कश्मीर में कोरोनावायरस : सबसे बड़े हॉटस्पॉट बांदीपोरा में एक भी वेंटिलेटर नहीं

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- Author, आमिर पीरज़ादा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कश्मीर में बांदीपोरा जिला कोरोनावायरस संक्रमण का सबसे ज्यादा शिकार है. यहां संक्रमण के सबसे अधिक मामले मिले हैं, लेकिन 4 लाख से ज्यादा की आबादी वाले इस इलाक़े में एक भी वेंटिलेटर नहीं है.
बांदीपोरा जम्मू-कश्मीर का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन कर उभरा है. इस रिपोर्ट को लिखे जाने तक यहां कोरोनावायरस संक्रमण के मामले बढ़ कर 127 तक पहुंच गए हैं. अब तक कश्मीर के किसी ज़िले से कोरोनावायरस संक्रमण का इतना बड़ा आंकड़ा नहीं आया था.
ज़िले की हाजिन तहसील का गुंड जहांगीर गांव कोविड-19 का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन कर उभरा है. यहां अब तक इसके संक्रमण के 53 पॉज़िटिव केस मिल चुके हैं.
गुंड जहांगीर में 6 अप्रैल को कोरोनावायरस संक्रमण का पहला पॉज़िटिव केस सामने आया. श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल में यहां के एक 52 वर्षीय कोविड-19 मरीज की मौत हो गई. यह शख्स फलों का कारोबार करता था और उसकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं थी और न ही वह किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आया था, जो कोरोनावायरस पॉज़िटिव हो.
अस्पताल में भर्ती कराए जाने के दिन ही इस शख्स की मौत हो गई थी. मौत के बाद जांच में पता चला कि वह कोविड-19 का शिकार था. मौत से पहले इस शख्स ने उत्तरी कश्मीर के भीतर ही सफर किया था. इसके साथ ही वह अपने ही गांव गुंड जहांगीर के ही कुछ लोगों के संपर्क में आया था. इसके बाद से ही इस गांव में कोरोनावायरस तेज़ी से फैला.

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बांदीपोरा के चीफ़ मेडिकल ऑफिसर डॉ. तजामुल हुसैन ख़ान ने कहा "कोरोना वायररस का शिकार यह शख़्स अपनी सेहत से जुड़ी कुछ दूसरी परेशानियों के इलाज के लिए श्री महाराज हरि सिंह (एसएमएचएस) अस्पताल गया था.
कोविड-19 के तहत यह शख़्स उनके रडार पर नहीं था. जिस दिन इस शख़्स को अस्पताल में भर्ती किया गया उसी दिन उसकी मौत हो गई. मौत के बाद की जाने वाली सैंपलिंग में वह कोविड-19 का शिकार निकला."
इस मौत के बाद प्रशासन ने उसके संपर्क में आए लोगों की ट्रेसिंग और स्क्रीनिंग शुरू कर दी और उसके गांव के ज्यादातर लोगों को क्वॉरन्टीन में भेज दिया.
डॉ. खान ने बीबीसी से कहा, " हम कह सकते हैं कि गुंड जहांगीर में कोरोनावायरस संक्रमण के शिकार ज़्यादातर लोग मारे गए उस 52 साल के शख़्स के संपर्क में आए थे."

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सुरक्षा बलों ने अब इस गांव और आसपास के इलाक़ो को सील कर दिया है. साफ़-सफ़ाईकर्मी और स्वास्थ्यकर्मी गलियों और गांव के घरों को सेनेटाइज़ कर रहे हैं. पूरे इलाक़े को रेड ज़ोन घोषित कर दिया गया है.
ज़िले में कोरोनावायरस नोडल अधिकारी मेहराज वानी ने बताया कि वे लोग इलाक़े से टेस्टिंग के लिए ज़्यादा से ज़्यादा सैंपल इकट्ठा कर रहे हैं. इससे यह पता चल सकेगा कि संक्रमण किस तेज़ी से फैल रहा है. लेकिन गांव के ही एक शख़्स मेहराज दीन ने कहा कि यहां लोगों की ज़िंदगी बड़ी दयनीय हो गई है. लोग अवसाद में हैं और ज़्यादा से ज़्यादा टेस्टिंग ही उन्हें इस हालात से बाहर निकाल सकती है.
मेहराज दीन ने कहा, "गुंड जहांगीर की आबादी लगभग 3700 है. प्रशासन यहां हर दिन लगभग 60 लोगों की टेस्टिंग कर रहा है. आप सोच सकते हैं गांव के सभी लोगों की टेस्टिंग कब पूरी होगी. हम चाहते हैं कि प्रशासन टेस्टिंग प्रोसेस को तेज़ करे ताकि हमें कुछ राहत मिल सके."
अब तक बांदीपोरा में कोविड-19 के 1877 टेस्ट हो चुके हैं. इनमें वे लोग शामिल हैं जो कोरोना पॉजिटिव लोगों के संपर्क में आए थे. इसमें उन लोगों को भी शामिल किया गया है, जो रेड जोन के दायरे में हैं.
डॉ. खान कहते हैं कि वे लोग पीसीआर में टेस्टिंग प्रक्रिया शुरू करते हैं. इसके बाद उन्हें सैंपल को श्रीनगर के एसकेआईएमएस (SKIMS) अस्पताल भेजना होता है ताकि वहां टेस्ट पूरा हो जाए. हर दिन 100 से 200 सैंपल टेस्टिंग के लिए भेजे जाते हैं. "
अभी भी प्रशासन मास टेस्टिंग ( एक साथ कई लोगों की टेस्टिंग) से बहुत दूर है. दरअसल केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अभी सिर्फ चार ही मास टेस्टिंग सेंटर हैं. पूरे जम्मू-कश्मीर में अब तक सिर्फ 19,746 टेस्ट ही हो पाए हैं.
बांदीपोरा में हेल्थकेयर सिस्टम बेहद कमजोर

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बांदीपोरा की आबादी 4 लाख से ऊपर है लेकिन इसके अस्पतालों में एक भी लाइफ-सेविंग वेंटिलेटर नहीं है. अस्पतालों में बुनियादी मेडिकल उपकरण न होने की स्थिति में यहां के डॉक्टरों को ज्यादातर कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों को श्रीनगर के अलग-अलग अस्पतालों में भेजना पड़ता है.
बांदीपोरा के सरकारी जिला अस्पताल के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा " अभी तक हमें वेंटिलेंटर की जरूरत नहीं पड़ी है लेकिन खुदा न करे आगे इसकी जरूरत पड़ी तो हमारे सामने काफी मुश्किल हालत पैदा हो सकती है". वह कहते हैं, " जब हमारे सामने मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति पैदा होती है, हम मरीजों को श्रीनगर के अस्पतालों में ट्रांसफर कर देते हैं लेकिन फर्ज कीजिये कि ये अस्पताल भरे हों तो फिर हमारे मरीजों को कौन दाखिल करेगा. "
बांदीपोरा के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. तजामुल हुसैन खान मानते हैं कि इस वक्त यहां के अस्पतालों में वेंटिलेंटर नहीं हैं. लेकिन वे यह भी कहते हैं कि प्रशासन ने वेंटिलेंटर की सुविधा वाले क्रिटिकल केयर एंबुलेंस तैयार रखे हैं. स्थिति गंभीर होने पर मरीजों को इनसे श्रीनगर तक पहुंचाया जा सकता है. "
उन्होंने दावा किया कि वेंटिलेटर खरीदे जा चुके हैं और कुछ ही दिनों में पहुंचने वाले हैं. लेकिन बांदीपोरा जिला अस्पताल के जिन डॉक्टरों से हमने बात की उन्होंने कहा कि यहां वेंटिलेंटर बेकार साबित होंगे क्योंकि एक तो उन्हें रखने की जगह नहीं है. दूसरे, उन्हें चलाने वाले लोग भी नहीं हैं. हालांकि डॉ. तजामुल हुसैन सकारात्मक रवैया रखते हैं. वह कहते हैं कि यह सच है कि वेंटिलेटर चलाने के लिए उनके पास लोग नही हैं लेकिन इसकी व्यवस्था की जा सकती है. लोगों को एक या दो सप्ताह की ट्रेनिंग के लिए भेजा जा सकता है, ताकि वे वेंटिलेंटर ऑपरेट करना सीख सकें.
कश्मीर की आबादी 70 लाख से ज्यादा है और यहां सिर्फ 100 वेंटिलेंटर हैं. इनमें से कइयों का पहले से ही इस्तेमाल हो रहा है.
बांदीपोरा प्रशासन ने कोरोना के लेवल-2 अस्पताल बनाए हैं, जहां वैसे लोगों का इलाज हो सकता है, जिनमें संक्रमण के लक्षण नहीं हैं और हैं भी तो मामूली. अगर किसी की स्थिति गंभीर हो तो उसे श्रीनगर भेजा जा सकता है, जो यहां से 60 किलोमीटर दूर है.
बांदीपोरा में एक जिला अस्पताल है, जिसमें सिर्फ 25 बेड हैं. यहां तीन कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर और छह प्राइमरी हेल्थ (PHC) केयर यूनिटें हैं. इस तरह चार लाख की आबादी वाले इस जिले में अस्पतालों के बिस्तरों की संख्या 200 से भी कम है. पूरे जिले में सिर्फ 90 डॉक्टर हैं. यानी साढ़े चार हजार की आबादी पर एक डॉक्टर. यह वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मानकों से काफी कम है. इसके मुताबिक एक हजार की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए.
बांदीपोरा में जिला प्रशासन अब तक 33 क्वॉरन्टीन सेंटर बना चुका है. यहां अभी 437 लोग क्वॉरन्टीन में हैं. अभी भी 12761 लोगों को निगरानी में रखा गया है. जम्मू-कश्मीर में कोविड-19 के 614 मामलों की रिपोर्टिंग हुई है. 30 अप्रैल तक यहां कोविड-19 के आठ मरीजों की मौत हो चुकी थी. अभी भी यहां 70 हजार लोगों पर निगरानी रखी जा रही है. अब तक 50 हजार लोग 28 दिनों की निगरानी अवधि खत्म कर चुके हैं.
इस केंद्र शासित प्रदेश के प्रिंसिपल सेक्रेट्री रोहित कंसल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस के 80 फीसदी पॉजिटिव मामलों में पहले संक्रमण के लक्षण नहीं दिखे थे.
जम्मू-कश्मीर में हेल्थ ऑडिट शुरू, घर-घर हो रहा है सर्वे

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इस बीच, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने यहां के 1.3 करोड़ लोगों के लिए हेल्थ ऑडिट शुरू कर दिया है. इसके तहत सरकारी टीम घर-घर जाकर सर्वे कर रही है. लोगों से उनके स्वास्थ्य और ट्रैवल हिस्ट्री के बारे में पूछा जा रहा है.
'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस सर्वे में फील्ड लेवल पर 45,000 कर्मचारी लगे हुए हैं. इनमें कोविड क्लीनिक के 3 हजार डॉक्टर शामिल हैं. पिछले तीन दिनों में अकेले श्रीनगर के डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों का सर्वे हो चुका है. लेकिन अब यह सवाल किया जा रहा है कि क्या कोरोना संक्रमण को काबू करने में सरकार का यह कदम कारगर होगा क्योंकि कश्मीर में अब तक इसके जो पॉजिटिव केस सामने आए हैं, उनमें इसके लक्षण नहीं दिखे थे.

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