कोरोना संकट: अपने खर्चे पर घर लौट रहे मजदूर, 21 दिन बाद बिहार सरकार देगी पैसा

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- Author, नीरज प्रियदर्शी
- पदनाम, पटना से बीबीसी हिंदी के लिए
लॉकडाउन में बाहर फंसे प्रवासी बिहारियों जिनमें मजदूरों, कामगारों और छात्रों की संख्या सबसे अधिक है, राज्य में उनके वापस आने का सिलसिला शुरू हो गया है.
लेकिन, फंसे हुए ये लोग अपने खर्चे पर आ रहे हैं. रेल का किराया भी ख़ुद ही वहन कर रहे हैं.
स्थानीय मीडिया में आ रही रिपोर्ट्स के अनुसार केरल से मजदूरों के लेकर लौटी श्रमिक स्पेशल ट्रेन के सवारों ने अपना 910 रुपये का टिकट ख़ुद कटाया, रास्ते का अपना ख़र्च भी खुद किया.
सोमवार को ही केरल से दो ट्रेनें दानापुर स्टेशन पहुंची, जिनमें 2,310 प्रवासी मजदूर थे.
राजस्थान के कोटा से भी 3,275 फंसे हुए छात्रों को लेकर सोमवार को तीन ट्रेनें बिहार पहुंची, इनमें दो ट्रेनें बरौनी जंक्शन पहुंची जबकि एक गया जंक्शन.
हालांकि, बिहार सरकार ने ये घोषणा की हुई है कि बाहर से लौटने वाले सभी प्रवासियों को किराया समेत कम से कम एक हज़ार रुपये दिए जाएंगे. मगर, यह राशि 21 दिनों के क्वारंटीन पीरियड के बीत जाने के बाद दी जाएगी.
सरकार की तरफ़ से एक नया आदेश भी जारी हुआ है जिसके मुताबिक़ बाहर से लौटने वालों को होम क्वारंटीन में भी रखा जाएगा. सभी को पहले एक शपथ पत्र भरना होगा और सरकार के लगाए लॉकडाउन के नियमों का पालन करना होगा.
इस नए आदेश को लेकर प्रवासियों की निगरानी और उनके रख-रखाव के मुद्दे पर बिहार का विपक्ष नीतीश सरकार पर पलटी मारने के आरोप लगा रहा है.

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कैसे बदला सरकार का स्टैंड
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने बीबीसी से कहा, "नीतीश सरकार लगातार अपना स्टैंड बदल रही है. पहले कहा प्रवासियों को लाना ठीक नहीं. जब प्रवासी आने लगे तो यही सरकार कहती है उन्हीं सुझाव पर आ रहे हैं और वे केंद्र के फैसले का स्वागत करने लगे. पहले कहा किराया नहीं लिया जाएगा, और अब कहते हैं कि पहले 21 दिन का क्वारंटीन पूरा करिए, शपथपत्र भरिए."
तेजस्वी कहते हैं, "सरकार बाहर से आए सभी लोगों के लिए अलग क्वरंटीन सेंटर बना पाने में असमर्थ है. इसलिए अब होम क्वारंटीन का ऑप्शन भी लगा दिया है. मेरा सवाल ये है कि क्या केवल शपथपत्र भर देने से किसी के क्वारंटीन होने की गारंटी हो जाती है! और जब 21 दिन पूरा ही नहीं होगा तो पैसे देंगे किसे. शंका सरकार की नियत पर है."
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लाखों आने बाक़ी, इंतजाम नाकाफी!
बिहार सरकार के आईपीआरडी की तरफ़ से चार मई को जारी अपडेट के मुताबिक़ अब तक बाहर फंसे 17 लाख लोगों ने राहत और मदद मांगी है. ज़ाहिर है, ट्रेनें चलनी शुरू हो गई हैं तो अब फंसे हुए ये लोग लौटकर वापस आएंगे.
लौटने वाले सभी प्रवासियों की रेलवे स्टेशन पर ही शुरुआती स्क्रीनिंग के बाद बसों से उन्हें उनके गृह जिले में भेजा जा रहा है.
आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार से मिली जानकारी के मुताबिक़ मंगलवार को राज्य के अलग-अलग स्टेशनों पर प्रवासियों को लेकर नौ ट्रेनें आएंगी.
विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने बीबीसी को बताया, "उम्मीद है कि बुधवार से हरियाणा और पंजाब से भी ट्रेनें बिहार के लिए खुलनी शुरू हो जाएंगी. बिहार सरकार दोनों राज्यों से लगातार संपर्क में है."
बाहर से आए लोगों को क्वारंटीन में रखने के बारे में प्रधान सचिव कहते हैं, "फ़िलहाल प्रखंड स्तर पर 2450 क्वारंटीन सेंटर का संचालन हो रहा है, जहां सोमवार की शाम तक 8968 लोग रह रहे हैं. रहने वाले लोगों को थाली, बाल्टी, गिलास, कपड़ा, तीन वक़्त का खाना और दो वक़्त पर दूध के पैकेट दिए जा रहे हैं. पंचायत और गांव के स्तर पर क्वारंटीन सेंटर बनाने का काम तेजी से चल रहा है, जल्द ही गांव के निकटवर्ती विद्यालयों में क्वरंटीन सेंटर बना दिए जाएंगे."
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मंगलवार को सर्वदलीय बैठक
कोरोना वायरस को लेकर बिहार सरकार मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सर्वदलीय बैठक करने जा रही है. यह बैठक दोपहर बाद शुरू होगी, जिसमें मुख्यमंत्री सरकार और विपक्ष के नेताओं के साथ राज्य के मौजूदा हालात पर चर्चा करेंगे.
बैठक में विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, अब्दुलबारी सिद्दीकी, डॉक्टर प्रेम कुमार और सदानंद सिंह समेत कई अन्य नेता शामिल रहेंगे. सरकार की तरफ़ से विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी के साथ ही डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे भी मौजूद रहेंगे.
मंगलवार को बिहार आने वाली ट्रेनें
- सुबह 07.05 बजे बेंगलुरु से दानापुर
- सुबह 11.30 बजे मेलुरु से दानापुर
- दोपहर 12.30 बजे कोटा से दानापुर
- सुबह 06.30 बजे कोटा से दरभंगा
- दोपहर 2 बजे केरल के त्रिशुर से दरभंगा
- सुबह 11.45 बजे एर्नाकुलम से बरौनी
- सुबह 4 बजे गुजरात के साबरमती से मुज़फ़्फ़रपुर
- शाम 5 बजे एर्नाकुलम से मुज़फ़्फ़रपुर
- शाम 5 बजे केरल के कन्नूर से सहरसा
- दोपहर 3 बजे कालीकट से कटिहार

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38 में से 31 जिलों में फैला कोरोना वायरस
बिहार में कोरोना वायरस का पहला मामला भले देरी से सामने आया हो (22 मार्च), लेकिन बीते दिनों में इसका प्रसार बहुत तेजी से हुआ है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ़ से जारी आंकड़ों के अनुसार पांच मई की शाम तक पॉजिटिव मामलों की संख्या बढ़कर 528 पहुंच गई है.
शिवहर जिले में नया मामला मिलने के साथ ही राज्य में कोरोना का प्रसार 38 में से 31 जिलों तक पहुंच गया.
राज्य में सैंपल टेस्ट की गति अभी भी धीमी ही है. अब छह लैबों में सैंपल टेस्ट होने लगे हैं. मगर कुल सैंपल टेस्ट की संख्या अभी तक 28,350 ही है.

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