कोरोना वायरसः क्या है राजस्थान का कंटेनमेंट प्लान

जयपुर

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इमेज कैप्शन, राजस्थान में असंगठित मजदूर यूनियन के लोग मजदूरों का ख्याल रखने की कोशिश करते हुए
    • Author, मोहर सिंह मीणा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, जयपुर से

भारत में कोरोनावायरस के मामले

17656

कुल मामले

2842

जो स्वस्थ हुए

559

मौतें

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

भारत में अब तक कोरोना के 4,281 पॉजिटिव मामले मिले हैं और 111 की मौत हो चुकी है.

अब स्थिति को सुधारने के लिए केंद्र ने कंटेनमेंट प्लान लागू करने का निर्णय लिया है. जबकि राजस्थान में कोरोना की रोकथाम के लिए पहले से ही कंटेनमेंट प्लान लागू है.

राजस्थान में सबसे पहले लॉकडाउन का फ़ैसला लिया गया. भीलवाड़ा ज़िले में बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए कर्फ़्यू को महाकर्फ़्यू में तब्दील किया गया. इसके साथ ही राज्य की 7.5 करोड़ आबादी में से 5 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का दावा सरकार ने किया है.

राजस्थान में अब तक कोरोना के 288 मामले मिले हैं और कोरोना से पीड़ित 6 लोगों की मौत भी हो चुकी है. 36 मरीज़ों को इलाज के बाद ठीक भी किया गया है. इसलिए यहां का कंटेनमेंट प्लान चर्चा में है.

भीलवाड़ा में लगातार बढ़ते हुए मामलों में अब स्थिरता देखने को मिल रही है. पिछले कई एक सप्ताह में यहां एक ही मामला मिला है. जिसे प्रशासन अपने कंटेनमेंट का ही परिणाम बता रहा है.

तीन लेयर में की गई स्क्रीनिंग

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा ने राजस्थान में अपनाए जा रहे कंटेनमेंट प्लान के बारे में बीबीसी को बताया कि, राज्य की क़रीब 7.5 करोड़ आबादी में से 5 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग कर चुके हैं. अब तक 14 हज़ार से ज्यादा सैंपल जाँच की जिनमें 288 पॉजिटिव मिले और 36 मरीज़ ठीक भी हुए हैं.

वह बताते हैं कि, पॉजिटिव मामला मिलने पर एक किमी, तीन किमी और पाँच किलोममीटर की तीन लेयर में काम किया जाता है. पहले एक किमी पर कर्फ़्यू लगा कर इंटेन्सिव स्क्रीनिंग की जाती है. फिर तीन किमी के दायरे में पॉजिटव मिले शख़्स की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग करते हैं. इसके साथ ही पाँच किमी के दायरे में रहने वालों की स्क्रीनिंग की जाती है.

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स्क्रीनिंग के आधार पर सैंपल लिए जाते हैं और 'इन्फल्युएंज़ा लाइक इल्नेस' मामलों की अलग सूची तैयार कर मॉनिटरिंग की जाती है.

भीलवाड़ा में तीन हज़ार सदस्यों की टीम से क़रीब 28 लाख आबादी की तीन तीन बार स्क्रीनिंग कराने के कारण अब यहां पिछले एक सप्ताह में एक ही मामला मिला है.

मंत्री डॉ शर्मा आगे बताते हैं, "14 दिन में वायरस डिटेक्ट हो सकता है, इसलिए यहां हर एक आदमी की 5-5 दिन के दौरान तीन बार स्क्रीनिंग कराई है. मेडिकल की टीमों ने 'डोर टू डोर' सर्वे कर लोगों की जानकारी जुटाई. जिसके आधार पर लोगों को क्वारेंटाइन और आईसोलेट किया गया."

"वहां पहला मामला मिलते ही तुरंत एक किमी के दायरे में कर्फ़्यू लगा दिया गया. ज़िले की सीमाएं 13 चेक पोस्ट से सील की गई. शहर व ग्रामीण इलाक़ों में जाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया और स्क्रीनिंग कराने से ही हम कम्यूनिटी स्प्रेड को रोकने में सफल रहे हैं."

एसएमएस अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ वीरेंद्र सिंह बताते हैं कि, राजस्थान में हुए लॉकडाउन और स्कूलों की छुट्टियां करने का सबसे इनिशियल और इंपोर्टेंट क़दम उठाया गया. यह क़दम बीमारी को रोकने में बेहद कारगर साबित हुआ है.

डॉ. वीरेंद्र कहते हैं, "एन-95 मास्क, पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट, सेनेटाइजर की कमी नहीं होनी चाहिए, जिसकी अभी भी सख़्त कमी है. अब जिस तेज़ी से यह बढ़ रहा है, मुझे आशंका है कि यदि इसी तेज़ी से बढ़ेगा तो फ्रंट लाइन योद्धा (मेडिकल टीम) बीमार होने से हालत बिगड़ सकते हैं."

प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका

प्रशासनिक अधिकारियों की ज़िलों व राज्य स्तर पर टीम बनाकर कार्य किया जा रहा है.

ज़िला स्तर पर कलेक्टर को नोडल अधिकारी बनाया गया है और कंट्रोल रूम स्थापित कर एडीएम स्तर के अधिकारी को इंचार्ज नियुक्त किया है.

राज्य स्तर पर मेडिकल रिलेटेड काम करने के लिए 9 आईएएस स्तर के अधिकारियों की टास्क फोर्स बनाई है. राजस्थान प्रशासनिक व पुलिस सेवा के अधिकारियों को भी स्वास्थ्य संबंधी कार्यों में ज़िला स्तर व थानों में जिम्मेदारियां सौंपी हैं.

मंत्री डॉ रघु शर्मा ने कहा कि, भीलवाड़ा को कंट्रोल के बाद अब राजधानी जयपुर और झुंझनूं ज़िलों में लगातार मामले बढ़ रहे हैं. इसलिए, सरकार ने अपनी ट्रैवल हिस्ट्री नहीं बताने वालों पर एफ़आईआर दर्ज करने का मन बनाया है.

भीलवाड़ा के मांडल का रहने वाला सतीश जो 16 दिन एमजी अस्पताल में कोरोना से जंग जीत कर वापस घर पहुंचा है. वह कहता है, "मैं अब बिल्कुल ठीक हूं. 16 दिन एमजी अस्पताल में भर्ती रहा, जहां डॉक्टर्स ने पूरा ध्यान रखा इसलिए मैं बच गया."

कोरोना कंट्रोल के लिए स्क्रीनिंग सबसे ज़रूरी

राज्य में किस तरह कंटेनमेंट प्लान लागू किया जा रहा है और अन्य राज्यों के मुक़ाबले किस तरह अलग है? इस सवाल पर राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित सिंह बीबीसी को बताते हैं, "लॉकडाउन और कंटेनमेंट ही हमारी ताक़त है."

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उन्होंने यह भी बताया, "जैसे ही केस पॉजिटिव मिला तो बिना समय बर्बाद किए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, सैकंड्री कॉन्टैक्ट्स की जांच और बॉर्डर सील कर आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई. इस दौरान बिल्कुल लिबरल होने की ज़रूरत नहीं, यदि लोगों को परेशानी होती है तो यह उनकी लाइफ़ के लिए ही उठाए गए क़दम हैं."

"हम हर एक घर और हर एक शख़्स तक पहुंचे और स्क्रीनिंग की गई, क्योंकि कई बार कॉन्टैक्ट्स को भी नहीं मालूम होता है कि वह किस के संपर्क में आया है. जब तक स्क्रीनिंग नहीं की जाएगी तब तक इसकी रोकथाम नहीं की जा सकती है, जिसने यह कर लिया वह सक्सेसफुल है."

भीलवाड़ा में लगातार बढ़ रहे मामले रुकने के पीछे क्या कारण रहे? इस सवाल पर रोहित सिंह ने बताया, "इसका सबसे बड़ा कारण रहा रूथलेस कंटेनमेंट. हमने तुरंत कर्फ़्यू लगाया और शहर व ज़िला बॉर्डर सील कर गाड़ियों का मूवमेंट बंद किया. पॉजिटिव केस की क्लस्टर मैपिंग की गई और डिसइन्फेक्शन करवाया गया. इसके बाद तीन हज़ार लोगों टीम बना कर शहर के दस लाख लोगों का सर्वे कराया."

जयपुर के रामगंज में भीलवाड़ा जैसी स्थिति बनती दिख रही है और झुंझनूं में भी मामले बढ़ रहे हैं. यहां क्या प्लान रहेगा? इस सवाल पर रोहित सिंह ने बताया, "रामगंज और भीलवाड़ बिलकुल अलग हैं. दोनों एक ही राज्य में हैं लेकिन दोनों के बीच बहुत अंतर है. रामगंज में बहुत घनत्व है इसलिए वहां सोशल डिस्टेंसिंग फिजिकली कम संभव है. जहां ज़्यादा मामले हैं वहां क्वारंटाइन करना आवश्यक है."

उन्होंने यह भी बताया कि झुंझनूं में आने वाले अधिकतर मामले ट्रैवल हिस्ट्री के हैं, ये वैसे मामले हैं जिनमें लोगों ने अपनी ट्रैवल हिस्ट्री छिपाई है.

लॉकडाउन और कर्फ़्यू में खाद्य सामग्री

राजस्थान के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रमेश चंद मीणा का कहना है, "लोगों तक खाद्य सामग्री पहुंचाने के लिए हमने ऐसे लोगों को चिन्हित किया है. ग्रामीण स्तर पर शिक्षकों सहित अन्य कर्मियों के माध्यम से खाना पहुंचाया जा रहा है."

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प्रभावित इलाकों में फूड पैकेट्स वितरित किए जा रहे हैं और कर्फ़्यू एरिया में लोगों को डोर टू डोर सप्लाई दी जा रही है.

मजदूरों के लिए काम करने वाले राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन के मुकेश गोस्वामी बताते हैं, "हम 11 संस्थाएं मिलकर लोगों को खाना वितरण कर रहे हैं. बाहर से आने वाले मजदूर और शहरों से दूर कच्ची बस्तियों में रहने वाले बंगाल, बिहार, उड़ीसा के लोगों तक सरकारी दावे नहीं पहुंच रहे हैं."

वह कहते हैं, "लोगों को हम 21 मार्च से खाना वितरण कर रहे हैं, लोग परेशान हैं. सरकारी मशीनरी शहरों तक तो एक जगह खाना उपलब्ध करा रही है लेकिन हर किसी भूखे तक उनकी पहुंच नहीं है."

कंटेनमेंट प्लान में पुलिस की भूमिका

राजस्थान गृह विभाग के सचिव राजीव स्वरूप ने बीबीसी को बताया कि पुलिस मानवीय आधार पर कार्य कर रही है, लोगों को फूड पैकेट्स पहुंचाने और बजुर्गों को मेडिकल सुविधाएं प्रदान करने से लोग भी पुलिस को सहयोग कर रही है.

उनके मुताबिक जिस तरह भीलवाड़ा को सील किया गया और इसी तरह जयपुर में क़रीब 28 लाख आबादी वाले परकोटे को पूरी तरह सील किया है. राज्य में जहां भी पॉजिटिव केस मिल रहे हैं वहां पर तुरंत ही कर्फ़्यू लगाया जा रहा है.

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पॉजिटिव मामला मिलने पर जब तक कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग नहीं हो और स्थितियां अंडर कंट्रोल नहीं होने तक कर्फ़्यू रहता है.

तब्लीग़ी जमात से जुड़े मामलों के सवाल पर सचिव राजीव स्वरूप कहते हैं, "सबसे जल्दी हमारे राज्य में तब्लीग़ी जमात से जुड़े लोगों को चिन्हित कर क्वारंटाइन और आइसोलेट किया गया. उनके टेस्ट कराए गए और उनकी कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग कराई गई, अब स्थिति को अंडर कंट्रोल है."

राजस्थान के पुलिस महानिदेशक डॉ भूपेंद्र सिंह यादव कहते हैं, "जहां भी लॉकडाउन और कर्फ़्यू हैं वहां कि लोकल सिचुएशन के मुताबिक ही सख़्ती बरती जा रही है."

डीजीपी यादव कहते हैं, "भीलवाड़ा में शहर, ग्रामीण एरिया और प्रभावित एरिया की आवश्यकता के अनुसार मल्टी लेयर में व्यवस्था की गई है. रामगंज में आबादी का घनत्व ज़्यादा है इसलिए वहां मिले पहले मरीज़ के संपर्क से मामले बढ़े थे."

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