों से धोखा दिया है.'

साथ ही उन्होंने कहा था, "हमने डीएमके और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई थी, उसके बाद हमने कई चुनाव लड़े हैं. हमने सभी उप-चुनाव जीते हैं. स्पष्ट है कि पुदुचेरी के लोग हम पर भरोसा करते हैं."

पुदुचेरी में आज विश्वास मत, क्या गिर जाएगी कांग्रेस सरकार

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पुदुचेरी में राजनीतिक संकट कैसे गहराया

संकट में घिरी नारायणसामी सरकार को विश्वास मत से एक दिन पहले यानी रविवार को एक और झटका लगा था, क्योंकि सत्ताधारी कांग्रेस-डीएमके गठबंधन के दो और विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया था.

कांग्रेस विधायक के लक्ष्मीनारायण और डीएमके विधायक वेंकटेशन के इस्तीफ़े से विधान सभा में सत्ताधारी गठबंधन का संख्याबल और कम होकर 11 हो गया था, जबकि विपक्ष के पास 14 विधायक थे.

33 सदस्यों वाली विधानसभा में अभी कुल 28 सदस्य हैं. इनमें 3 मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं.

लक्ष्मीनारायण और वेंकटेशन ने बताया कि दोनों ने अपने इस्तीफ़े विधान सभा स्पीकर वी पी शिवकोलंधु के घर अलग-अलग जाकर सौंपे.

लक्ष्मीनारायण ने पत्रकारों से कहा, "वी. नारायणसामी के नेतृत्व वाली इस सरकार ने बहुमत खो दिया है."

उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी की सदस्यता से भी इस्तीफ़ा दे दिया है.

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बाद में वेंकटेशन ने मीडिया से कहा कि उन्होंने सिर्फ विधायक का पद छोड़ा है और वो डीएमके पार्टी में बने रहेंगे.

उन्होंने कहा, "मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र में लोगों की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा था क्योंकि विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के तहत धन का आवंटन नहीं हुआ."

पूर्व मंत्री ए नमस्सिवम (अब भाजपा में) और मल्लादी कृष्णा राव समेत कांग्रेस के चार विधायकों ने पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया था, जबकि पार्टी के एक अन्य विधायक को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित कर दिया गया था.

नारायणसामी के विश्वासपात्र ए जॉन कुमार ने इसी सप्ताह इस्तीफ़ा दिया था.

तेलंगाना के राज्यपाल डॉक्टर तमिलिसाई सुंदरराजन को पुदुचेरी के उप-राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया. जिसके बाद उन्होंने गुरुवार को नारायणसामी को 22 फरवरी को फ्लोर टेस्ट में अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था.

दो विधायकों ने ऐसे दिन इस्तीफ़ा दिया जब आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री के साथ सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों की बैठक होनी थी.

हालांकि 18 फरवरी को भी ऐसी ही चर्चा हुई थी, जिसका कोई नतीजा नहीं निकला.

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