अयोध्या में मंदिर के लिए श्रीराम जन्मभूमि न्यास के पास कितनी रकम?

अयोध्या में राम मंदिर के लिए लगी दान पेटी

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इमेज कैप्शन, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि न्यास की कार्यशाला में लगी दान पेटी
    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, केंद्र सरकार ने अयोध्या में मंदिर के निर्माण के लिए पंद्रह सदस्यीय एक ट्रस्ट के गठन की घोषणा कर दी है और कहा जा रहा है कि मंदिर का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू हो जाएगा.

ये सवाल स्वाभाविक है कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संस्था विश्व हिंदू परिषद से जुड़े राम जन्मभूमि न्यास के पास कितना पैसा जमा है?

ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब हर कोई जानना चाहता है लेकिन आसानी से जवाब नहीं मिलता.

राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व करती रही विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के उद्देश्य से साल 1985 में 'श्रीराम जन्मभूमि न्यास' की स्थापना की थी.

श्रीराम जन्मभूमि न्यास ही मंदिर के लिए मिलने वाले चंदे का प्रबंधन देखता रहा है.

अयोध्या में राम मंदिर के लिए लगी दान पेटी

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बीबीसी हिंदी को पता चला है कि श्रीराम जन्मभूमि न्यास के पास अपने कॉर्पस फ़ंड में करीब साढ़े आठ करोड़ रुपए और नॉन कॉर्पस फ़ंड में लगभग साढ़े चार करोड़ रुपए हैं.

बीबीसी को मिली विश्वसनीय जानकारी के मुताबिक श्रीराम जन्मभूमि न्यास को वित्त वर्ष 2018-19 में तकरीबन 45 लाख रुपए का चंदा मिला था जबकि इससे पिछले वर्ष इस संस्था को चंदे में लगभग डेढ़ करोड़ रुपए मिले थे.

मगर दिलचस्प बात है कि साल 1990 में विश्व हिंदू परिषद ने एक प्रेस नोट जारी करके बताया था कि उसे साल 1989 के आंदोलन के दौरान राम मंदिर के लिए 8 करोड़ 29 लाख रुपए का चंदा मिला था जिसमें से उसने 1 करोड़ 63 लाख रुपए ख़र्च कर दिए थे. ये ख़बर संडे ऑब्ज़र्वर अख़बार में छपी थी.

हाल ही में जारी एक प्रेस रिलीज़ में विश्व हिंदू परिषद ने कहा है कि वो राम मंदिर के निर्माण के लिए कोई चंदा इकट्ठा नहीं करती है और न ही चंदे की कोई अपील की है.

विश्व हिंदू परिषद के इस बयान का क्या अर्थ लगाया जाए? अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि न्यास की कार्यशाला में अभी भी राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा लिया जा रहा है.

बीबीसी ने जब इस बारे में विश्व हिंदू परिषद से प्रश्न किया तो ईमेल के ज़रिए वीएचपी के महासचिव मिलिंद परांडे ने बताया, "श्री राम जन्मभूमि न्यास ने 1989-90 के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए, न तो धनसंग्रह के लिए पब्लिक अपील की है, न तो उस तरह से धनसंग्रह किया है."

उन्होंने बताया, "श्रीराम जन्मभूमि न्यास के संग्रह किये हुए धन का व्यय उस न्यास के ध्येय उद्देश्यों के अनुसार ही हुआ है. जो धन समाज ने स्वयं न्यास को लाकर दिया है उसे स्वीकार किया गया है."

संडे ऑबज़र्वर
इमेज कैप्शन, 11 मार्च 1990 को संडे ऑब्ज़र्वर में प्रकाशित रिपोर्ट में विश्व हिंदू परिषद की प्रेस रिलीज़ का ज़िक्र है

क्या श्रीराम जन्मभूमि न्यास के पास राम मंदिर के लिए जुटाए गए फंड में सिर्फ़ साढ़े आठ करोड़ रुपए ही हैं?

इस प्रश्न पर वीएचपी के प्रवक्ता विनोद बंसल का कहना था कि इस बारे में न्यास के ट्रस्टी चंपतराय ही जवाब दे सकते हैं.

चंपतराय ने बीबीसी से कहा कि "न्यास अपना हिसाब सार्वजनिक नहीं करती है."

वीएचपी नेता चंपतराय ने बीबीसी से विशेष बातचीत में कहा कि न्यास ने अब तक राम मंदिर के निर्माण पर 10 से 15 करोड़ रुपए ख़र्च कर दिए हैं.

साल 1989 का आंदोलन और चंदा

'सवा रुपैया दे दे रे भैया राम शिला के नाम का, राम के घर में लग जाएगा पत्थर तेरे नाम का.'

अस्सी के दशक के अंतिम सालों में वीएचपी नेता अशोक सिंघल की अगुवाई में राम मंदिर आंदोलन चरम पर था और गीत के रूप में मंदिर के लिए दान देने की विश्व हिंदू परिषद की ये अपील घर-घर पहुँच रही थी.

वीएचपी ने हिंदुओं से कहा था कि जब अयोध्या में राम मंदिर बनेगा, तब ये राम शिलाएँ लगेंगी और दान का ये पैसा काम आएगा.

चंपतराय
इमेज कैप्शन, बीबीसी से विशेष बातचीत में श्रीराम जन्मभूमि न्यास के ट्रस्टी चंपतराय ने बताया कि वो हर साल ट्रस्ट की ओर से आयकर रिटर्न दायर करते हैं

इस प्रश्न पर विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष और श्रीराम जन्मभूमि न्यास के ट्रस्टी चंपत राय ने बीबीसी से कहा, "कोई संस्था अपना हिसाब-किताब सार्वजनिक नहीं करती है, वो हिसाब सरकार को दे देती है."

श्रीराम जन्मभूमि न्यास को आयकर क़ानून की धारा 12-ए के तहत आयकर में छूट हासिल है. दस्तावेज़ों के मुताबिक यह संस्था 'ग़रीबों के कल्याण' के उद्देश्य से पंजीकृत है.

न्यास की इनकम टैक्स रिटर्न दिखाते हुए चंपतराय कहते हैं, "हमारे पास 11 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति है, जिसमें अयोध्या मंदिर निर्माण से जुड़ी सभी चीज़ें शामिल हैं. पत्थर काटने की मशीनें भी इसमें शामिल हैं."

चंपतराय कहते हैं, "हमने मंदिर के लिए एक ही बार साल 1989 में देश भर से पैसा इकट्ठा किया है. हम हर व्यक्ति से सवा रुपए, परिवार से पांच रुपए और अधिकतम दस रुपए लिया करते थे. इस देश के अंदर एक भी व्यक्ति नहीं है जो ये दावा कर सके कि उसने एक लाख या उससे अधिक रुपए न्यास को दिए."

चंपतराय कहते हैं कि वीएचपी ने साल 1989 के बाद कभी भी बाज़ार में जाकर राम मंदिर के नाम पर धन संग्रह नहीं किया.

मंदिर के नाम पर आईं ईंटें

वो कहते हैं, "जो भी दान देता है, अयोध्या में हमारी कार्यशाला में आकर अपनी इच्छा से देता है. हम किसी से किसी भी रूप में चंदा नहीं मांगते हैं. हमारे चंदे में कोई डॉलर या यूरो नहीं है, हमने विदेशी मुद्रा का धन नहीं लिया है, जो भी धन है, भारतीयों ने ही दिया है."

क्या राम मंदिर के नाम पर जुटाए गए पैसों को वीएचपी सरकार की ओर से बनने जा रहे ट्रस्ट को देगी?

इस सवाल पर चंपतराय कहते हैं, "हम पैसा क्यों देंगे? हम देंगे मंदिर के लिए, पत्थर ख़रीदेंगे, पत्थर की नक़्क़ाशी करेंगे और फिर मंदिर के लिए देंगे."

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनने जा रहे नए ट्रस्ट का नाम बुधवार को घोषित कर दिया गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र नाम के इस ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य होंगे जिनमें एक दलित सदस्य भी होंगे.

क्या श्रीराम जन्मभूमि न्यास के पास जो पैसा है, वो मंदिर बनाने के लिए काफ़ी है?

इस सवाल पर चंपतराय कहते हैं कि "भव्य मंदिर के लिए पैसा जनता देगी. चंपतराय ये भी कहते हैं कि वो चाहते हैं कि श्रीराम जन्मभूमि न्यास को नए बनने जा रहे ट्रस्ट में शामिल किया जाए".

कैसा होगा राम मंदिर?

चंपतराय कहते हैं कि श्रीराम जन्मभूमि न्यास चाहता है कि मंदिर का जो मॉडल उसने पेश किया है, उसी के आधार पर भव्य राम मंदिर बने.

वो कहते हैं, "देश के लाखों घरों में इस मॉडल की तस्वीरें हैं. ये स्वीकार्य मॉडल है और हम चाहते हैं मंदिर इसी आधार पर बनें. हमने मंदिर के लिए ज़रूरी 60 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है. बाकी काम जारी है."

अयोध्या में कार्यशाला

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि न्यास की कार्यशाला में पत्थर तराशे जाते हैं.

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सितंबर 1990 में अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद ने अपनी कार्यशाला शुरू की थी. यहाँ तब से मंदिर के लिए पत्थर तराशे जाने का काम लगातार जारी है.

इसी कार्यशाला में न्यास की ओर से प्रस्तावित मंदिर का एक भी मॉडल रखा है. उसके आगे एक दान पेटी भी रखी है. लोग अपनी इच्छा से इस दान पेटी में राम मंदिर के लिए दान करते हैं.

इसी पेटी के पास एक लकड़ी की मेज़ और प्लास्टिक की कुर्सी पर आरएसएस के स्वयंसेवक स्वदेश कुमार न्यास की रसीद बुक लेकर बैठते हैं.

पचास रुपए से अधिक के चंदे की वो रसीद काटकर देते हैं. ये रसीद श्रीराम जन्मभूमि न्यास की ही है.

यही वो पैसा है जो आधिकारिक तौर पर राम मंदिर के निर्माण के लिए न्यास इकट्ठा करता है.

स्वदेश कुमार कहते हैं, "एक-एक पैसा जो हम लेते हैं, उसका हमारे पास पक्का हिसाब है."

राम मंदिर के लिए आईं ईंटें

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ये पूछने पर कि यहां औसतन कितना पैसा आ जाता है, स्वदेश कुमार कहते हैं, "यहाँ प्रति महीना एक लाख से लेकर पाँच से सात लाख रुपए तक चंदा आ जाता है. सारा पैसा और हिसाब दिल्ली चला जाता है. ये एक-एक पैसा राम के नाम का है और उसी मंदिर में लगेगा."

जिस दौरान हम स्वदेश कुमार से बात कर रहे थे, भक्तों की टोलियां मंदिर के मॉडल के दर्शन के लिए आ रहीं थीं और मंदिर निर्माण फंड के लिए दान भी कर रहीं थीं. स्वदेश कुमार दान की पर्ची के साथ मंदिर के मॉडल का एक पोस्टर भी भक्तों को दे रहे थे. कई भक्त राम मंदिर के लिए गुप्त दान भी कर रहे थे.

हालाँकि स्वदेश कुमार ने इस हिसाब का विस्तृत ब्यौरा हमें नहीं दिया. उन्होंने कहा, "ये हिसाब आपको ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास या वीएचपी नेता चंपतराय ही दे सकते हैं."

भक्तों में अपार श्रद्धा

राम मंदिर कार्यशाला में आए श्रद्धालु
इमेज कैप्शन, आंध्र प्रदेश से आया श्रद्धालुओं का एक दल

आंध्र प्रदेश से आए एक जत्थे में शामिल एम नरेंद्र नाथ 501 रुपए की पर्ची कटाते हुए कहते हैं, 'मैं श्रीराम मंदिर के लिए अपना धन और जीवन दोनों समर्पित करना चाहता हूँ."

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए वे बेहद उत्साहित हैं. उनके साथ जत्थे में आए सभी लोगों ने दान किया और पर्चियां कटवाईं.

हरियाणा के जगाधरी से आए कमलेश गोयल ने 51 रुपए का दान देकर रसीद कटवाई. उन्हें अटूट विश्वास है कि ये पैसा मंदिर निर्माण में लगेगा. स्वदेश कुमार कमलेश गोयल से कहते हैं, "मंदिर इसी दान के पैसे से बनेगा."

इसी दौरान दिल्ली से आए महिलाओं के जत्थे ने भी राम मंदिर के लिए दान दिया. इनमें से कुछ ने बिना रसीद कटवाए गुप्त दान भी किया.

मंदिर के मॉडल के दर्शन करते वक़्त इनमें से कई महिलाओं की आँखों में आंसू थे. ये महिलाएँ बीते दस सालों से हर साल अयोध्या आती हैं और मंदिर के लिए न्यास में दान करती हैं.

भक्त महिलाएं

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वो एक सुर में कहती हैं, "हम दस साल से यहाँ दान कर रहे हैं. हमें अटूट विश्वास है कि भगवान राम का मंदिर बनेगा और हमारे दान का पैसा उसमें लगेगा. ये राम जन्मभूमि है, राम की धरती है, यहाँ छल नहीं होगा."

जत्थे में शामिल वेदवती जय श्रीराम का नारा लगाते हुए कहती हैं, "मंदिर के नाम पर आई पाई-पाई मंदिर में लगेगी. इतने वर्षों से राम मंदिर के लिए पैसा इकट्ठा हो रहा है, ईंट-पत्थर जमा हो रहे हैं. अमीर तो अमीर, यहाँ आकर गरीब भी दान करते हैं."

मॉरीशस से आए अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं के एक दल में शामिल लोग कार्यशाला में दान देने और अपने नाम का पत्थर लगवाने के लिए उत्साहित थे. इन सभी ने भी मंदिर निर्माण के लिए दान दिया और आगे भी पैसा भेजने की इच्छा ज़ाहिर की. लेकिन विश्व हिंदू परिषद श्रीराम जन्मभूमि न्यास के लिए ऑनलाइन या डिजिटल स्वरूप में अभी चंदा स्वीकार नहीं करती है.

महंत नृत्य गोपाल दास

'चंदे के सवाल पर चुप्पी'

राम मंदिर के लिए आने वाले चंदे के बारे सवाल पर श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास कहते हैं, "कितना पैसा आया, कितना नहीं आया, हमें नहीं मालूम, हमें ना पैसा लेना है ना देना है, हिसाब क्या लेना है. पैसे का हिसाब कारसेवकपुरम वाले ही रखते हैं. मेरा पैसे से कोई मतलब नहीं हैं."

महंत नृत्य गोपाल दास कहते हैं, "मेरे पास मंदिर का एक पैसा नहीं है, ना लेना है ना देना है, हमें मगन रहना है. हमें पैसों से मतलब नहीं है. मंदिर जनता और धर्माचार्यों के सहयोग से बनेगा."

बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले के गवाह और राम मंदिर आंदोलन पर रिपोर्टिंग करते रहे वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं कि वीएचपी के नेताओं से जब भी राम मंदिर के लिए आने वाले चंदे के बारे में पूछा गया उन्होंने कभी जवाब नहीं दिया."

शरत प्रधान कहते हैं, "मैंने स्वयं कई बार राम मंदिर के लिए आने वाले चंदे के बारे में सवाल किया है लेकिन कभी जवाब नहीं मिला. वीएचपी के कुछ नेता कई बार कुछ आँकड़ा बता देते हैं लेकिन उसका कोई आधार नहीं होता है."

शरत प्रधान कहते हैं, "अशोक सिंघल और प्रवीण तोगड़िया जब ज़ोर-शोर से राम मंदिर आंदोलन चला रहे थे, उस दौरान जब भी उनसे चंदे के बारे में पूछा गया, उन्होंने नाराज़गी ही ज़ाहिर की. अब विश्व हिंदू परिषद को अपने खातों के बारे में जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए. पारदर्शिता तो यही होती है."

अयोध्या में मंदिर का मॉडल देखते भक्त

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हाल के सालों में निर्मोही अखाड़े और हिंदू महासभा से जुड़े नेताओं ने श्रीराम जन्मभूमि न्यास को मिलने वाले चंदे पर सवाल उठाए हैं और जाँच की माँग की है.

इस पर चंपतराय कहते हैं, "जिन लोगों को शिकायत है, उन्हें आयकर विभाग में शिकायत करनी चाहिए और जाँच की माँग करनी चाहिए. जो लोग हमसे हिसाब-किताब मांग रहे हैं, ये पैसा उनका नहीं है, ये राम का पैसा है."

चंपतराय कहते हैं, "शिकायत तब करनी चाहिए थी जब सोनिया गांधी राज कर रहीं थीं, तब वो हमारे ख़िलाफ़ एक जांच बिठा सकती थीं. आज करने का कोई फ़ायदा नहीं है."

चंपत राय कहते हैं कि श्रीराम जन्मभूमि न्यास को मिलने वाली पाई-पाई का हिसाब आयकर विभाग को दिया गया है.

वो कहते हैं, "साल 1985 में न्यास बना, धन संग्रह हुआ साल 1989 से, तब से 30 साल हो चुके हैं. इन 30 सालों में हम तीस ऑडिट रिपोर्ट सरकार को भेज चुके हैं. सरकारें जिसकी भी रही हों, कभी भी एक रुपए का दंड भी हमें नहीं लगा. न ही हमने अपनी आयकर रिटर्न भरने में कभी विलंब किया. अगर हम ग़लत होते तो हमारे ख़िलाफ़ जांच हुई होती."

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