|
मैं परिवार की नायिका हूँ: ग्रेसी सिंह | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ज़ी टीवी के लोकप्रिय धारावाहिक 'अमानत' से अपना फ़िल्मी सफ़र शुरू करने वाली अभिनेत्री ग्रेसी सिंह फ़िल्म 'देशद्रोही' के ज़रिए एक बार फिर चर्चा में है. धारावाहिक 'अमानत' में घर से भागकर शादी करने वाली लड़की की भूमिका निभाकर चर्चा पाने वाली ग्रेसी सिंह ने आमिर ख़ान की ऑस्कर तक पहुँचने वाली फ़िल्म 'लगान' में जब गौरी की भूमिका की तो लोगों को लगा कि साठ और सत्तर के दशक की कोई मुस्कान और ताज़गी भरे चेहरे वाली अभिनेत्री लौट आई है. लेकिन उसके बाद 'मुन्ना भाई' और 'गंगाजल' जैसी बड़ी फिल्में करने वाली यह अभिनेत्री न केवल परदे से ग़ायब हो गईं बल्कि अरसे बाद ऐसी फ़िल्मों में दिखाई दी जिन्हें बी और सी ग्रेड कहा जाता है. लेकिन दस से ज़्यादा फिल्मों में काम कर चुकी ग्रेसी एक बार फिर चर्चा में है. निर्माता से अभिनेता बने कमाल ख़ान की नई फ़िल्म 'देशद्रोही' के विवाद के में कमाल के साथ साथ ग्रेसी भी चर्चा में आ गई हैं. ख़बरों के मुताबिक़ ग्रेसी जल्दी ही अपने पुराने टीवी शो 'अमानत' के नए संस्करण में भी वापसी करेंगी. दिल्ली में जब वो मिली तो फ़िल्म कि चर्चा और अपनी वापसी पर उत्साहित तो दिखी लेकिन विवादों से परेशान भी. पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंश: आपकी फ़िल्म लगातार चर्चा में है और अब आप टीवी पर भी वापसी कर रही हैं? किसी फ़िल्म की चर्चा अच्छी बात है, लेकिन उसके साथ विवाद होना ठीक नही. 'देशद्रोही' एक संदेश को लेकर बनाई गई फ़िल्म है. उसे केवल एक फ़िल्म की तरह देखा जाना चाहिए. जब यह बनी थी तो फ़िल्म से जुड़ा कोई विवाद नही था. इससे करोड़ों रूपये की फ़िल्मों को नुक़सान होता है. जहाँ तक मेरे टीवी पर लौटने की बात है तो मैंने पहले भी कहा था कि यदि कोई बेहतर प्रस्ताव होगा तो ज़रूर काम करुँगी पर फ़िलहाल नही. आपके कैरयर की सबसे बड़ी उपलब्धि टीवी को माना जाता है लेकिन 'लगान' के बाद अपने टीवी के लिए काम करने से मना कर दिया था? लगान के बाद मैं अचानक व्यस्त हो गई थी और मेरी जगह कोई भी होता तो वो यही कहता. लेकिन मैंने कहा था कि फ़िलहाल टीवी नही करुँगी. आज तो इंडस्ट्री में जिस भी सितारे को मौक़ा मिलता है वो टीवी पर आ जाता है. मैं तो फिर टीवी से ही फ़िल्मों में गई थी. टीवी एक अनुभव है इसके बग़ैर कोई सितारा नहीं रह सकता अब. लेकिन 'लगान', 'मुन्ना भाई' और 'गंगाजल' जैसी फ़िल्मों में काम करने वाली अभिनेत्री के लिए 'देशद्रोही' जैसी फ़िल्म और कमाल ख़ान जैसे सी ग्रेड अभिनेता के साथ काम करने को आप कैसा प्रस्ताव मानती हैं? ऐसी बात नही. मुझे यदि किसी फ़िल्म की कहानी और पटकथा में अपने लिए भूमिका उपयुक्त लगती है तो मैं कर लेती हूँ. 'देशद्रोही' में भी मेरी भूमिका नायक के साथ ऐसी नायिका की है जो उसके संघर्ष में उसका आधार बनती है.
मैंने जब अपना कैरियर शुरू किया था तो मैंने केवल 'लगान' या 'गंगाजल' जैसे फ़िल्में ही नहीं की थी बल्कि दक्षिण भाषा की तेलगु की 'मेघावी मेघावी' और हिन्दी की गुलज़ार साहेब की 'हु तू तू' भी की थी. ऐसी क्या बात रही कि 'लगान' के बाद आपको इंडस्ट्री ने एक बड़ी अभिनेत्री की तरह स्वीकार नही किया गया. यह भी कहा गया कि इसमें आमिर की महत्वपूर्ण भूमिका रही? अगर ऐसी बात होती तो मैं 'मुन्नाभाई', 'गंगाजल' और 'अरमान' जैसी फिल्में नहीं करती. यह अलग बात है कि उन्हें मैं आज भी लगान की गौरी ही लगती हूँ. देशद्रोही जैसे फ़िल्म में आने का क्या मतलब लगाया जाए? मैंने पहले भी कहा कि मेरे लिए बैनर और पैसा ही सबकुछ नही है. आप यदि मेरी फ़िल्मों पर ध्यान दें, मैंने बड़ी फ़िल्मों के अलावा वजह, शर्त, चूडियाँ और मुस्कान जैसी फिल्में भी की जो बड़े निर्देशकों की नही थी. ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है लेकिन इसके बावजूद मैंने अपने कैरियर में जो फ़िल्में की वो कम बड़ी उपलब्धि नहीं हैं. क्या यह सही है कि टीवी से फ़िल्मों में जाने वाले कलाकारों को आज भी दोयम दर्जे का माना जाता है ख़ासतौर से अभिनेत्रियों को? मुझे यह पूर्वाग्रह आज तक समझ नहीं आया. मैंने पहली बार टीवी से फ़िल्मों में जाकर एक नया मुक़ाम हासिल किया और शाहरुख़ ख़ान तो इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं. मैंने आमिर से लेकर, अजय देवगन , संजय दत्त और अनिल कपूर के साथ काम किया. फिर इस सवाल का क्या अर्थ बच जाता है. दक्षिण के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों में जो मौक़े आपको मिले उसका अनुभव कैसा रहा? वहां भी मैंने नागार्जुन से लेकर प्रभुदेवा तक कई ऐसे सितारों के साथ काम किया जो वहाँ सुपर स्टार कहे जाते हैं और साउथ की 'बद्दरी' की रीमेक के अलावा पंजाबी की 'लख परदेसी' भी की. अब आप कहे कि लख परदेसी मैंने ख़ुद के पंजाबी होने के कारण की तो इसे मैं सही नहीं मानती. मैं हर भाषा की फिल्में करने वाली अभिनेत्री हूँ. कहा जा रहा है कि आपका सामान्य और पारिवारिक लुक ही आपको आज के चमकीले और डिज़ायन वाले सिनेमा में टिकने नहीं दे रहा है? मेरे लिए इससे बेहतर कुछ नहीं है. कम से कम मैं अपने भारतीय और पारंपरिक कहे जाने वाले हिंदी सिनेमा की प्रतिनिधि तो समझी जा रही हूँ. मेरे इसी लुक ने लगान, मुन्ना भाई और गंगाजल में मुझे नई पहचान दी है. मैं बोल्ड होने के नाम पर ज़ीरो साइज़ नही बन सकती. मैं परिवार की नायिका हूँ बाज़ार की नहीं. अब आपकी आने वाली फ़िल्में कौन-कौन सी हैं? 'दी व्हाइट लैंड', 'आसिमा' और कन्नड़ की 'मेघावी मेघावी' आने वाली हैं. |
इससे जुड़ी ख़बरें अभिषेक और ऐश्वर्या का अलग अंदाज़13 नवंबर, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस भारतीय धारावाहिकों पर रोक15 अप्रैल, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस गब्बर सिंहः 'तोहार का होई रे कालिया'19 अक्तूबर, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस एक बिसरे हुए महानायक पर फ़िल्म11 मई, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस समय और रिश्तों की गाथा भरी फ़िल्म15 अप्रैल, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||