कोरोना वायरस संकट के इस दौर में डॉक्टरों के घरवाले भी चिंतित हैं?

डॉक्टर्स

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, तारेंद्र किशोर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत में कोरोनावायरस के मामले

17656

कुल मामले

2842

जो स्वस्थ हुए

559

मौतें

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

पूरी दुनिया इस वक़्त कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ एक जंग लड़ रही है. इस जंग में फ्ऱंटफ़ुट पर लड़ाई लड़ने वालों में डॉक्टर्स, नर्स और दूसरे मेडिकल स्टाफ़ हैं. इनके घर वालों की चिंताएं किस तरह की हैं.

जब ये दिन-रात ड्यूटी में लगे होते हैं तो इनके घरवालों पर क्या बीत रही होती है. ख़ासतौर पर जब लगातार डॉक्टरों और दूसरे मेडिकल स्टाफ़ के लिए प्राइवेट प्रोटेक्शन इक्विपमेंट की कमी की बात अब किसी से छुपी नहीं रह गई है.

हाल ही में एम्स के फिजियॉलॉजी विभाग के एक डॉक्टर का कोरोना टेस्ट पॉज़िटिव आया है. उनकी पत्नी का भी कोरोना टेस्ट पॉज़िटिव आया है. वो गर्भवती भी थीं और अभी उन्होंने बच्चे को जन्म दिया है. दोनों एम्स में ही भर्ती हैं और अभी उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है.

'भगवान का भरोसा'

डॉक्टर अमनदीप एम्स में सीनियर रेज़िडेंट हैं और मेडिसिन विभाग में डॉक्टर हैं.

वो बीबीसी से बातचीत में कहते हैं, "पीपीई की कमी तो है ही. हम भी कभी-कभार ही एन-95 मास्क इस्तेमाल करते हैं. अक्सर ट्रिपल लेयर मास्क पहनकर ही काम चलाते हैं. इस पर घर वाले परेशान होते हैं और एन-95 मास्क पहनने पर ही ज़ोर देते हैं. इस तरह की कई चिंताएँ घरवालों की होती हैं."

उनकी मां आशा रानी राजस्थान के गंगानगर में रहती हैं. वो अपने बेटे को लेकर इन दिनों काफ़ी फ़िक्रमंद रहती हैं.

वो कहती हैं, "कॉल नहीं उठाने पर भी इन दिनों चिंता होने लगती है. मास्क नहीं लगाता. बार-बार कहती हूँ कि मास्क लगाकर रखा कर. कोरोना के बहुत मरीज़ आ रहे हैं, इसलिए टेंशन रहता है."

वो आगे कहती हैं, "मरीज़ों के बीच काम करने से संक्रमण का ख़तरा लगा रहता है. दिन-रात उनके बीच रहता है. बस भगवान का भरोसा है. "

वो सरकार से चाहती हैं कि डॉक्टरों की भी हर दो-तीन दिन पर जांच हो. उनको सेफ़्टी की हर चीज़ मिले ताकि वो भी अपना काम बेफ़िक्र होकर कर सकें. डॉक्टर स्वस्थ्य रहेंगे तभी तो वो मरीज़ों की भी सेवा कर पाएंगे.

डॉक्टर्स

इमेज स्रोत, Getty Images

क्या उनके मन में कभी यह नहीं आता कि वो अपने बेटे को वापस बुला लें?

इस सवाल के जवाब में वो कहती हैं, "डॉक्टर का फ़र्ज़ मरीज़ों की देखभाल करना है, वो उसे किसी भी स्थिति में निभाना चाहिए. मैं तो कहती हूँ कि छुट्टी भी मत लेना लेकिन अपना ख़याल रखना."

घरवालों का डर

जयपुर का सवाई मानसिंह अस्पताल राजस्थान का सबसे बड़ा अस्पताल है. इस अस्पताल में अब तक 26 कोरोना पॉज़िटिव मामले आ चुके हैं, जिसमें से 16 अब तक ठीक भी हो चुके हैं.

यहां ईएनटी विभाग के प्रोफ़ेसर डॉक्टर पवन सिंघल कहते हैं, "मेरे माता-पिता बुज़ुर्ग हैं. पिता की बाईपास सर्जरी हो रखी है और मां अस्थमा की मरीज़ हैं. उन्हें लेकर सबसे अधिक डर लगा रहता है कि अगर कहीं मैं अस्पताल से इंफ़ेक्शन लेकर आ गया तो वो इसके सबसे आसान शिकार होंगे. "

वो आगे कहते हैं, "डॉक्टरों के संक्रमित होने की इतनी रिपोर्ट्स आ रही हैं. इटली में भी 60 डॉक्टरों के इंफ़ेक्शन की रिपोर्ट हैं यहां मुंबई और दिल्ली से भी इस तरह की रिपोर्ट आई है. इसमें कोई शक नहीं कि इसे देखकर घरवालों में एक डर पैदा होता है."

डॉक्टर्स

इमेज स्रोत, Getty Images

डॉक्टर पवन सिंघल की पत्नी भी डॉक्टर हैं. वो बताते हैं कि उन लोगों ने अपने घर के नीचे एक बाथरूम बना रखा है और अस्पताल से लौटते ही वो दोनों सबसे पहले बाथरूम में शॉवर लेते हैं और वहीं कपड़ों को वॉशिंग मशीन में डाल देते हैं तब घर में अंदर आते हैं.

डॉक्टर पवन सिंघल के पिता रामावतार गुप्ता इस डर को लेकर कहते हैं, "एक डर तो है कि कहीं ये वायरस घर ना आ जाए लेकिन मरीज़ों का इलाज करना इनका फ़र्ज़ है. वो तो करनी ही चाहिए. मुझे तो गर्व है अपने बेटे-बहू पर."

सुरक्षा के सवाल पर वो कहते हैं कि अगर सरकार नहीं कर पा रही है तो ख़ुद ही कुछ व्यवस्था करें लेकिन एक डॉक्टर को अपनी ड्यूटी जारी रखनी चाहिए.

एक मां के तौर पर डराने वाला एहसास

डॉक्टर्स

इमेज स्रोत, Getty Images

डॉक्टर गुरप्रीत कौर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में गाइनोक्लोजिस्ट हैं और उनके पति नोएडा के ही सुरभी हॉस्पिटल में चाइल्ड स्पेशलिस्ट हैं. उनकी साढ़े चार साल की एक बेटी है.

वो कहती हैं, "हॉस्पिटल में काम पर जाना मेरी नैतिक ज़िम्मेवारी है. इससे हम पीछे नहीं हट सकते. हां, डर ज़रूर लगा रहता है कि क्या पता कौन संभावित कोरोना का मरीज़ हो."

वो आगे कहती हैं, "हॉस्पिटल से घर लौटना एक डराने वाला एहसास कराता है, ख़ासकर बेटी को लेकर. एक मां के तौर पर यह बहुत डराने वाली फ़ीलिंग है. दूसरे डॉक्टर्स के साथ भी ऐसा ही है. किसी के साथ उनके बुज़ुर्ग मां-बाप रहते हैं तो ज़्यादातर के साथ बच्चे तो रहते ही हैं. और ये छोटे बच्चे छोड़ते नहीं हैं और आपके संपर्क में रहते हैं. यह सबसे बड़ी डर की वजह है."

वो कहती हैं कि निश्चित रूप से यह हमारे पेशे और परिवार के बीच का द्वंद है.

बीबीसी संवाददाता अनंत प्रकाश ने उत्तर प्रदेश के एक अस्पताल में काम करने वालीं एक महिला डॉक्टर के पिता से बात की और उनकी चिंताओं को जानने की कोशिश की.

पेशे से बैंकर रहे इन डॉक्टर के पिता अश्विनी गुप्ता बताते हैं, "ये बात सही है कि हम सभी चिंतित हैं. दुनियाभर से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के इस वायरस से संक्रमित होने की ख़बरें आ रही हैं. जब मेरी बिटिया अस्पताल जाने के लिए निकलती है तो एक चिंता तो होती है कि कहीं कुछ हो न जाए...वो भी तब जब मास्क और सुरक्षा उपकरणों के पर्याप्त मात्रा में न होने की ख़बरें आ रही हों. लेकिन ये उनका काम है और मैं पूरी तरह से उनके साथ हूँ."

कोरोना वायरस
कोरोना वायरस

इमेज स्रोत, MOHFW_INDIA

कोरोना वायरस के बारे में जानकारी

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)