कोरोना लॉकडाउन: शराब की ब्रिकी आगे भी होगी या नहीं?

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- Author, ब्रजेश मिश्र
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लागू किया गया लॉकडाउन का तीसरा चरण जारी है. तीसरे चरण के लॉकडाउन में सरकार ने काफी छूट दी हैं.
ग्रीन ज़ोन वाले इलाकों में कैब, बसें चलाने की छूट दिए जाने के साथ ही दुकानें खोलने के आदेश भी दिए गए हैं. हालांकि शराब की दुकानें खुलने से कई जगहों पर काफ़ी अराजक स्थिति सोमवार को देखने को मिली.
शराब की दुकानों के बाहर जमा सैकड़ों की भीड़ को नियंत्रित करना काफ़ी कठिन काम रहा. हालत ये हुई कि पूर्वी दिल्ली में शराब की दुकानें फिर से बंद करने की स्थिति आ गई.
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के तहत दिल्ली में भी शराब की दुकानें खोली गईं लेकिन कुछ इलाकों में लोगों ने अराजकता फैलाई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई.
उन्होंने कहा, ''कुछ जगहों पर लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग नहीं मानी. भगदड़ मच गई. इससे किसका नुकसान हो रहा है. आप ही बीमार पड़ेंगे. क्यों इस तरह का रिस्क मोल ले रहे हैं. जहां जहां ऐसी स्थिति थी वहां के लोगों ने सही नहीं किया.''
केजरीवाल ने चेतावनी दी कि अगर फिर से ऐसी स्थिति किसी भी इलाके में बनेगी तो उसे सील कर दिया जाएगा और कोई रियायत नहीं दी जाएगी.
उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ़ लोगों की ही नहीं दुकान वालों की भी ज़िम्मेदारी है कि ऐसी स्थिति न बने वरना दुकान सील कर दी जाएंगी.
लेकिन यह चिंता अकेले दिल्ली की नहीं है. देश के तमाम हिस्सों में ऐसी ही स्थिति दिखी है और लोग सोशल डिस्टेंसिंग को न मानते हुए शराब की दुकानों पर डटे रहे.

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सप्लाई का क्या हाल है?
अब सवाल यह उठता है कि शराब की दुकानों के बाहर इतनी मारामारी क्यों है? जिस तरह भीड़ शराब की दुकानों में जमा हो रही है, क्या यह आगे भी जारी रहेगी? क्या शराब का प्रोडक्शन और सप्लाई चालू है या फिर सिर्फ स्टॉक में रखी शराब ही बिकेगी?
इस सवाल पर ग़ाज़ियाबाद के एक शराब कारोबारी कहते हैं, ''फिलहाल दुकानें जहां भी खोली गई हैं वहां जिस तरह लोगों की भीड़ जमा हो रही है, ऐसा लगता है सरकार को आदेश वापस लेना पड़ेगा. भीड़ काबू में नहीं है. अगर लोग तरीके से सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाते हुए दुकानों पर आएं तो संभव है कि कारोबार चलता रहे.''
स्टॉक और सप्लाई से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, ''फिलहाल पुराना स्टॉक है जो बिक रहा है. आगे चलकर सप्लाई आएगी जैसी जरूरत होगी. लेकिन पहले जैसी स्थिति बनने में करीब एक महीने का वक़्त लगेगा. स्टॉक में इतना माल है कि दो-तीन दिन काम चल सकता है. दुकानें खुलेंगी उसी हिसाब से सप्लाई आएगी.''
लॉकडाउन की वजह से फैक्ट्रियों में काम काफ़ी समय से बंद था. अब सरकार ने फैक्ट्रियों में कुछ गाइडलाइंस के साथ काम चालू करने की अनुमति दी है.
फैक्ट्रियों में सोशल डिस्टेंसिंग और हाइजीन का ख्याल रखते हुए वहां काम करने वालों की रोज़ाना चेकिंग जैसे एहतियात बरतने होंगे.
सप्लाई की स्थिति भी ऐसी ही होगी क्योंकि प्रोडक्शन कम होगा तो सप्लाई भी कम ही रहेगी.

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एक महीने में प्रोडक्शन हो सकता है सामान्य
सप्लाई बिजनेस से जुड़े एक कारोबारी कहते हैं, ''सप्लाई फिलहाल धीमी है क्योंकि फैक्ट्रियों में काम आधा हो रहा है. 50 फ़ीसदी प्रोडक्शन हो रहा है. नई सप्लाई अभी चालू नहीं हुई. दुकानें खुलती रहेंगी तो दो-तीन दिन में नया माल आने लगेगा. अभी फैक्ट्रियों में कच्चा माल भी कम है और काम करने वाले लोग भी. धीरे-धीरे हालात सुधरेंगे. एक हफ़्ते में हर कंपनी में प्रोडक्शन होने लगेगा तो स्थिति बेहतर होगी.''
हालांकि वो यह मानते हैं कि दुकानों के बाहर लगने वाली भीड़ कुछ दिनों की ही है और दो-तीन दिन में दुकानों के बाहर लगने वाली भीड़ कम हो जाएगी.
वो कहते हैं, ''अभी 40 दिनों बाद दुकानें खुली हैं तो लोग अचानक बाहर आ गए. कुछ लोग इस आशंका के साथ दुकानों के बाहर लाइन में खड़े हैं कि फिर से न बंद हो जाए इसलिए वो स्टॉक रख रहे हैं. हालांकि दुकानें खुलती रहेंगी तो दो-तीन दिन में दुकानों के बाहर लोग दिखने कम हो जाएंगे. आगे चलकर स्थिति ऐसी होगी कि हम घाटे में जाएंगे क्योंकि लोगों के पास पैसा नहीं होगा तो खरीदेंगे कैसे.''
मेरठ की एक डिस्टिलरी से जुड़े कारोबारी बताते हैं कि हालात सामान्य होने में काफ़ी वक़्त लगेगा क्योंकि कंपनियों के पास कच्चा माल नहीं है और जहां है भी वहां काम करने वाले लोग कम हैं.
वो कहते हैं, ''लॉकडाउन से पहले जितना प्रोडक्शन होता था फिलहाल उसका 50 फीसदी ही हो रहा है. हर फैक्ट्री में कम ही लोग बुलाए जा रहे हैं. जैसे किसी कंपनी की तीन यूनिट हैं तो वो दो में ही काम चालू करेगी क्योंकि सोशल डिस्टेंसिंग जैसे तमाम एहतियात बरतने होंगे. वरना अगर कहीं कोई केस आया तो फिर पूरी फैक्ट्री बंद करनी पड़ेगी. सात से आठ दिनों में प्रोडक्शन की स्थिति सुधर जाएगी. कोई डिस्टिलरी जैसे पहले पांच लाख पेटी शराब बनाती थी तो अभी उसका आधा ही बना पाएगी. और पहले जैसी स्थिति में पहुंचने में एक महीने का वक़्त लग सकता है.''
समाचार एजेंसी एएनआई ने कर्नाटक के आबकारी विभाग के हवाले से बताया कि शराब की दुकानें खोले जाने पर राज्य में पहले दिन 45 करोड़ रुपये की शराब बिकी.
तमिलनाडु सरकार ने राज्य में सात मई से शराब की दुकानें खोलने के निर्देश जारी किए हैं.
अधिकतर राज्य शराब की बिक्री की अनुमति दे रहे हैं क्योंकि शराब से सरकार के खजाने में काफ़ी पैसा आता है.

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