कोरोना वायरस: लॉकडाउन में एक महीने से मुस्लिम के घर रह रहा है असम का हिंदू दंपती

इमेज स्रोत, SANJAY DAS/BBC
- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
कोरोना की वजह से एक महीने से जारी लॉकडाउन के दौरान असम का एक हिंदू दंपति एक मुस्लिम के घर में रह रहा है.
यह मामला पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले का है.
असम के ग्वालपाड़ा के रहने वाले मिथुन दास इलाज के लिए अपनी पत्नी मौमिता के साथ सड़क मार्ग से कोलकाता जा रहे थे.
लेकिन अचानक लॉकडाउन के ऐलान की वजह से यह लोग रास्ते में ही फंस गए.
इस मुसीबत के दौर में बेलडांगा इलाक़े के फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने उनको अपने घर में शरण दी.
वह पूरा इलाक़ा अल्पसंख्यकों का है. दोनों पति-पत्नी एक महीने से वहीं रह रहे हैं.
इस घटना की जानकारी मिलने के बाद बीडीओ और स्थानीय थाने के ओसी ने गांव जाकर उनको खाने-पीने की चीज़ें भी मुहैया कराई हैं.
Sorry, your browser cannot display this map
दिल की बीमारी और इलाज
असम में ग्वालपाड़ा ज़िले के रहने वाले मिथुन दास को दिल की बीमारी है.
इसी के इलाज के लिए बीते महीने वह अपनी पत्नी को साथ लेकर कोलकाता के लिए सड़क मार्ग से निकले थे.
लेकिन पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद ज़िले के बेलडांगा क़स्बे के पास पहुंचते ही देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान हो गया.
इससे यह दंपति भारी असमंजस में पड़ गया. उनके पास इतने लंबे समय तक होटल में रहने का पैसा नहीं था.
आस-पास उनका न तो कोई परिचित था और न ही कोई रिश्तेदार.
उसके बाद असम के अपने गांव के किसी परिचित के जरिए उनको इलाक़े के एक युवक का पता चला.
यह दोनों लोग उसी सहारे बेलडांगा के मिर्ज़ापुर मौल्लापाड़ा गांव में पहुंचे.
वहां फ़ारूक़ अब्दुल्लाह नामक वह युवक उन दोनों को सहर्ष अपने घर शरण देने के लिए तैयार हो गया. उसने महीने भर से उनके आतिथ्य में कोई कसर नहीं रख छोड़ी है. उसने खाने-पीने का इंतज़ाम तो किया ही है, मौमिता के बीमार पति के लिए ज़रूरी दवाएं भी खरीद दी हैं.
मौमिता बताती हैं, "पति को दिल की बीमारी है. उनके इलाजे के लिए दो छोटे बच्चों को रिश्तेदारों के पास छोड़ कर हम सड़क मार्ग से कोलकाता के लिए रवाना हुए थे. लेकिन लॉकडाउन की वजह से रास्ते में ही फंस गए. यहां हम किसी को नहीं पहचानते थे."

इमेज स्रोत, SANJAY DAS/BBC
मानवता की ख़ातिर
मौमिता के मुताबिक़, उनके गांव में किसी ने बताया कि फ़ारूक़ नामक बेलडांगा इलाक़े का एक फेरीवाला युवक अपने काम के सिलसिले में असम आता था. उसने कहीं से उसका नंबर भी लेकर दे दिया. मौमिता और उनके पति पता पूछते हुए उस अल्पसंख्यक मोहल्ले में पहुंचे जहां फ़ारूक़ रहता था. वहां फ़ारूक़ ने बेहिचक उनको अपने घर में रहने को कह दिया. मौमिता के पति मिथुन बताते हैं, फ़ारूक़ ने हमारे लिए इस एक महीने में जो किया है वह तो अपने लोग भी नहीं करते हैं. हम उनका अहसान आजीवन नहीं भूल सकते. वे हमारे लिए मसीहा बन कर उभरे हैं.
जिस फ़ारूक़ ने उन दोनों को अपने घर में शरण दी है वह इलाक़े की पंचायत प्रमुख आशिया बीबी का भतीजा है.
फ़ारूक़ बताते हैं, "मैं असम के ग्वालपाड़ा ज़िले के उस इलाक़े में कुछ सामान बेचने जाता था. वहां मैं एकाध बार इनलोगों के गांव में भी गया था. लॉकडाउन की वजह से यह लोग मुसीबत में थे. इसलिए मैंने मानवता का धर्म निभाते हुए इनको अपने घर में शरण दी है." मिर्ज़ापुर 1 नंबर ग्राम पंचायत की प्रमुख आशिया बीबी ने भी इस दंपती की हरसंभव सहायता की है. फ़ारूक़ कहते हैं कि अभी तो महज़ एक महीना ही हुआ है. यह दोनों चाहें तो एक साल यहां रह सकते हैं."

इमेज स्रोत, SANJAY DAS/BBC
लॉकडाउन की मियाद बढ़ने के बाद इन दोनों ने सोमवार को इलाक़े के ब्लाक डेवलपमेंट ऑफ़िसर (बीडीओ) बी. मित्र से मुलाक़ात कर किसी तरह असम वापसी की व्यवस्था करने का अनुरोध किया.
उनका कहना था कि वे दो छोटे बच्चों को गांव में परिजनों के पास छोड़ आए हैं. लेकिन बीडीओ ने कहा कि लॉकडाउन ख़त्म नहीं होने तक इसका इंतज़ाम करना मुश्किल है. उन्होंने लॉकडाउन ख़त्म होते ही इनको वापस भेजने का भरोसा दिया है.

इमेज स्रोत, SANJAY DAS/BBC
मंगलवार को बीडीओ और स्थानीय थाने के ओसी गांव जाकर इन दोनों को एक सप्ताह के राशन की सामग्री दे आए. उन्होंने प्रशासन की ओर से आगे भी सहायता देने का भरोसा दिया है.
बीडीओ बी. मित्र ने बताया, "उस महिला ने सोमवार को फ़ोन पर मुझसे पूरी स्थिति बताकर घर लौटने में सहायता मांगी थी. लेकिन लॉकडाउन के दौरान दूसरे राज्य में जाना संभव नहीं है. उनको एक सप्ताह का राशन दे दिया गया है. लॉकडाउन ख़त्म होते ही प्रशासन उनको वापस भेजने का इंतज़ाम करेगा."

- कोरोना महामारी, देश-दुनिया सतर्क
- कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव
- कोरोना वायरस का बढ़ता ख़तरा, कैसे करें बचाव
- कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क पहनना क्यों ज़रूरी है?
- कोरोना: मास्क और सेनेटाइज़र अचानक कहां चले गए?
- अंडे, चिकन खाने से फैलेगा कोरोना वायरस?
- कोरोना वायरस: बच्चों को कोविड-19 के बारे में कैसे बताएं?
- कोरोना वायरस: संक्रमण के बाद बचने की कितनी संभावना है
- कोरोना वायरस का कहर बरपा तो संभल पाएगा भारत?
- कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का अपमान क्यों
- कोरोना: माचिस की आग से 'स्टे होम' का संदेश
- कोरोना वायरस: क्या करेंसी नोट और सिक्कों से भी फैल सकता है?
- कोरोना वायरस: तीसरे चरण के संक्रमण से बचने के लिए कितना तैयार है भारत


इमेज स्रोत, MohFW, GoI

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















