श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों को कितना जानते हैं आप?

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केंद्र सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत एक नए ट्रस्ट के गठन की घोषणा कर दी है.
रामलला का केस लड़ने वाले वकील के. परासरन के अलावा धार्मिक क्षेत्र के पांच अहम लोगों को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य मनोनीत किया गया है.
उत्तर प्रदेश सरकार के दो और केंद्र सरकार के तीन प्रतिनिधि बतौर पदेन सदस्य इसके सदस्य होंगे.
इनके अलावा राम मंदिर निर्माण आंदोलन से जुड़े कुछ नामों को भी ट्रस्ट में जगह मिली है.
15 सदस्यों वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नामित सदस्यों का ब्योरा -
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ट्रस्ट के सदस्य कौन-कौन हैं...
- के. परासरन (रामलला के वकील)
- जगतगुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज (प्रयागराज)
- जगतगुरु माधवाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी महाराज (पेजावर मठ, उडुपी)
- युगपुरुष परमानंद जी महाराज (हरिद्वार)
- स्वामी गोविंददेव गिरि जी महाराज (पुणे)
- महंत दीनेंद्र दास (निर्मोही अखाड़ा, अयोध्या बैठक)
- विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र (अयोध्या)
- अनिल मिश्र (होमियोपैथ डॉक्टर, अयोध्या)
- कामेश्वर चौपाल (अनुसूचित जाति के सदस्य, पटना)
- इनके अलावा ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य बहुमत से दो प्रमुख लोगों का चयन करेंगे जो हिंदू धर्म के मानने वाले होंगे.
- केंद्र सरकार भी बोर्ड में अपना एक प्रतिनिधि रखेगी जो आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी होंगे और उनका दर्जा ज्वॉयंट सेक्रेटरी से कम नहीं होगा. केंद्र के ये प्रतिनिधि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य होंगे.
- ट्रस्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के भी दो प्रतिनिधि होंगे. पहला राज्य सरकार के सचिव या उससे ऊपर के स्तर के एक आईएएस अधिकारी और दूसरे, अयोध्या के ज़िलाधिकारी इसके सदस्य होंगे.
- केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के तीनों पदाधिकारी इस ट्रस्ट के पदेन सदस्य होंगे और ये शर्त भी रखी गई है कि तीनों हिंदू धर्म को मानने वाले होंगे.
- अगर अयोध्या के ज़िलाधिकारी हिंदू नहीं हुए तो ज़िले के हिंदू एडिशनल कलेक्टर इसके पदेन सदस्य होंगे.
- राम मंदिर परिसर के विकास और प्रशासन से जुड़े मामलों की कमेटी के चेयरमैन की नियुक्ति ट्रस्ट करेगा जो न्यास का एक पदेन सदस्य भी होगा.
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ट्रस्ट के सदस्यों को कितना जानते हैं आप?
के. परासरन
रामलला विराजमान की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील के. परासरन ने पैरवी की थी. इस समय वो 93 वर्ष हैं और अपनी युवा टीम के साथ सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम की पैरवी कर रहे थे.
9 अक्तूबर 1927 को तमिलनाडु के श्रीरंगम में पैदा हुए परासरन तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल रहने के अलावा भारत के अटॉर्नी जनरल भी रहे हैं.
इसके अलावा वो साल 2012 से 2018 के बीच राज्यसभा के सदस्य भी रहे हैं. परासरन को पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित किया जा चुका है.
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दीनेंद्र दास
निर्मोही अखाड़ा की अयोध्या बैठक के प्रमुख महंत दीनेंद्र दास बाबरी मस्जिद विवाद के पक्षकार रहे हैं.
महंत दीनेंद्र दास सीधे इस बात के पक्ष में रहे हैं कि विश्व हिन्दू परिषद को मंदिर निर्माण के नाम पर इकट्ठा किए गए ईंट, शिलाएं और नकदी सरकार को सौंप देनी चाहिए.
विमलेंद्र मोहन मिश्र
अयोध्या के पूर्व राजपरिवार के सदस्य विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र अयोध्या आने वाले कोरियाई राजवंश वंश के लोगों की मेहमाननवाज़ी करते रहे हैं.
विमलेंद्र मोहन मिश्र बसपा से चुनाव भी लड़ चुके हैं. हालांकि अब वे सक्रिय राजनीति से दूर हैं.
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कामेश्वर चौपाल
ट्रस्ट के दलित सदस्य के तौर पर नामित किए गए कामेश्वर चौपाल के बारे में कहा जाता है कि 1989 में उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुए एक शिलान्यास कार्यक्रम में बुनियाद रखी थी.
कामेश्वर चौपाल भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर बिहार के रोसड़ा और सुपौल लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ संघ ने उन्हें पहले कारसेवक का दर्जा दिया था.
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डॉक्टर अनिल मिश्र
पेशे से होमियोपैथी डॉक्टर अनिल मिश्र फिलहाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अवध प्रांत के कार्यवाह हैं.
मूल रूप से आंबेडकरनगर के रहने वाले डॉक्टर मिश्र के बारे में ये कहा जाता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनका जुड़ाव चार दशकों से भी ज़्यादा समय का है.
राम जन्म भूमि आंदोलन के समय वो काफी सक्रिय थे.
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