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लंबे समय बाद लौट रहे हैं फ़ारूक़ शेख़ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सत्तर और अस्सी के दशक के मशहूर कलाकार फ़ारूक़ शेख़ लंबे अर्से बाद एक बार फिर से रुपहले पर्दे पर वापसी कर रहे हैं. वार्नर ब्रदर्स पिक्चर्स और पीएलए एंटरटेनमेंट की फिल्म सास बहू और सेन्सेक्स में वो मुख्य किरदार निभा रहे हैं.ये फिल्म 12 सितंबर को सिनेमा घरों तक पहुंचेगी. फ़ारूक़ शेख़ का नाम आते ही दिमाग में एक ऐसे कलाकार की छवि उभरती है जिसने अपने अलग तरह के अभिनय से दो दशकों तक दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. समानांतर सिनेमा फ़ारूक़ का मुख्य योगदान समानांतर फिल्मों को रहा है. हांलाकि उन्होंने कई कमर्शियल फिल्मों में भी काम किया. उन्होंने सत्यजीत रे, मुज़फ़्फ़र अली, ऋषिकेश मुखर्जी, एमएस सथ्यू, सई परांजपे और केतन मेहता जैसे फ़िल्मकारों के साथ काम किया है. इसके अलावा उन्होंने कई कॉमेडी और टीवी धारावाहिकों के साथ साथ स्टेज पर भी अभिनय किया. उनका स्टेज नाटक तुम्हारी अमृता काफी मशहूर रहा. फ़ारूक़ एक लंबे समय बाद अपनी नई फिल्म सास बहू और सेन्सेक्स के जरिए लोगों का मनोरंजन करने के लिए तैयार हैं. हाल ही में इस फिल्म के म्यूजिक लांच के मौके पर फारुक़ ने बीबीसी से बातचीत की. सास बहू और सेन्सेक्स एक कॉमेडी फिल्म है जिसमें वो एक स्टॉक ब्रोकर की भूमिका निभा रहे हैं. ये पूछने पर कि फिल्म में काम करने की मुख्य वजह क्या थी और कहानी में उन्हें खासतौर से क्या पसंद आया, वो कहते हैं, "सबसे बड़ी वजह तो ये रही कि कहानी बड़ी दिलचस्प है. आजकल की फिल्मों के उलट एक साफ सुथरी कॉमेडी है. मैने इस बैनर के साथ अपनी फिल्म चश्मेबददूर की थी साथ ही और भी काफी काम किया है". एक विशिष्ट तबक़ा सास बहू और सेन्सेक्स कहानी है मुंबई के उस तबक़े की जो सास बहू के धारावाहिक तो देखता ही है साथ ही साथ शेयर मार्केट में भी पैसा लगाता है और शेयर बाजार में आने वाले उतार चढ़ाव से खासा प्रभावित भी होता है. फिल्म में कुछ नए कलाकारों के साथ साथ मशहूर चरित्र कलाकार किरन खेर भी हैं. फ़ारूक़ कहते हैं, "यह फिल्म बदलते हिंदुस्तान की एक तस्वीर पेश करती है जिसमें औरतें अहम भूमिका निभा रही हैं. फिल्म की निर्देशक शोना उर्वशी एक युवा हैं.
ये पूछे जाने पर कि कैसा रहा उनके साथ काम करना, वो जवाब देते हैं, "शोना इससे पहले भी एक फिल्म का निर्देशन कर चुकी हैं. दूसरी बात ये कि आजकल के कलाकार हों या डाइरेक्टर ये लोग काफी सीखे हुए होते हैं. इन्हें पता होता है कि इन्हें वास्तव में क्या चाहिए और ये लोग अंधेरे में तीर नहीं चलाते और मेरा मानना है कि ये किसी भी डाइरेक्टर के लिए बेहद ज़रुरी चीज़ है". चूंकि ये एक कॉमेडी फिल्म है तो कैसी रही फिल्म की शूटिंग वो मुस्कुराते हुए जवाब देते हैं कि शूटिंग पर माहौल काफी मनोरंजक और दोस्ताना था. फिल्म की निर्देशक शोना इसकी बड़ी वजह थीं और देखते ही देखते फिल्म की शूटिंग पूरी हो गई और एक दिन पता चला कि आज तो आखिरी दिन है. फिल्म का शीर्षक काफी दिलचस्प और लीक से हटकर है, इसके बारे में फ़ारूक़ कहते हैं, "जी हां,फिल्म का टाइटल कहानी से बावस्ता है और ये किसी फिल्म के लिए बड़ी अच्छी बात है कि उस फिल्म में जो बात कहने की कोशिश की जा रही है वो टाइटल से पता चल रही है". फ़ारूक़ आजकल कई फिल्मों की स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं और अगले साल कुछ और फिल्मों में काम करने का भी मन उन्होंने बनाया है. |
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