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'सच्चे को चुनो, अच्छे को चुनो' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जी हाँ, चुनाव के इस मौसम में अभिनेता आमिर ख़ान ने लोगों में जागरूकता पैदा करने का बीड़ा उठाया है. उन्होंने लोगों से सही व्यक्ति का चुनाव करने की अपील की है. आमिर यह काम एडीआर यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स नाम की एक स्वयंसेवी संस्था के साथ मिलकर करेंगे. तीन विज्ञापन अभिनेता आमिर ख़ान की छवि हमेशा से एक सामाजिक रूप से जागरूक कलाकार की रही है. अब जब चुनाव सिर पर हैं, आमिर एडीआर की मदद से मतदाताओं को उनके इलाक़े के प्रत्याशियों के बारे में पूरी जानकारी देने में मदद करेंगे. लोगों को सही सही व्यक्ति का चुनाव करने में मदद करने के इस अभियान में आमिर ख़ान के तीन विज्ञापन प्रिंट, इंटरनेट और मोबाइल के जरिए लोगों तक पहुँचाए जाएँगे. आमिर ने इन विज्ञापनों के लिए न केवल मुफ़्त में काम किया है बल्कि उनकी प्रोडक्शन कंपनी आमिर ख़ान प्रोडक्शंस ने ये विज्ञापन तैयार किए हैं. इन विज्ञापनों को लिखा है जाने-माने गीतकार प्रसून जोशी ने और निर्देशन किया है ओमप्रकाश मेहरा ने. आमिर ने मुंबई में एडीआर के अधिकारियों के साथ एक प्रेस कांफ़्रेंस में कहा, " कुछ महीने पहले मैं बैंगलोर में अपनी फ़िल्म 'थ्री इडियट्स' की शूटिंग कर रहा था. उस समय मेरी मुलाक़ात इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) बैंगलोर के डीन त्रिलोचन शास्त्री से हुई. उन्होंने मुझे अपनी संस्था एडीआर के बारे में बताया. " सही नेता का चुनाव आमिर ने कहा, "एडीआर की कोशिश है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को सबसे अच्छा लोकतंत्र बनाया जाए. ये लोग देश की चुनाव प्रणाली में सुधार लाने के लिए काफ़ी अच्छा काम कर रहे हैं. जब इन्होंने मुझसे कहा कि मैं इनकी मदद करूं तो मुझे इनका विचार काफ़ी पसंद आया. इसीलिए मैं आज इनके साथ यहाँ आया हूँ." आमिर ने बताया कि एडीआर की कोशिश है कि किसी इलाक़े के प्रत्याशी की पूरी जानकारी आम लोगों को उपलब्ध कराई जाए. इसीलिए मैं इनके साथ आया. हमारी कोशिश है कि लोगों को इन जानकारियों की मदद से हम सही नेता चुनने में मदद कर सकें. हम सिर्फ़ यह चाहते हैं कि लोग अपना क़ीमती वोट सही आदमी को दें. एडीआर यानि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स एक ग़ैर राजनीतिक संस्था है. इसकी स्थापना 1999 में आईआईएम अहमदाबाद और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन अहमदाबाद के कुछ प्रोफ़ेसरों ने मिलकर की थी. इसका मक़सद देश में स्वच्छ और पारदर्शक चुनाव प्रणाली लागू करवाना है. नेतागिरी अभी नहीं चुनाव लड़ने के सवाल पर आमिर ने हंसते हुए कहा, "मैं अभी चुनाव नहीं लड़ना चाहता, फ़िल्में मेरा जूनून हैं. मैं केवल यही करना चाहता हूँ लेकिन इतना ज़रुर है कि एक नागरिक होने के नाते मैं चाहता हूँ कि हम सब मिलकर सही लोगों को चुनें." वरुण गांधी विवाद पर जवाब देते हुए आमिर ने कहा, " मेरे ख़्याल से इस मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा रहा है. यह आउटडेटेड हो गया है. मेरे ख़्याल से हमारे देश की जनता काफ़ी समझदार है. उसे मालूम है कि सही क्या है, ग़लत क्या है. ये सारा हल्ला केवल टीवी चैनलों पर हो रहा है. सारा हंगामा वहीं पर है." उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि जब आदमी वोट करने जाएगा तो चाहे वह कोई भी हो तो वह देश के भले के बारे में सबसे पहले सोचेगा. सबको पता है कि कौन सच बोल रहा है और कौन नेतागिरी कर रहा है." आमिर को भरोसा है कि उनकी इस अपील का असर लोगों पर ज़रुर पड़ेगा. |
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