BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 27 अप्रैल, 2006 को 19:54 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
अब 'राजश्री' की दूसरी पारी

‘प्यार के दो नाम-एक राधा एक श्याम’ सीरियल का एक दृश्य
राजश्री प्रोडक्शन की छवि साफ़ सुथरी प्रेम कहानी दिखाने वाली फ़िल्म कंपनी की रही है
कभी पारिवारिक फिल्में बनाने के लिए मशहूर रहे राजश्री प्रोडक्शन ने अब छोटे पर्दे की तरफ रुख़ किया है और अपने दो सीरियल भी टेलीविजन पर उतारे हैं.

ऐसा भी नहीं है कि 'राजश्री' पहली बार टेलीविज़न के क्षेत्र में आ रहा है लेकिन टेलीविज़न के नए दौर में इसे एक नई शुरुआत ही मानना चाहिए.

सामाजिक मुद्दों को रोमांटिक एंगल देकर साफ़ सुथरी फिल्में बनाना 'राजश्री' की सबसे बडी ख़ासियत रही है.

लेकिन लगता है कि राजश्री प्रोडक्शन और बड़जात्या परिवार की पहली पारी ख़त्म हो गई और अब दूसरी पारी शुरु हो रही है.

एक ओर 'राजश्री' की फ़िल्मों का काम ताराचंद बड़जात्या के बाद उनके बेटे सूरज बड़जात्या संभाल रहे हैं.

तो टेलीविज़न की ज़िम्मेदारी सूरज बड़जात्या की चचेरी बहन और कमल कुमार बड़जात्या की बेटी कविता पर है.

नई पारी

‘दोस्ती’, ‘गीत गाता चल’, ‘अंखियों के झरोखों से’ हो या फिर ‘हम आपके हैं कौन’ जैसी फ़िल्म, 'राजश्री' का अपना एक अलग अंदाज़ रहा है.

माधुरी दीक्षित, अनुपम खेर, भाग्यश्री, सलमान खान, राखी, जया बच्चन आदि कलाकारों को लाइमलाइट में लाने का श्रेय भी 'राजश्री' ही जाता है.

कविता बड़जात्या
कविता बड़जात्या की आदर्श एकता कपूर है

लेकिन अब टेलीविज़न का ज़माना है और राजश्री' ने इस क्षेत्र में आना तय किया. इस समय दो सीरियल टेलीविज़न पर है.

‘एक महल हो सपनों का’ (सहारा वन चैनल में) और ‘प्यार के दो नाम-एक राधा एक श्याम’ (स्टार प्लस में) का प्रसारण चल रहा है.

आज के दर्शकों के लिए ‘प्यार के दो नाम’ जैसा पारंपरिक नाम रखकर लगता है कि कविता ने एक तरह से ख़तरा ही उठाया है. लेकिन कविता इससे बिल्कुल सहमत नहीं है, “मेरे खयाल से दर्शकों के लिए नाम से ज़्यादा उसकी कहानी मायने रखती है. फिर राधा- कृष्ण का प्यार किसे नहीं पता है. अपनी परंपरा को ध्यान में रखकर हम कुछ अलग करने की कोशिश कर रहें हैं.”

कविता ने इससे पहले भाई सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘मैं प्रेम की दीवानी हूं’ में सहायक के रुप में काम किया है था.

 मैं चाहती हूं कि राजश्री प्रोडक्शन टेलीविज़न इंडस्ट्री में भी अपनी एक ख़ास जगह बनाए
कविता बड़जात्या

तो क्या अंतर है फ़िल्म और टेलीविज़न सीरियल में, इस सवाल पर वे कहती हैं, “इसमें काफ़ी कुछ एक जैसा है तो बहुत कुछ अलग भी है. सीरियल में डेडलाइन बहुत स्ट्रांग होती है. डेली सोप होने की वजह से इसका पालन भी उतनी ही सख़्ती से करना पड़ता है. जहां तक फिल्मों की बात है तो थोडा-बहुत यहाँ-वहाँ चल जाता है.”

फिल्मों के बजाय टेलीविजन चुनने पर वे बेझिझक कहती हैं, "व्यवसाय बढ़ाने के साथ मैं यहाँ अपनी एक ख़ास जगह बनाने की कोशिश कर रही हूँ. मैं चाहती हूं कि राजश्री प्रोडक्शन टेलीविज़न इंडस्ट्री में भी अपनी एक ख़ास जगह बनाए."

इस काम में सूरज बड़जात्या उनका सहयोग भी करते हैं.

कहानी से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन तक में सूरज बडजात्या का सहयोग रहता है. कविता कहती हैं कि वे अपने सीरियलों की आगे की कहानी के बारे में उनके साथ चर्चा ज़रूर करती हैं.

टेलीविज़न क्वीन कही जाने वाली एकता कपूर को कविता अपना आदर्श मानती हैं. वे कहती हैं, “उन तक पहुंचना बहुत ही मुश्किल है. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कडी मेहनत की है. मेरा सपना है कि मैं उनके जैसी बन सकूं.”

पुराना अनुभव

28 वर्षीय कविता बड़जात्या ने मुंबई के सिडनम कॉलेज से डिस्टिंशन के साथ ग्रेजुएशन किया. कोई कसर न रह जाए इसके लिए व्यवसाय में जाने से पहले इन्होंने मैनेजमेंट की पढ़ाई भी की.

'वो रहने वाली महलों की' का एक दृश्य
रिश्तों के खींचतान वाले टीवी सीरियलों के बीच राजश्री को जगह बनानी है

कविता कहती हैं कि टेलीविजन पर करने के बहुत कुछ है. ये तो सिर्फ राजश्री प्रोडक्शन की शुरूवात है.

ऐसा नहीं है कि ये पहली बार है जब राजश्री प्रोडक्शन छोटे पर्दे पर उतरा है.

इसके पहले 1984 में दूरदर्शन के लिए ‘पेइंग गेस्ट’ नामक एक सीरियल बना चुका है.

लेकिन समय की कमी और फिल्मों की व्यस्तता की वजह से सूरज बड़जात्या ने सीरियलों के लिए वहीं पर विराम लगा दिया था.

अब आगे दर्शकों की नज़र इसी पर रहेगी कि क्या कविता बड़जात्या 'राजश्री' की सालों से आ रही परंपरा को निभाएँगीं या अपनी आदर्श एकता कपूर के नक्शे-कदम पर वही सास-बहू का राग अलापती हुई रिश्तों की धज्जियाँ उडाएँगीं.

“यही तो मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती है”, कविता हँसकर कहती हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>