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लखनऊ विश्वविद्यालयः लॉर्ड कैनिंग की याद में बने कॉलेज से यूनिवर्सिटी तक
- Author, मुकुल श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
लखनऊ यूनिवर्सिटी 25 नवंबर को अपनी स्थापना के 100वें साल में प्रवेश कर गया. पिछले 99 साल में लखनऊ यूनिवर्सिटी ने कई पड़ाव पार किए हैं.
अपनी स्थापना से लेकर अब तक ये विश्वविद्यालय कई बदलावों का गवाह रहा है.
एक अंग्रेज गवर्नर की याद में इसकी नींव पड़ी. अंग्रेजी हुकूमत के विरोध का बिगुल भी यहाँ से फूंका गया.
बीरबल साहनी जैसे वैज्ञानिक यहाँ के शिक्षक रहे तो डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा जैसे राजनीतिज्ञों ने पढ़ाई के साथ-साथ राजनीति का ककहरा भी यहीं से सीखा.
कभी बुलंदी तो कभी अराजकता के स्थल का दाग़ भी लखनऊ विश्वविद्याल के माथे पर लगा.
इन उतार-चढ़ाव, आर्थिक चुनौती और संसाधनों के अभाव के बावजूद लखनऊ विश्वविद्यालय ने देश मे अपना एक अलग स्थान बना रखा है.
प्रदेश सरकार के अधीन
उत्तर प्रदेश की राजधानी में स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय इस समय प्रदेश का सबसे पुराना राज्य विश्वविद्यालय है.
लखनऊ विश्वविद्यालय से पहले इलाहाबाद और अलीगढ़ विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी लेकिन इस समय उन्हें सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल चुका है.
एकेडमिक्स के मामले में स्वायत्तता रखने वाला लखनऊ विश्वविद्यालय बाक़ी मामलों के लिए पूरी तरह से प्रदेश सरकार के अधीन है.
इसके बावजूद लखनऊ विश्वविद्यालय का सरकारी अनुदान पिछले 25 साल से फ्रीज (रुका हुआ) है.
इसलिए सरकार हर साल इसे अनुदान के रूप में सिर्फ़ 34 करोड़ रुपये की एकमुश्त राशि ही देती है.
विशेष दर्जा देने की मांग
लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने यूनिवर्सिटी को विशेष दर्जा दिलाने के लिए अभियान छेड़ रखा है.
शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉक्टर नीरज जैन कहते हैं, "इसके लिए मुख्यमंत्री के साथ ही सांसद और अन्य पदाधिकारियों से मुलाकात की जा रही है. उनसे मदद की मांग की गई है."
"सौ साल का इतिहास रखने वाले देश में इस समय चुने हुए संस्थान ही हैं. इसलिए इसे अगर सेंट्रल यूनिवर्सिटी नहीं बनाया जा रहा है तो फिर विशेष विश्वविद्यालय का दर्जा जरूर मिलना चाहिए."
कैनिंग कॉलेज से यूनिवर्सिटी तक
लखनऊ विश्वविद्यालय की शुरुआत कैनिंग कॉलेज के रूप में हुई थी.
एक मई 1864 को हुसैनाबाद में हुसैनाबाद कोठी में शुरू होने के बाद ये शहर के विभिन्न स्थानों से होते हुए वर्तमान परिसर तक पहुंचा.
इसी कैनिंग कॉलेज को 25 नवंबर 1920 को विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया और 1921 में यहां पढ़ाई की शुरुआत हो गई.
कॉलेज को यूनिवर्सिटी का दर्जा देने के लिए लखनऊ मेडिकल कॉलेज को इससे संबद्ध किया गया जबकि 1870 से शुरू हुए आईटी गर्ल्स कॉलेज को इसका पहला एसोसिएट कॉलेज बनाया गया.
कैनिंग कॉलेज की शुरुआत ताल्लुकेदार्स ने कर के रूप में वसूली गई धनराशि में से आधा फीसदी चंदा देकर की थी.
ताल्लुकेदार्स के प्रस्ताव पर अंग्रेजी हुकूमत ने भी इसके बराबर राशि देने पर सहमति जताई.
वर्ष 1921 में लखनऊ यूनिवर्सिटी की स्थापना के समय भी इसके लिए चंदा दिया गया.
चंदे की ये रकम 30 लाख रुपये के बराबर थी. उससे इस विश्वविद्यालय की शुरुआत की गई.
राजा महमूदाबाद का योगदान
लखनऊ में विश्वविद्यालय स्थापित करने का शुरुआती श्रेय राजा महमूदाबाद सर मोहम्मद अली मोहम्मद खान को जाता है.
उन्होंने उस समय के मशहूर अंग्रेजी अखबार 'द पायनियर' में लखनऊ में एक विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए लेख लिखा था.
संयुक्त प्रांत के लेफ़्टिनेंट गवर्नर सर हरकोर्ट बटलर ने जब कार्यभार संभाला तो राजा महमूदाबाद के इस विचार ने आगे बढ़ना शुरू किया.
लेफ़्टिनेंट गवर्नर सर हरकोर्ट बटलर की वजह से लखनऊ में विश्वविद्यालय स्थापित करने के काम में तेजी आई.
10 नवंबर 1919 को गवर्नमेंट हाउस में हुई शिक्षाविदों की बैठक में विश्वविद्यालय की स्थापना की प्रस्तावित योजना की रूपरेखा तैयार हुई.
इस मसौदे को 12 अगस्त 1920 को विधान परिषद में पेश किया गया और कुछ संशोधनों के बाद आठ अक्तूबर 1920 को परिषद से यह पास हो गया.
इस विधेयक पर एक नवंबर को लेफ़्टिनेंट गवर्नर सर हरकोर्ट बटलर तथा 25 नवंबर को गवर्नर जनरल ने हस्ताक्षर किए. इसके साथ ही लखनऊ विश्वविद्यालय अस्तित्व में आ गया.
दो लाख स्टूडेंट्स
लखनऊ यूनिवर्सिटी इस लिहाज़ से भी अन्य विश्वविद्यालयों से अलग थी कि उस समय तक ज्यादातर विश्वविद्यालयों की स्थापना संबद्धता देने वाले विश्वविद्यालयों के रूप में हुई थी. लखनऊ विश्वविद्यालय की स्थापना आवासीय विश्वविद्यालय के रूप में की गई.
इलाहाबाद विश्वविद्यालय भी वर्ष 1887 को अपनी स्थापना के 33 साल बाद वर्ष 1920 में आवासीय विश्वविद्यालय बनाया गया.
लखनऊ यूनिवर्सिटी की शुरुआत आवासीय विश्वविद्यालय के रूप में की गई लेकिन आज विश्वविद्यालय से 178 कॉलेज सहयुक्त हो चुके हैं.
लखनऊ में दो अन्य राज्य विश्वविद्यालय होने के बावजूद इस आवासीय विश्वविद्यालय से इतनी ज्यादा संख्या में कॉलेज सहयुक्त होने की वजह से काफी समस्या खड़ी हो रही हैं.
यूनिवर्सिटी कैंपस और एफलिएटेड कॉलेजों में छात्रों की संख्या दो लाख के करीब हो चुकी है.
इस वजह से शैक्षिक गुणवत्ता और संसाधनों के विकास के बजाय लखनऊ यूनिवर्सिटी का शक्ति इनकी परीक्षा और प्रैक्टिकल कराने में ही खर्च हो जाती है.
यूजीसी ने बंद की 100 के संस्थानों को 100 करोड़ रुपये देने की योजना
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) पिछले कुछ साल तक 100 साल पूरे करने वाले विश्वविद्यालयों को 100 करोड़ रुपये की एकमुश्त सहायता राशि देता था.
12वीं योजना में यूजीसी ने ये योजना बंद कर दी है.
लखनऊ विश्वविद्यालय सौ साल पूरे कर चुका है, लेकिन इस योजना के बंद होने की वजह से यहां भी उसे मदद की आस नहीं बची है.
भारत के सौ साल के विश्वविद्यालय
· कोलकाता, मद्रास और बंबई विश्वविद्यालय स्थापना वर्ष :1857
· इलाहाबाद विश्वविद्यालय स्थापना वर्ष :1887
· बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और मैसूर स्थापना वर्ष :1916
· पटना विश्वविद्यालय स्थापना वर्ष :1917
· अलीगढ़ विश्वविद्यालय स्थापना वर्ष :1920
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