You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
हीरे के शहर में 9 हज़ार रुपये किलो वाली मिठाई
- Author, दीपल कुमार शाह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
क्या कभी आपने नौ हज़ार रुपये प्रति किलोग्राम वाली मिठाई खाई है? ज़्यादातर लोग इसे मज़ाक समझेंगे.
लेकिन ये बात पूरी तरह सच है और अब आप गुजरात के सूरत शहर में इतनी महंगी मिठाई खा सकते हैं.
हीरों के शहर के नाम से मशहूर सूरत में 'गोल्डन स्वीट' नाम की मिठाई लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई है.
रक्षाबंधन का त्योहार जल्द ही आने वाला है और इसके चलते लोगों ने मिठाइयां खरीदना शुरू कर दिया है. लेकिन इस महंगी मिठाई को लेकर लोगों में काफ़ी दिलचस्पी देखी जा रही है.
स्ट्रीट फूड के लिए प्रसिद्ध है सूरत
गुजराती साहित्य में एक कहावत है - "सूरत नू जमण एन काशी नू मरण". इसका मतलब होता है कि जिस तरह काशी में प्राण त्यागना सर्वश्रेष्ठ होता है, उसी तरह सूरत में खाना सबसे बेहतरीन होता है.
इस मिठाई को बनाने वाले रोहन मिठाईवाला ने बीबीसी गुजराती सेवा को बताया, "हमने पांच तरह की मिठाइयां बनाई हैं जिसमें सबसे ऊंची क्वालिटी का सामान इस्तेमाल किया है. इसमें जो मेवे डाले गए हैं, वो भी अपने आप में बेहद ख़ास है. जैसे कि इसमें पड़ने वाली केसर को स्पेन से मंगाया गया है. इसके साथ ही 180 नंबर का काजू डाला गया है."
महंगी क्यों है ये मिठाई
रोहन बताते हैं कि उन्होंने काजूकरी, नरगिस कलम, पिस्ता बादशाह, ड्राई फूड आउट और केसर कुंज नाम की पांच मिठाइयां बनाई हैं.
लेकिन इसके बाद भी एक सवाल उठता है कि इस मिठाई की क़ीमत आख़िर नौ हज़ार रुपये प्रति किलोग्राम कैसे हो सकती है.
इसकी वजह रोहन मिठाईवाला ने ये बताई, "इस मिठाई पर शुद्ध सोने का वर्क चढ़ाया गया है जिसकी वजह से इसकी कीमत बढ़ जाती है. यही नहीं, इस मिठाई में जिस सोने का इस्तेमाल किया गया है, वह जेवरों में लगने वाले सोने से भी महंगा होता है क्योंकि इसे खाने लायक बनाए जाने की प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है."
सुनहरी मिठाई बनाने का विचार
इस मिठाई की दुकान में लोगों की भीड़ का होना लाज़मी है. मिठाई देखने वाले लोगों में से कई लोग ये सवाल उठाते हैं कि उनके मन में ये विचार कहां से आया कि सोने के वर्क चढ़ी मिठाई बनाई जाए.
बीबीसी गुजराती सेवा ने जब ये सवाल पूछा तो रोहन मिठाईवाला बताते हैं कि ये विचार एक मिठाई की दुकान की सिल्वर जुबली के मौके पर आया.
वे कहते हैं, "एक दुकान की सिल्वर जुबली के मौके पर मुझे ये ख्याल आया कि कुछ ख़ास किया जाए. क्योंकि ये लम्हा मेरे और मेरे भाई के लिए बेहद ख़ास था इसलिए मैंने अपने भाई के साथ गोल्डन स्वीट खाकर सिल्वर जुब्ली मनाई."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)