अयोध्या मामले में कौन थे भगवान राम के 'दोस्त'

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- Author, सौतिक बिस्वास
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
वो शख़्स जिसने भारत के सबसे विवादित मामले में जीत हासिल करने में हिंदु देवता भगवान राम की मदद की.
एक दशक से भी ज़्यादा समय तक वो अदालत में बैठे और हिंदू भगवान का पक्ष रखा.
अदालत के कागज़ों में त्रिलोकी नाथ पांडे शिशु भगवान राम के 'दोस्त' थे और उनका प्रतिनिधित्व कर रहे थे क्योंकि शिशु राम अपना पक्ष रखने में सक्षम नहीं थे.
राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में शिशु राम एक पक्षकार थे और अब इस विवादित ज़मीन को उन्हें देने का फ़ैसला सुनाया गया है.
75 साल के त्रिलोकी नाथ पांडे ने मुझसे हाल में कहा था, ''भगवान का प्रतिनिधित्व करना एक महान काम है. इस काम के लिए लाखों हिंदुओं में से मुझे चुना जाना मेरे लिए गर्व और खुशी की बात है.''

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कैसे बने भगवान के दोस्त
भारतीय क़ानून में दशकों से देवता या एक प्रतिमा को एक 'व्यक्ति' माना जाता रहा है जिसके किसी इंसान की तरह ही अधिकार और कर्तव्य हैं जैसे की किसी कंपनी को 'व्यक्ति' माना जाता है.
इसकी वजह है कि कई श्रद्धालु धार्मिक स्थलों पर बनी प्रतिमा को अपनी ज़मीन या संपत्ति दान करते हैं. वो एक तरह से देवता की संपत्ति मानी जाती है और धार्मिक स्थल या ट्रस्ट का कोई श्रद्धालु या प्रबंधक उसे संभालता है.
इस तरह क़ानूनी नज़रिए से भगवान राम या उनकी प्रतिमा का उनके एक दोस्त ने प्रतिनिधित्व किया.
लेकिन भगवान का सबसे अच्छा दोस्त किसे कहा जा सकता है? और आप ये कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि वो शख़्स भगवान के हित में काम कर रहा है या नहीं?
ये ज़रा मुश्किल मामले हैं जिन्हें कानून में कभी भी वैधानिक रूप से परिभाषित नहीं किया गया है. इन पर अलग-अलग मामले को देखते हुए फ़ैसला लिया जाता है.
लेकिन, जब तक कोई अन्य व्यक्ति भगवान का ''सबसे अच्छा दोस्त'' होने का दावा नहीं करता तब तक कोई विवाद नहीं होता. दूसरे शब्दों में कहें तो भगवान को एक दोस्त रखने का अधिकार दिया गया है.
1992 में अयोध्या में 16वीं सदी में बनी बाबरी मस्जिद को ढहा दिया गया था. इसके बाद भारत के कई हिस्सों में दंगे फैल गए थे.
कई हिंदुओं का मानना है कि जिस जगह पर मस्जिद बनी है वहीं पर भगवान राम का जन्म हुआ था. वो लोग उस जगह पर मंदिर बनाना चाहते हैं.
शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से उनकी ये इच्छा पूरी हो गई और कोर्ट ने मुस्लिमों को मस्जिद बनाने के लिए किसी और जगह पर ज़मीन देने का आदेश दे दिया.

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क्या था भगवान राम की याचिका में
त्रिलोकी नाथ पांडे ने ऐसे देवता का पक्ष रखा जिनका लाखों हिंदू उनकी न्यायप्रियता और उदारता के लिए सम्मान करते हैं.
भगवान राम एक पौराणिक महाकाव्य, रामायण के नायक हैं और वो कई हिंदुओं के लिए त्याग और वीरता के प्रतीक हैं.
अदालत में भगवान राम की याचिकाएं कुछ हिंदू समूहों द्वारा समर्थित थीं और कुछ प्रमुख वकीलों ने इसे सावधानीपूर्वक लिखा व पेश किया था. इनमें पूजा, देवत्व, अवतार और परमात्मा की आत्माओं के बारे में बात की गई थी.
याचिका में कहा गया था कि विवादित जगह पर भगवान राम का जन्म हुआ था और इसे एक विश्वसनीय प्रधारिकरण के सार्वजनिक रिकॉर्ड्स में प्रमाणित किया गया है.
याचिका ये भी कहती है कि भगवान की आत्मा को ''वहां आने वाले भक्त महसूस कर सकते हैं.''
एक याचिका कहती है, ''वो आत्मा भगवान की है.''
त्रिलोकी नाथ पांडे के माध्यम से भगवान राम ने अयोध्या पर अपना मालिकाना हक़ जताया.
शनिवार को न्यायाधीशों ने ये भी निष्कर्ष दिया कि हिंदुओं की ये आस्था है कि वो जगह राम का ही जन्मस्थान है.
ऊंचे कद वाले त्रिलोकी नाथ पांडे 1989 के बाद से अब तक इस मामले में भगवान राम के तीसरे दोस्त हैं. पहले दो 'दोस्त' अब दुनिया में नहीं हैं. उनमें से एक हाई कोर्ट के जज थे और दूसरे यूनिवर्सिटी के सेवानिवृत्त लेक्चरर थे.

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आरएसएस से संबंध
त्रिलोकी नाथ पांडे उत्तर प्रदेश में एक किसान परिवार से हैं. वो चार भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं. उन्होंने स्थानीय स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई की है. बाद में शिक्षक का प्रशिक्षण लिया है लेकिन, उन्होंने कभी नौकरी नहीं की.
स्कूल के दौरान ही वह स्वयंसेवक संघ जुड़े और बाद में विश्व हिंदू परिषद के लिए काम करने लगे. विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की बाबरी मस्जिद ढहाने के मामले में प्रमुख रही है.
राजनीतिक विज्ञानी मंजरी काटजू ने इस समूह को "आरएसएस की कट्टर और उग्र शाखा" माना है.
वीएचपी में रहते हुए वह हिंदुओं को जागरूक करने के लिए उत्तर प्रदेश में कई जगह घूमे.
पांडे कहते हैं, ''हम ऐसी जगहों पर जाते थे जहां से हिंदुओं का बड़ी संख्या में इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराने की ख़बरें आती थीं और हम इसे रोकने की कोशिश करते थे. मुझे लगता है कि हिंदू समाज ख़त्म होता जा रहा है. हिंदू गर्व को बढ़ाने के लिए हमें बचाव करने की नहीं बल्कि आक्रामक होने की ज़रूरत है.''

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मस्जिद ढहाने के मामले में मदद
जब बाबरी मस्जिद गिराए गई थी तो त्रिलोकी नाथ पांडे ने भी इस मामले में 49 अभियुक्तों के लिए क़ानूनी मदद जुटाने की कोशिश की थी.
उन्होंने इस मामले की स्वतंत्र जांच में कई हिंदू महंतो को उनका बचाव करने में मदद की (एक जांच को पूरा होने में 17 साल लगे और आपराधिक मामले अदालतों में अब भी लंबित हैं.)
त्रिलोकी नाथ पांडे को गठिया की समस्या है. वह सुप्रीम कोर्ट में 40 दिनों की मैराथन सुनवाई के दौरान कुर्सी पर बैठे रहते थे.
वह कहते हैं, ''मैं पिछले 10 सालों में सैकड़ों बार अदालत में गया. मैं वहां ज़्यादा बात नहीं करता था. मेरी ओर से वक़ील बात करते थे. मैं वहां भगवान का प्रतीक था.'' वह भगवान की ओर से दस्तावेज़ों पर भी साइन करते थे.
त्रिलोकी नाथ पांडे अयोध्या में बड़े से विहिप परिसर के एक कमरे में रहते हैं, जहां संगठन के अन्य सदस्य मस्जिद ढहाने के बाद से मंदिर निर्माण का इंतज़ार कर रहे हैं.
फ़ैसले के बाद वह अब भगवान के "दोस्त" नहीं रहेंगे लेकिन उन्हें इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.
वह कहते हैं, "मैं हमेशा भगवान राम के साथ हूं. जब मैं उनके साथ होता हूं, तो डरने की क्या बात है? भगवान को सही साबित कर दिया गया है."
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