BHU: RSS का झंडा उतरवाने पर प्रॉक्टर के ख़िलाफ़ केस

    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, लखनऊ से

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू के मिर्ज़ापुर स्थित दक्षिण परिसर में आरएसएस के झंडे के कथित अपमान के मामले में डिप्टी चीफ़ प्रॉक्टर के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है.

इस बीच, डिप्टी चीफ़ प्रॉक्टर किरण दामले, जिन पर ये आरोप लगे हैं उन्होंने डिप्टी चीफ़ प्रॉक्टर पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

मिर्ज़ापुर के बरकछा में बीएचयू की एक शाखा है जिसे दक्षिण परिसर नाम से जाना जाता है. मंगलवार यानी 12 नवंबर को यहां कुछ छात्र आरएसएस की शाखा लगाने के बाद योग कर रहे थे. आरोप है कि उसी समय वहां पहुंचीं डिप्टी चीफ़ प्रॉक्टर किरण दामले ने आरएसएस का झंडा उतारकर फेंक दिया और शाखा लगा रहे लोगों को दोबारा ऐसा न करने की चेतावनी दी.

इसके बाद आरएसएस के ज़िला कार्यवाह चंद्रमोहन समेत तमाम छात्रों और अन्य लोगों ने किरण दामले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया, धरना दिया और नारेबाज़ी की. मंगलवार देर शाम चंद्रमोहन की तहरीर पर पुलिस ने किरण दामले के ख़िलाफ़ संघ के ध्वज का अपमान करने का मामला दर्ज कर लिया.

एहतियातन हटवाया झंडा: दामले

कोतवाली देहात के इंस्पेक्टर अभय कुमार सिंह ने इस बारे में मीडिया को जानकारी दी, "यहां पिछले सात साल से आरएसएस की शाखा लग रही है. डिप्टी चीफ़ प्रॉक्टर पर आरएसएस के चंद्रमोहन सिंह और अन्य लोगों की तहरीर पर छात्रों से गाली गलौज करने और धमकी देने के आरोपों के तहत आईपीसी की धारा 153 ए, 295 ए, 504, 505 के तहत केस दर्ज किया गया है."

वहीं अपने ख़िलाफ़ केस दर्ज होने और छात्रों के विरोध को देखते हुए किरण दामले ने डिप्टी चीफ़ प्रॉक्टर के पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

बीबीसी से बातचीत में किरण दामले ने कहा, "डिप्टी चीफ़ प्रॉक्टर की तो मेरे ऊपर अतिरिक्त ज़िम्मेदारी थी, मैं तो यहां असिस्टेंट डायरेक्टर, फ़िज़िकल एजुकेशन के पद पर पिछले दस वर्ष से कार्यरत हूं. स्टेडियम में जब मैं पहुंची तो कुछ बच्चे योग कर रहे थे. वहां ऑरेंज कलर का झंडा लगा था. मैंने पूछा कि ये किसका है तो किसी ने कोई जवाब नहीं दिया. झंडे को मैंने वहां से हटवाकर अपने पास मंगा लिया ताकि जो भी उस पर दावा करता तो मैं उसे दे देती. वहां योग कर रहे किसी भी छात्र ने झंडे के बारे में कुछ नहीं बताया. दरअसल, ऐसा मैंने एहतियातन किया क्योंकि सभी जगह धारा 144 लगी है, कहीं कोई बात हो तो ज़िम्मेदारी प्रशासन पर ही आती है."

किरण दामले कहती हैं कि उन्हें नहीं मालूम था कि ये झंडा आरएसएस की शाखा लगाने वालों का था क्योंकि स्टेडियम में ऐसा करने की किसी ने अनुमति नहीं ली थी.

वो कहती हैं, "परिसर में शाखा लगती है लेकिन स्टेडियम में नहीं लगती. हालांकि किसी भी जगह पर इसके लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है, लेकिन कुछ बच्चे लगाते हैं तो उन्हें कभी किसी ने मना भी नहीं किया. मंगलवार को भी किसी बच्चे ने कोई शिकायत नहीं की लेकिन बाद में बाहर के कुछ लोग आए और हंगामा करने लगे. मैंने तो उस वक़्त भी साफ़ तौर पर कहा था कि यदि मैंने कुछ ग़लत किया हो तो मैं माफ़ी भी मांगने को तैयार हूं लेकिन बच्चों ने मुझे ऐसा करने से रोक दिया."

किरण दामले का कहना है कि उन्होंने अपना इस्तीफ़ा इसलिए दे दिया ताकि किसी तरह का अनावश्यक विवाद न बढ़े और इसे कोई राजनीतिक रंग न दिया जाए. हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उनके इस्तीफ़े को स्वीकार करने की पुष्टि नहीं हुई है.

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सियासत भी शुरू

बरकछा स्थित बीएचयू के दक्षिण परिसर में ये घटना मंगलवार की सुबह हुई. घटना से नाराज़ छात्रों ने परिसर के प्रशासनिक भवन के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया. मामले की जानकारी होते ही वहां पुलिस भी पहुंच गई और आरएसएस के ज़िला प्रचारक और बीजेपी के नगर विधायक समेत तमाम दूसरे लोग भी पहुंच गए. छात्रों ने झंडा वापस मिलने और डिप्टी चीफ़ प्रॉक्टर पर कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही धरना समाप्त किया. बाद में उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई गई.

वहीं दक्षिण परिसर की प्रभारी प्रोफ़ेसर रमादेवी निम्नापल्ली ने मीडिया से बातचीत में कहा, "यह विश्वविद्यालय परिसर का मामला है और विश्वविद्यालय प्रशासन इससे निपटने में सक्षम है. डिप्टी चीफ प्रॉक्टर को ध्वज उतारने से पहले छात्रों से बात करनी चाहिए थी. ऐसा हुआ होता तो शायद स्थिति न बिगड़ती लेकिन उन्हें भी इस बारे में पता नहीं था. विश्वविद्यालय में तो सभी धर्म, समुदाय एवं वर्ग के छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं और उन्हें अपने धर्म के अनुसार इबादत करने की छूट है. हमारा मक़सद किसी की भी भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है. डिप्टी चीफ़ प्रॉक्टर का इस्तीफ़ा हमने बीएचयू के चीफ़ प्रॉक्टर के पास भेज दिया है. आगे की कार्रवाई उन्हीं को करनी है."

अपने ऊपर दर्ज एफ़आईआर से अनभिज्ञता जताती हुई किरण दामले ख़ुद किसी के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराने की संभावना से साफ़ इनकार करती हैं. उनका कहना है, "परिसर में शांति और सौहार्द के लिए जो मेरी ज़िम्मेदारी बनती थी, वो मैंने किया. अब आगे क्या करना है वो विश्वविद्यालय प्रशासन तय करेगा."

वहीं दक्षिण परिसर की प्रभारी इस मामले को राजनीतिक रंग न देने की भले ही अपील कर रही हों लेकिन मामले में राजनीतिक रंग घुलने लगा है.

बरकछा स्थित बीएचयू के राजीव गांधी दक्षिण परिसर में डिप्टी चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफ़े और उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने को लेकर कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने ऐतराज़ जताया है.

बुधवार को कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने परिसर प्रभारी रमादेवी निम्मनापल्ली से मुलाकात कर दर्ज मुक़दमे को हटवाने की मांग की, जबकि आरएसएस के स्वयंसेवकों ने कांग्रेसी नेताओं के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की और उनके परिसर में प्रवेश का विरोध किया.

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