लॉकडाउन: गुरुग्राम से दरभंगा तक साइकिल से पिता को पहुंचाने वाली ज्योति

ज्योति

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    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, पटना से बीबीसी हिंदी के लिए

कोरोना के वक़्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासन की विफलताएं जहां ख़बरों में है, वहां से छोटी सी ख़बर शायद उनके लिए मरहम साबित हो.

साल 2006 में नीतीश कुमार ने 'मुख्यमंत्री साइकिल योजना' की शुरूआत की थी. आज साइकिल चलाने के उसी हुनर का इस्तेमाल करके 13 साल की ज्योति अपने पिता को गुरूग्राम से दरभंगा तक ले आई.

कभी पैदल, कभी साइकिल और कभी ट्रक की सवारी करके पहुंचे इन बाप बेटी की कहानी, बीबीसी ने उन्हीं से जानी.

पापा में थी हिचक, बेटी के हौसले ने पूरी कर दी यात्रा

"खाने पीने को कोई पैसा नहीं रह गया था. रूम मालिक भी तीन बार बाहर निकालने की धमकी दे चुका था. वहां (गुरूग्राम) मरने से अच्छा था कि हम रास्ते में मरें. इसलिए हम पापा से कहें कि चलो साइकिल से. पापा नहीं मानते थे, लेकिन हम ज़बरदस्ती किए."

13 साल की ज्योति ने चहकते हुए मुझे ये फ़ोन पर बताया. वो इस वक़्त घर में सबकी दुलारी बनी हुई है और उसकी मां फूलो देवी उसकी पसंद का खाना रोजाना बना रही है. ज्योति की सहेलियां भी उससे 'दूर-दूर' से मिलकर चली गई हैं और स्थानीय मीडिया में ज्योति की प्रशंसा से शायद उन्हें रश्क भी हो रहा होगा.

ज्योति अपने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बैठाकर गुरूग्राम से दरभंगा के सिंहवाड़ा स्थित अपने गांव सिरहुल्ली ले आई है. ये 1200 किलोमीटर का सफ़र इस दुबली पतली सी बच्ची के हौसलों के चलते ही संभव हुआ.

पिता के एक्सीडेंट के चलते गुरूग्राम में थी ज्योति

ज्योति कुमारी राजकीयकृत मध्य विद्दालय सिरूहल्ली में आठवीं कक्षा में पढ़ती है. बीती 26 जनवरी को गुरूग्राम में बैट्री गाड़ी चलाने वाले उसके पिता मोहन पासवान एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे. जिसके बाद ज्योति और उसके चार भाई बहन अपनी मां फूलो देवी के साथ गुरूग्राम गए थे.

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ज्योति की मां फूलो देवी आंगनबाड़ी में काम करती हैं और उन्हें 2825 रूपए का मासिक मानदेय बिहार सरकार देती है. फूलो देवी बताती है, "हम आंगनबाड़ी केन्द्र से 10 दिन की छुट्टी ले कर गए थे लेकिन ज्योति के पापा की तबियत बहुत ख़राब थी और केन्द्र वाले जल्दी काम पर लौटने का दबाव बना रहे थे. इसलिए हम ज्योति को उसके पापा की सेवा के लिए गुरुग्राम छोड़ आए और बाक़ी सब बच्चों के साथ लौट आए."

फूलो देवी बताती है कि परिवार ने 60 हज़ार का कर्ज लेकर मोहन पासवान का आपरेशन कराया था, लेकिन अभी तक वो ठीक नहीं हो पाए है. लॉक डाउन के चलते इलाज भी अब बंद हो गया है.

सरकारी सहायता से ख़रीदी साइकिल

पहले से ही आर्थिक तौर पर मुश्किलें झेल रहा ये भूमिहीन परिवार लॉक डाउन के चलते और भी मुश्किलों के भंवर में फंस गया. मोहन पासवान बताते है, "कुछ दिन मांग कर चलाया, लेकिन उसके बाद तो खाने के भी लाले पड़ गए. मकान मालिक भी धमकी देता था. ट्रेन भी बंद थी, तो हमें लगा अब यहीं भूखों मर जाएंगे. लेकिन बार बार ज्योति कहती थी कि पापा तुम मर जाओगे तो हम भी मर जाएंगे."

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इस बीच इस परिवार को 1000 रूपए कोरोना सहायता के तौर पर मिली. एक्सीडेंट के चलते ज़्यादा देर चलने में लाचार पिता को देख कर ज्योति ने साइकिल ख़रीदने का फ़ैसला किया. पड़ोस के एक व्यक्ति से सेकेंड हैंड साइकिल पर सौदा 1200 रूपए में पक्का हुआ.

ज्योति बताती है, " 1200 रूपए थे ही नहीं तो देते कैसे? ऐसे में हमने अंकल को 500 रूपए अभी और 700 रूपए गुरूग्राम वापस लौटने के बाद देने का वायदा किया. जिस पर वो मान गए. मैंने उन्हें 500 रूपए दिए और 500 रूपए रास्ते के ख़र्च के लिए बचा लिए."

हालांकि खुद ज्योति की मां फूलो देवी का सुझाव था कि ज्योति गुरूग्राम में ही रूके. वो कहती है, " रात दिन टेंशन बना रहता था, कि दिल्ली हरियाणा वाला सब कोरोना बीमारी ला रहा है. गांव वाले भी सब बहुत बुरा व्यवहार कर रहे हैं. इसलिए हम चाहते थे कि ये लोग वहीं रहें."

साइकिल योजना से साइकिल सीखी

क्या तुम्हें साइकिल चलानी आती थी, मेरे इस सवाल पर ज्योति ने बताया, " मेरी बड़ी दीदी पिंकी देवी को सरकार ने साइकिल दी थी स्कूल में, उसी पर मैंने साइकिल सीख ली थी. पापा का वजन है, जिसके चलते पहले पहले साइकिल लहराती थी, लेकिन फिर बाद में बैलेंस आ गया. और जब थकते थे तो पापा से कहते थे थोड़ा पैदल चल लो."

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उधर पिता मोहन पासवान ने बीबीसी से फ़ोन पर बताया, "हम हिचक रहे थे क्योंकि बेटी तो दुबली पतली है और हम मोटे. लेकिन वो मानी नहीं और बोली कि जैसे सब जा रहे है, वैसे हम भी जाएंगे. सात मई को हम लोग रात में चले और 15 मई को यहां शाम को पहुंच गए थे. रास्ते में कई बार ट्रक वालों ने बैठाया. इसलिए रास्ता आसान हो गया. यूपी की पुलिस वालों ने खाने पीने को भी दिया लेकिन बिहार पुलिस ने कुछ नहीं दिया."

पेट्रोल पम्प पर गुजारती थी रातें

ज्योति बताती है कि उन्हें डर नहीं लग रहा था क्योंकि बहुत सारे लोग सड़क पर थे. वो रात में किसी पेट्रोल पम्प के आस पास रूकती थी और सुबह वहीं नित्यकर्म ने निवृत्त होकर आगे बढ़ती थी.

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वो बताती है, "सबने मदद की. सब हमको देखकर चौंकते थे. लेकिन चौंक कर वो भी क्या करते, और हम भी क्यों कर सकते थे."

ज्योति ने पिता को जहां राजकीयकृत मध्य विद्यालय, सिरूहल्ली में बने क्वारेंटाइन सेंटर में रखा गया है. वही बच्चियों के लिए सेंटर में कोई व्यवस्था नहीं होने के चलते ज्योति को होम क्वारेंनटाइन किया गया है.

ज्योति पर सबको गर्व

ज्योति वापस आई तो पूरा गांव उसे देखने के लिए आया. ज्योति कहती है, " बहुत अच्छा लग रहा है. हम इतना अच्छा काम किए है. बेटा से भी बढ़कर काम किया है हमने." वही उसके पिता मोहन पासवान खुद को खुशकिस्मत समझते है. वो कहते हैं, "ऐसी बेटी मुश्किल से मिलती है."

क्या वो वापस गुरूग्राम लौटेंगें, इस सवाल पर मोहन कहते है, "यही काम मिल गया, लोन मिल गया तो गाड़ी ले कर यहीं चलाएगें और अपनी बिटिया के पास रहेंगे."

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    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

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    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

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अपने आप को और दूसरों को बचाना

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  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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