हैदराबाद के निज़ाम म्यूज़ियम में सोने के बर्तनों के अलावा क्या-क्या है?

सोने का कप, हैदराबाद, निज़ाम म्यूजियम, निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान

इमेज स्रोत, Nawab Najaf Ali Khan/BBC

    • Author, बल्ला सतीश/श्याम मोहन
    • पदनाम, बीबीसी तेलुगू

हैदराबाद की पुरानी हवेली के मसरत महल में मौजूद निज़ाम संग्रहालय बीते कुछ दिनों से अख़बारों की सुर्खियों में है.

हाल ही में निज़ाम संग्रहालय से सोने से बने कप-प्लेट, चम्मच और लंच बॉक्स चोरी हो गए थे.

मंगलवार को पुलिस ने इन चोरों को पकड़ लिया और चोरी किए गए बेशक़ीमती सामान भी बरामद कर लिए.

ये सारी बेशक़ीमती चीज़ें हैदराबाद के सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान से जुड़ी हुई थीं, जिन्होंने साल 1911 से लेकर 1948 तक हैदराबाद रियासत पर शासन किया था.

GETTY IMAGES

इमेज स्रोत, Getty Images

बताया जाता है कि अपने शासनकाल के दौरान निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान का नाम विश्व के कुछ सबसे अमीर लोगों में शुमार था.

इस संग्रहालय में मौजूद कलाकृतियाँ बेशक़ीमती तो हैं ही, बल्कि दक्कन सभ्यता से भी जुड़ी हुई हैं और इनका अपना ऐतिहासिक महत्व है.

निज़ाम के प्रपौत्र नजफ़ अली ख़ान ने बीबीसी से कहा कि संग्रहालय में रखी हर चीज़ और ख़ासकर चोरी की गई चीजें, जो अब बरामद कर ली गई है, उनके परदादा के दिल के काफ़ी करीब थीं.

'दो किलो वज़न का था लंच बॉक्स'

नजफ़ अली ख़ान बताते हैं कि जब्त किया गया लंच बॉक्स शुद्ध सोने का बना हुआ है और उसमें बेशकीमती हीरे और माणिक जड़े हुए हैं.

वो बताते हैं कि दो किलो वज़न का वो लंच बॉक्स निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान को किसी ने तोहफे में दिया था. हालांकि तोहफा देने वाले के बारे में अब कोई जानकारी मौजूद नहीं है.

सोने का कप, हैदराबाद, निज़ाम म्यूजियम, निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान

'रख-रखाव में लापरवाही बरती जा रही है'

नजफ़ अली ख़ान संग्रहालय में चीज़ों के रखरखाव पर असंतुष्टि जताते हुए कहते हैं, "ये बहुत दुख की बात है कि उनकी निजी और बेशकीमती संपत्ति चोरी कर ली जाती है."

वो कहते हैं कि लापरवाही की वजह से ऐसा हुआ था.

म्यूज़ियम को जाने वाली लकड़ी की सीढ़ियों के बुरे हाल का ज़िक्र करते हुए वो कहते हैं कि जिस तरीके से निज़ाम के सामान की देखरेख की जा रही है वो चिंताजनक है.

नजफ़ अली ख़ान बताते हैं कि इस समय म्यूज़ियम में सातवें निज़ाम के पहने हुए सूट, इत्र की शीशियां, उनकी जूतियां, टोपियां और झोले रखे हुए हैं.

साथ ही सोने और चांदी की बनी हुई कलाकृतियां भी रखी गई हैं, जिन्हें अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोगों ने कभी निज़ाम को तोहफ़े के रूप में दी थीं.

सोने का कप, हैदराबाद, निज़ाम म्यूजियम, निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान

इमेज स्रोत, Nawab Najaf Ali Khan/BBC

संग्रहालय में क्या-क्या?

नजफ़ अली ख़ान बताते हैं, "जब भी सातवें निज़ाम विकास का कोई काम शुरू करवाते थे तो आम लोग उन्हें चांदी से बनी हुई खुरपी भेंट किया करते थे."

"हाथी दांत से बने हैंडल वाली ऐसी ही एक खुरपी से ओस्मान सागर की नींव रखी गई थी. इस खुरपी को इस समय निज़ाम म्यूज़ियम में देखा जा सकता है."

अपने शासन काल में हैदराबाद के सातवें निज़ाम ने ओस्मान सागर और हिमायत सागर नाम की दो झीलों का निर्माण कराया था.

Presentational grey line
Presentational grey line

नज़फ़ अली कहते हैं "इसके साथ ही ओस्मानिया यूनिवर्सिटी आर्ट कॉलेज (बिल्डिंग), मोज़ामजही बाज़ार, नामपल्ली रेलवे स्टेशन, हाई कोर्ट बिल्डिंग, ओस्मानिया अस्पताल, निलोफ़र अस्पताल की छोटे आकार की 500 से ज़्यादा चांदी से बनी हुई कृतियां मौजूद हैं."

नजफ़ अली ख़ान बताते हैं कि म्यूज़ियम में मौजूद कलाकृतियों की कीमत इस समय चार सौ करोड़ रुपये से ज़्यादा होगी.

रोल्स रॉयस और जगुआर भी

इस संग्रहालय में लकड़ी की बनी हुई वो लिफ़्ट भी मौजूद है जिसकी मदद से निज़ाम हर रोज़ मसरत महल की सबसे ऊंची इमारत के फ्लोर पर पहुंचते थे.

इसके अलावा म्यूजियम में निज़ाम की अलमारी भी देखी जा सकती है, जिसकी 140 दराज़ों में निज़ाम के शाही कपड़े रखे जाते थे.

नजफ़ बताते हैं कि फ़लकनुमा महल के मैदान में रोल्स रॉयस और जगुआर गाड़ियां देखी जा सकती हैं, जिनको निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान बेहद पसंद किया करते थे.

अपने परदादा की दरियादिली को याद करते हुए नजफ़ बताते हैं कि उन्होंने निज़ाम इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस को सरकार को सिर्फ एक रुपये की लीज़ पर दिया था.

सोने का कप, हैदराबाद, निज़ाम म्यूजियम, निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान

इमेज स्रोत, Nawab Najaf Ali Khan/BBC

साल 1937 में आया संग्रहालय का विचार

निज़ाम संग्रहालय की स्थापना साल 2000 में ज़रूर हुई हो, लेकिन इसकी स्थापना का विचार लगभग 60 साल पहले ही सामने आया था.

म्यूज़ियम को चलाने वाले निज़ाम ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी और इतिहासकार मोहम्मद सैफीउल्लाह कहते हैं कि निज़ाम मीर उस्मान अली ने 29 अगस्त 1911 में सत्ता संभाली थी और 17 सितंबर 1948 तक दक्कन पर शासन किया.

वो कहते हैं कि 1937 में उनके शासन के 25 साल पूरे होने के मौके पर एक संग्रहालय खोलने का विचार सामने आया था, जिसमें निज़ाम इस मौक़े पर दिए गए तोहफों को रखने की बात कही गई थी.

सोने का कप, हैदराबाद, निज़ाम म्यूजियम, निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान

इमेज स्रोत, Nawab Najaf Ali Khan/BBC

इस संग्रहालय में गोल्ड प्लेटेड सिंहासन, पालवंचा राजाओं द्वारा दी गई इत्र की शीशियां, मैसूर के राजाओं की दी गई हाथी दांत से बनी चारमीनार की छोटी कलाकृति मौजूद है.

साथ ही फ्रांस से आए हुए सिरेमिक से बने चाय के कप, लंदन से आए हुए कॉफी कप, बसरा कस्बे की छोटी कलाकृति और मोती जड़ित छड़ी जैसी चीज़ें मौजूद हैं.

मोहम्मद सैफीउल्लाह ने निज़ाम के इतिहास के बारे में कई किताबें लिखी हैं और निज़ाम की लिखी कई चिट्ठियों का भी संकलन किया है.

Red line
bbchindi.com
Red line

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)