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'भारत में आम लोगों के ख़र्च करने की हैसियत में गिरावट': प्रेस रिव्यू
बिजनेस स्टैंडर्ड अख़बार की ख़बर के मुताबिक बीते चार दशक में पहली बार उपभोक्ता के ख़र्च करने की सीमा में गिरावट देखी गई है.
अख़बार ने राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान (एनएसओ) के आंकड़ों के हवाले से बताया है कि 2017-18 में ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ताओं के ख़र्च करने की सीमा में 8.8 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है. जबकि शहरी इलाके में 2.2 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखी गई है.
इस ख़बर के मुताबिक प्रति घर कंज्यूमर एक्सपेंडिचर 2011-12 के 1501 रुपये से घटकर 1446 रुपया रह गया है. अख़बार के मुताबिक इससे यह जाहिर होता है कि देश में ग़रीबी बढ़ रही है.
ख़बर में यह भी बताया गया है कि एनएसओ ने ये सर्वे जुलाई 2017 से जून, 2018 के बीच किया है. हालांकि इस रिपोर्ट को 19 जून, 2019 को ही जारी किया जाना था लेकिन इसे जारी नहीं किया गया है.
महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस ने अपनी कोशिशें जारी रखी हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक शिव सेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर एक बैठक की जिसमें तीनों ही दलों ने साझा न्यूनतम कार्यक्रम बनाने पर चर्चा की. महाराष्ट्र के चुनाव परिणामों के बाद इन तीनों दलों की यह पहली बैठक थी.
इससे एक दिन पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने महाराष्ट्र में सरकार ना बनने के लिए शिव सेना को दोषी ठहराया था और कहा था कि उन्होंने चुनाव के बाद गठबंधन तोड़ दिया.
एनसीपी और कांग्रेस के साथ बैठक में शिव सेना के विधायक दल के नेता एकनाथ शिंदे शामिल हुए. उन्होंने बताया कि तीनों ही दलों ने मिलकर एक साझा कार्यक्रम का मसौदा तैयार कर दिया है, इस मसौदे को तीनों ही दलों के प्रमुखों के साथ साझा किया जाएगा.
अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि कांग्रेस और एनसीपी ने शिवसेना से इस बात पर पुष्टि की है कि वह शिक्षा में मुस्लिमों को दिए जाने वाले पांच प्रतिशत आरक्षण का विरोध नहीं करेगी. यह नीति कांग्रेस-एनसीपी ने अपनी पिछली सरकार में शुरू की थी लेकिन भाजपा-शिवसेना की सरकार ने इसे अपनी सरकार में लागू नहीं किया था.
बताया जा रहा है कि वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग पर भी इस बैठक में चर्चा हुई.
सीबीआई कर सकती है रफ़ाल सौदे की जांचः जस्टिस जोसेफ़
रफ़ाल समझौते पर सुप्रीम कोर्ट में दायर सभी पुर्नविचार याचिकाओं के ख़ारिज होने के बाद भी सीबीआई इस सौदे की जांच कर सकती है.
द हिंदू अख़बार में प्रकाशित समाचार में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में शामिल जस्टिस केएम जोसेफ़ ने कहा है कि शिकायतकर्ता की शिकायत पर सीबीआई रफ़ाल सौदे की जांच कर सकती है.
जस्टिस जोसेफ़ ने अलग विचार रखते हुए कहा कि अगर शिकायत में संज्ञेय अपराध की ओर इशारा होगा तो सीबीआई इसकी जांच कर सकती है, हालांकि इसके लिए एजेंसी को प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट की धारा 17 के तहत सरकार से स्वीकृति लेनी होगी.
उन्होंने बताया कि पुनर्विचार याचिकाओं का ख़ारिज होना और इस मामले में सीबीआई जांच करवाना दोनों अलग-अलग बातें हैं.
एयरटेल और वोडाफ़ोन को रिकॉर्ड नुकसान
देश की दो प्रमुख टेलीकॉम कंपनी एयरटेल और वोडाफ़ोन को सितंबर तिमाही में रिकॉर्ड नुकसान हुआ है.
हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित समाचार के अनुसार एजीआर की रिपोर्ट में बताया गया है कि वोडाफोन-आइडिया को इस तिमाही में 50,992 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ जबकि एक साल पहले उसे 4,874 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा था.
वहीं एयरटेल को भी पिछले 14 सालों में अब तक का सबसे ज़्यादा नुकसान उठाना पड़ा है. एयरटेल को 23,045 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. जबकि पिछले साल उसे 118 करोड़ का फ़ायदा हुआ था.
इस नुकसान की असल वजह सुप्रीम कोर्ट के उस फै़सले को बताया जा रहा है. जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने एयरटेल और वोडाफ़ोन सहित अन्य टेलीकॉम कंपनियों को आदेश दिया था कि वह सरकार के 1.4 लाख करोड़ बकाए रुपए वापस करे.
एक मुस्लिम पक्षकार का अयोध्या फ़ैसले में मिली ज़मीन लेने से इनकार
अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से मुकदमा करने वालों में शामिल एक पक्षकार जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में दी गई पांच एकड़ भूमि को लेने से इनकार कर दिया है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित इस समाचार में बताया गया है कि संगठन ने कहा है कि वह विकल्प के तौर पर दुनिया की कोई भी चीज़ चाहे वह ज़मीन हो या पैसा स्वीकार नहीं करेंगे. इसके साथ ही संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में फ़ैसले पर पुनर्विचार याचिका डालने के संबंध पर भी विचार किया.
वहीं दैनिक भास्कर में प्रकाशित समाचार में बताया गया है कि शिया वक़्फ़ बोर्ड राम मंदिर निर्माण के लिए अपनी तरफ से आर्थिक मदद करेगा. बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजवी ने कहा है कि उनका बोर्ड राम जन्मभूमि न्यास को मंदिर बनाने में सहयोग के लिए 51 हज़ार रुपए दान करेगा.
भारतीय सेना में पहली महिला जज
भारतीय सेना में पहली बार किसी महिला न्यायाधीश की नियुक्ति की गई है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया सहित कई समाचार पत्रों में इस ख़बर को प्रकाशित किया गया है.
बताया गया है लेफ्टिनेंट कर्नल ज्योति शर्मा को भारतीय सेना की महिला न्यायाधीश एडवोकेट जनरल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है.
ज्योति शर्मा सैन्य क़ानूनी विशेषज्ञ के रूप में पूर्वी अफ्ऱीकी देश सेशेल्स की सरकार को अपनी सेवाएं देंगी.
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