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'फ़रहान ही बन सकते थे हीरो' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
निर्देशक फ़रहान अख़्तर इस शुक्रवार रिलीज़ होने वाली फ़िल्म 'रॉक ऑन' में अपने अभिनय का कमाल दिखाने वाले हैं जबकि टीवी की मशहूर कलाकार प्राची देसाई भी रॉक ऑन के ज़रिए फ़िल्मों में क़दम रखने जा रही हैं. इन दोनों को फ़िल्मी पर्दे पर उतारने का श्रेय जाता है युवा निर्देशक अभिषेक कपूर को जो एकता कपूर और तुषार कपूर के रिश्तेदार भी हैं. अगर यादाश्त पर ज़ोर डालें तो करीब 10 साल पहले अभिषेक कपूर ने बतौर हीरो फ़िल्मी दुनिया में कदम रखा था, दो-तीन फ़िल्में भी कीं जैसे ट्विंकल खन्ना के साथ 'उफ़ ये मोहब्बत'. लेकिन फिर अभिनेता से निर्देशक बन गए. उनकी नई फ़िल्म 'रॉक ऑन' इनदिनों काफ़ी चर्चा में है. फ़रहान जैसे नामी निर्देशक को अपनी फ़िल्म का हीरो बनाने के बारे में कैसे सोचा अभिषेक ने. इस पर अभिषेक बताते हैं, “फ़रहान को मैं बहुत पहले से जानता हूँ जब उन्होंने अपनी पहली फ़िल्म भी नहीं बनाई थी. जिस तरह का उनके जीवन का सफ़र रहा है वो फ़िल्म के चरित्र आदित्य के दस साल के सफ़र से काफ़ी मिलता-जुलता था. मुझे लगा कि फ़रहान इस किरदार को बहुत अच्छी तरह कर पाएँगे. मैं ये भी चाहता था कि फ़िल्म का हीरो अपने गाने ख़ुद गाए. फऱहान की आवाज़ एकदम अलग सी है. मैने सोचा कि अगर वो अपनी आवाज़ को थोड़ा सा नियंत्रित कर सके तो वो रोल में एकदम फ़िट होंगे.” वहीं प्राची देसाई को हीरोइन के तौर पर साइन करने के बारे में अभिषेक ने बताया कि उन्होंने कभी प्राची का काम देखा नहीं था लेकिन जब एकता कपूर ने प्राची का नाम सुझाया तो उन्होंने प्राची का ऑडिशन लिया. अभिषेक कहते हैं कि प्राची का काम उन्हें अच्छा लगा और उनका सादगी भरा अंदाज़ फ़रहान के किरदार के साथ फ़िट बैठ रहा था. फ़रहान को निर्देशित करने का अनुभव
रॉक ऑन में फ़रहान के अलावा लूक केनी, अर्जुन रामपाल और पूरब कोहली भी हैं. अभिषेक बताते हैं कि ये बहुत ही भावुक फ़िल्म है जिसमें चार दोस्तों की कहानी हैं जो रॉक बैंड बनाते हैं,उनके बनते-बिगड़ते रिश्ते हैं और रॉक म्यूज़िक का थीम है. अभिनय तक तो ठीक है लेकिन अभिषेक ने फ़रहान अख़्तर से फ़िल्म के पाँच गाने भी गवाए हैं. अभिषेक कपूर बताते हैं, “जब मैने फ़रहान को बताया कि उन्हें गाने भी गाने पड़ेंगे तो वे थोड़ा सा हिचकिचा रहे थे. लेकिन मैं अड़ा रहा और आख़िरकर उन्होंने गाया और बहुत अच्छा गाया. मुझे ये भी नहीं पता था कि फ़रहान असल ज़िंदगी में गिटार बजाते हैं और कई सालों से सीख रहे थे. मेरी फ़िल्म में उनका ये हुनर काम आया.” फ़रहान अख़्तर जैसे निर्देशक को निर्देशित करने के बारे में अभिषेक कहते हैं, “जब मैं फ़रहान के पास गया था फ़िल्म लेकर तो नहीं सोचा था कि मैं एक निर्देशक को निर्देशित करने वाला हूँ. लेकिन जब सेट पर काम शुरु हुआ तो हल्का सा दबाव महसूस कर रहा था, आख़िर उन्हें लोग एक अच्छे निर्देशक के रूप में जानते हैं. पर जैसे-जैसे काम रवानी में आने लगा तो ये दबाव भी ग़ायब हो गया.” फ़रहान निर्देशक से अभिनेता तक का सफ़र तय कर रहे हैं तो अभिषेक ख़ुद अभिनेता से निर्देशक बने हैं. अभिषेक बताते हैं, "मैने बतौर अभिनेता कुछ फ़िल्में की थी जैसे ट्विंकल खन्ना के साथ उफ़ ये मोहब्बत पर वो फ़िल्में ज़्यादा चली नहीं. अगर फ़िल्म न चले तो आपको अच्छे ऑफ़र नहीं आते. मैने देखा कि ये ज़्यादा ज़रूरी नहीं था कि आप अपना काम कैसे करते हैं बल्कि ये ज़रूरी था कि फ़िल्म चली या नहीं. मुझे लगने लगा कि कुछ भी मेरे नियंत्रण में नहीं है. फिर मैने एक कहानी लिखी, मुझे लगा कि इसे अच्छे तरीके से कहना चाहिए. उसे लेकर मैने फ़िल्म आर्यन निर्देशित की. वहीं से मेरी दिशा बदली, अब रॉक ऑन लेकर तैयार हूँ." रॉक ऑन का संगीत शंकर-एहसान-लॉय ने दिया है. वैसे भारत में भारतीय रॉक बैंड ज़्यादा मशहूर नहीं रहे हैं. ऐसे में रॉक संगीत जैसे विषय पर फ़िल्म बनाने के बाद क्या उम्मीदें हैं अभिषेक को. इंटरव्यू ख़त्म करते-करते वे कहते हैं, "संगीत की कोई भाषा नहीं होती, अगर धुनें अच्छी हैं तो लोगों को ज़रूर पसंद आएगी. दर्शकों के लिए एक नई चीज़ बनाना –इसमें उत्साह तो होता है पर थोड़ा डर भी लगता है. पर कहानी में दम हो और अभिनय में दम हो तो मुझे लगता है कि फ़िल्म सफल हो जाती है. बाकी ऊपरवाले के हाथ में छोड़ देना चाहिए.” |
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