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बिग बी तुसी ग्रेट हो: विशाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंदी सिनेमा में गीत-संगीत को फ़िल्म की जान कहा जाता है. बात चाहे फ़िल्म की हो या फिर लाइव शो की-उम्दा संगीत इसमें चार चाँद लगा देता है और इसका पूरा श्रेय संगीत निर्देशक को जाता है. संगीत निर्देशक विशाल-शेखर की जोड़ी इनदिनों बच्चन परिवार के साथ विश्व दौरे पर है. विशाल बताते हैं कि बिग बी का जादू ऐसा है कि जब वो स्टेज पर परफ़ॉर्म करते हैं तो वे और शेखर बच्चों की तरह कोने में खड़े मंत्रमुग्ध से देखते रह जाते हैं. साथ ही वे बताते हैं कि क्या हुआ जब अमिताभ बच्चन स्टेज पर गा रहे थे और बिजली हो गई गुल... अमरीका में परफ़ॉर्म कर रहे विशाल से बीबीसी ने विशेष बातचीत की: 'अन्फ़ॉर्गेटेबल वर्ल्ड टूर' का हिस्सा बनने की सबसे ख़ास वजह? इस टूर के ज़रिए अमिताभ बच्चन साहब के साथ वक़्त बिताने, काम करने और कुछ सीखने का मौका मिल रहा है. यही सबसे ख़ास वजह है. इसके अलावा दुनिया भर के लोगों से मिलने का मौक़ा तो मिलता ही है. हमने सुना है कि अमरीका में शो के दौरान आपने शेखर, अभिषेक और रितेश देशमुख के साथ मिलकर इतना धमाल किया कि शो के बाद आपकी आवाज़ जवाब दे गई थी. दरअसल उस शो में मैं और शेखर स्टेज पर गा रहे थे. हमारे साथ अभिषेक और रितेश भी स्टेज पर आ गए , वो भी अचानक, हमें उम्मीद नहीं थी. जोश बहुत बढ़ गया था, समझिए कि हम चारों पागल हो गए थे, स्पीकर पर चढ़ कर हम लोग दर्शकों को उकसा रहे थे. वो हमारे लिए अन्फ़ॉर्गेटेबल पल था. इतना चिल्लाने के बाद आवाज़ बैठ गई थी लेकिन ऊपर वाले का शुक्र है कि अगले दिन वापस आ गई. अमिताभ जी के साथ काम करने का मज़ा ही दूसरा होगा?
जब बच्चन साहब परफ़ॉर्म करते हैं तो मैं और शेखर बस स्टेज के साइड में खड़े होकर छिपकर स्कूल के बच्चों की तरह उनका शो देखते हैं. देखकर ख़ुश होते हैं कि उन्हें लाइव गाते हुए या डॉयलॉग बोलते हुए देख रहे हैं. अदभुत अनुभव होता है वो. आप जब फ़िल्म के लिए संगीत बनाते हैं तो अलग तरह का माहौल होता होगा. स्टेज पर दर्शकों के सामने लाइव परफ़ॉर्म करने की क्या सबसे बड़ी चुनौती होती है. शेखर और मैं दोनों गायक भी हैं. मैं एक रॉक बैंड के साथ गाता हूँ. हम दोनों ने ही बहुत सारे लाइव शो किए हैं पहले भी. इसलिए हमारे लिए स्टेज पर जाना कोई नई बात नहीं है. लेकिन बतौर संगीत निर्देशक जोड़ी विशाल-शेखर ये हमारा पहला वर्ल्ड टूर है. उम्मीद यही है कि लोगों को खु़श कर सकें, बस लोग जान लें कि हम कितने पागल हैं और संगीत रचते समय कितना मज़ा करते हैं क्योंकि हमारे लिए स्टूडियो का माहौल और स्टेज का माहौल एक जैसा ही है. स्टूडियो हो या स्टेज-हम लोग संगीत का उतना ही लुत्फ़ उठाते हैं. मैं कई ब्लॉगस पढ़ रही थी. आपके प्रशंसक आपकी तुलना कल्याणजी आनंदजी से कर रहे हैं क्योंकि काफ़ी साल पहले उन्होंने भी अमिताभ बच्चन के साथ इसी तरह का विश्व दौरा किया था. कल्याणजी आनंदजी का स्टाइल अलग था, अंदाज़ अलग था. स्टेज पर वो ख़ुद परफॉर्म नहीं करते थे, ऑर्केस्ट्रा को कंडक्ट करते थे और गायक गाते थे. लेकिन इस बार मामला दूसरा है. शेखर और मैं ख़ुद गा रहे हैं स्टेज पर. हम लोग अपने ही गानों को नए अंदाज़ में पेश कर रहे हैं, बच्चन साहब के गानों को नए रूप में पेश कर रहे हैं, बहुत फ़र्क़ है. समानता यही है कि दोनों संगीत निर्देशक हैं और बच्चन साहब के साथ टूर पर हैं. कल्याणजी आनंदजी बहुत बड़े लोग हैं और हम उनके सामने बच्चे हैं. लाइव शो के दौरान कभी कोई गड़बड़ हुई हो... हम लोगों ने पहले से ही बहुत तैयारी की है. मुंबई से निकलने से पहले ही हम सबने एक महीना रोज़ रिहर्सल की. फिर भी तकनीकी मामलों में कुछ भी हो सकता है. एक बार ऐसा हुआ कि बच्चन साहब गा रहे थे स्टेज पर और साउंड सिस्टम का पावर चला गया. लेकिन वो शो का सबसे ख़ास पल हो गया. जैसे ही पावर गुल हुई हम सब लोग- मैं, शेखर, अभिषेक, रितेश हम सब स्टेज पर कूद गए. दर्शक सब खड़े हो गए और तालियाँ बजाने लग गए. बिना पावर वाला एक मिनट उस शो का सबसे बेहतरीन पल बन गया. हम हर शो दिलो-जान से कर रहे हैं, लोग भी शायद इस बात को समझते हैं. दरअसल सभी कलाकर एक दूसरे के साथ बहुत सहज महसूस करने लगे हैं, दोस्ती हो गई है- किसी की भी परफॉर्मेंस के दौरान कोई भी आ सकता है. लंदन भी आने वाला है टूर. लोगों के लिए क्या ख़ास लाने वाले हैं? बच्चन साहब हमें अकसर ब्रिटेन के दर्शकों के बारे में बताया करते हैं कि यहाँ के दर्शक बेहद ख़ास है. अमित जी ने काफ़ी शो किए हैं ब्रिटेन में-1981 में, 1990 में भी. उनकी बातों से लगता है कि इस पूरे दौरे में लंदन वाला शो सबसे ख़ास होने वाला है. मैं लोगों से यही कह सकता हूँ कि आप जो शो देखेंगे वो बहुत ख़ास होगा. |
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