बिहार उपचुनावः प्रचार के अंतिम दिन भाजपा को याद आई 'आईएसआई'

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- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, पटना से बीबीसी हिंदी के लिए
बिहार में रविवार को होने वाले तीन सीटों पर उपचुनाव के लिए प्रचार शुक्रवार शाम पांच बजे समाप्त हो गया.
11 मार्च को लोकसभा सीट अररिया के साथ-साथ जहानाबाद और भभुआ विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे.
ये तीनों सीटें यहां के जनप्रतिनिधियों की मौत से खाली हुई थीं. मुख्य मुकाबला जदयू-भाजपा वाले एनडीए और राजद-कांग्रेस वाले महागठबंधन के बीच है.
किस सीट पर किसके बीच है मुकाबला?
अररिया सीट पर राजद और भाजपा आमने-सामने हैं तो जहानाबाद में राजद का मुकाबला जदयू से है. वहीं भभुआ विधानसभा सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है.

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इस उपचुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर सबकी नजर अररिया लोक सभा सीट पर है. इस एक सीट से लोक सभा के अंदर संख्या बल के हिसाब से ज्यादा कुछ नहीं बदलेगा लेकिन इस सीट का राजनीतिक महत्त्व है.
वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर कहते हैं, ''इसके नतीजे से पता चलेगा कि लालू यादव की ताकत बढ़ी है या घटी है. साथ ही इसके नतीजों से नरेंद्र मोदी यानी की भाजपा या एनडीए की ताकत का भी आंकलन होगा.''
भाजपा के लिए महत्त्वपूर्ण क्यों?
भाजपा के लिए यह सीट दो मायनों में महत्त्वपूर्ण है. एक तो वह 2014 के मोदी लहर में भी इस सीट पर हारी थी, तो उसे इसकी भरपाई करनी है.

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दूसरी बात यह कि मुस्लिम बहुत और बांग्लादेश से करीब होने के कारण भी भाजपा के लिए यह सीट अहम है. वह इस इलाके में अवैध घुसपैठ और गौ-हत्या और गौ-तस्करी जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाती रही है.
इसी को आगे बढ़ाते हुए चुनाव प्रचार के अंतिम दिन बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने अररिया लोक सभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान कहा, ''अगर सरफ़राज़ (राजद उम्मीदवार) जीत गया तो अररिया आईएसआई का अड्डा बन जाएगा, वहीं प्रदीप सिंह (भाजपा उम्मीदवार) जीते तो अररिया देशभक्तों का अड्डा रहेगा.''

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इसी सभा में उन्होंने गौहत्या कर मुद्दा भी उठाया.
2015 के विधानसभा के अंतिम चरण के चुनाव के दौरान भी भाजपा ने खुलकर गौहत्या का मामला उठाया था. तब अंतिम चरण के सीमांचल इलाके के अररिया सहित अन्य जिलों में मतदान होना था.
खूब चले भाषणों के तीर
जैसा कि किसी भी चुनाव प्रचार के दौरान होता है, इस उपचुनाव में भी राजनीतिक विरोधियों ने एक-दूसरे पर जमकर हमला बोला.

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अररिया में एक सभा में बिना किसी का नाम लिए कहा, ''जो कोई गलत करेगा, पाप करेगा, उसे तो इस जीवन में भुगतना ही पड़ेगा. ये तय मानिए. ये कुदरत का नियम है.''
उन्होंने आगे कहा कि मुझे तो आश्चर्य होता कि कुछ लोगों को धन की इतनी चाहत क्यों होती है. सार्वजनिक जीवन में तो प्रतिष्ठा और सम्मान की चाहत होनी चाहिए. माना जा रहा है कि नीतीश का इशारा लालू और तेजस्वी यादव की ओर था.
वहीं अररिया की ही एक सभा में तेजस्वी ने सीधे नाम लेकर नीतीश कुमार पर ये हमला बोला, ''हमको कहते हैं कि भ्रष्टाचारी है लेकिन नीतीश कुमार और भाजपा के लोग हेलिकॉप्टर से आएंगे. ये हेलिकॉप्टर का पैसा कौन दे रहा है. ये पैसा वैसे पूंजीपति दे रहे है जिन्हें देश का पैसा लेकर भागने की छूट नरेंद्र मोदी सरकार दे रही है.''
आम-चुनाव के पहले सेमीफाइनल
यूं तो सूबे में महज तीन सीटों के लिए उपचुनाव हो रहे हैं लेकिन इस चुनाव में जिस तरह से बिहार के तमाम बड़े नेताओं ने ताकत लगाई, ऐसे में यह चुनाव 2019 में होने वाले आम-चुनाव के पहले सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है.

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इस उपचुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अररिया और जहानाबाद में दो-दो जन सभाओं के अलावा भभुआ में भी एक सभा को संबोधित किया.
वहीं, तेजस्वी यादव ने अररिया में तीन दिन रुक कर अपने प्रत्याशी सरफराज आलम के पक्ष में कई सभाएं कीं. जहानाबाद में भी वो लगातार दो दिन रुके.
भाजपा नेता सुशील मोदी की बात करें तो वह न केवल मुख्यमंत्री के साथ सभाओं में मौजूद रहे बल्कि उन्होंने अलग से भी कई सभाएं कीं.

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शुक्रवार को सुशील मोदी और तेजस्वी यादव ने भभुआ विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार किया.
गठबंधनों में टूट-फूट
इस चुनाव के दौरान ही दोनों गठबंधनों में खींचतान देखने को मिली. ऐसा ज्यादा एनडीए में देखने को मिला.
शुरुआत जदयू विधायक सरफराज आलम के इस्तीफे से हुई. उन्होंने अपनी पिता मोहम्मद तस्लीमुद्दीन की मौत से खाली हुई अररिया सीट से राजद के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए जदयू छोड़ा.

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फिर एनडीए के घटक दलों में सीटों पर दावेदारी को लेकर खींचतान सामने आई.
इसके बाद 28 फरवरी को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की अगुवाई वाला एनडीए का सहयोगी दल हम (सेक्युलर) इस गठबंधन से अलग हो गया.
इसी दिन कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी के साथ तीन दूसरे विधान पार्षदों ने कांग्रेस छोड़ जदयू में शामिल हाने की घोषणा कर दी.
दोनों गठबंधनों का दावा है कि तीनों सीटों पर जीत उनकी ही होगी. लेकिन असल नतीजों के लिए बुधवार 14 मार्च तक का इंतजार करना होगा जिस दिन वोटों की गिनती होनी है.
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