|
पॉज़िटिव सोच बनाती है किंग: अक्षय | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अक्षय कुमार इन दिनों सिंह इज़ किंग के जुमले से ज़्यादा पहचाने जा रहे हैं. फ़िल्म का नाम भी अक्षय ने ख़ुद रखा है. अक्षय मानते हैं कि अगर सोच सकारात्मक हो तो असल ज़िंदगी में कोई भी किंग बन सकता है. कैसे मिला फ़िल्म का ये दिलचस्प टाइटल, स्नूप डॉग के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा और फ़िल्म की सफलता को लेकर कितने दबाव में हैं अक्षय- ये सब जानने के लिए हमने फ़ोन लगाया लॉस एजेंलेस जहाँ अक्षय फ़िल्म कम्बख़्त इश्क़ की शूटिंग कर रहे हैं. ‘सिंह इज़ किंग’ ...आजकल इस टाइटल की ख़ूब चर्चा है. पहली नज़र में तो बहुत ख़ुश मिज़ाज़, हैप्पी गो लकी किस्म की फ़िल्म लगती है. आप बेहतर बता पाएँगे कि क्या कहानी है. बिल्कुल हैप्पी गो लकी किस्म की फ़िल्म है. फ़िल्म में मेरा नाम भी हैप्पी सिंह है. सिंह इज़ किंग एक ऐसे लड़के की कहानी है जो लुधियाना से है और उसका नाम है हैप्पी सिंह. इसमें दिखाया गया है कि वो सिंह अपने पॉज़िटिव रवैये से कैसे किंग बनता है. और प्लीज़ ये मत सोचिए कि बड़ी लॉजिक वाली फ़िल्म है. फ़िल्म देखने जाएँ तो दिमाग़ घर पर रख कर जाएँ. आपकी नज़र में असल ज़िंदगी में किंग कौन होता है? ज़िंदगी में हर इंसान किंग बन सकता है- चाहे वो खान हो, पटेल हो, कोई भी हो. बस उसका नज़रिया सकारात्मक होना चाहिए. इंसान पैसे से या पावर से किंग नहीं बनता, वो किंग बनता है पॉज़ीटिव नज़रिए से. मैं अगर ज़िंदगी में आगे बढ़ा हूँ तो इसी सकारात्मक सोच के कारण 'सिंह इज़ किंग' ये टाइटल आपने सुझाया था? हाँ. मैं कुछ महीने पहले जयपुर में फ़िल्म भूलभुलैया की शूटिंग कर रहा था. मैं सड़क पर जा रहा था और एक सरदार जी ट्रक चला रहे थे जिसके पीछे लिखा हुआ था सिंह इज़ किंग. सड़क पर जिस अंदाज़ से उन्होंने मेरी गाड़ी को रास्ता दिया और जिस गर्मजोशी से बोला ‘ओ बादशाहो अग्गे चलो’, बस मैने तभी फ़ैसला कर लिया था कि मुझे फ़िल्म बनानी है जिसका नाम होगा सिंह इज़ किंग. मैने विपुल शाह को फ़ोन किया जो फ़िल्म के निर्माता हैं. उन्होंने पूछा कि फ़िल्म की कहानी क्या है, मैने कहा मुझे नहीं पता. उन्होंने कहा निर्देशक कौन है, मैने कहा पता नहीं. वो बोले तो फ़िल्म कैसे बनेगी, मैने कहा पता नहीं लेकिन इस नाम से मैं फ़िल्म बनाउँगा ज़रूर. आहिस्ता-आहिस्ता मैने फ़िल्म की कहानी बनाई, निर्देशक को साइन किया और अब बनकर तैयार है. फ़िल्म में दिलचस्पी इसलिए भी है क्योंकि इसमें आप और अमरीकी गायक स्नूप डॉग एक वीडियो में साथ नज़र आ रहे हैं. स्नूप डॉग को तो ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नामांकित किया जा चुका है. काफ़ी मज़ा आया होगा.
बहुत मज़ा किया हम लोगों ने. अभी जब आपसे बात कर रहा हूँ तो मैं लॉस एजेंलेस में हूँ और यहाँ सुबह के दस बजे हैं. इत्तेफ़ाक की बात है कि मैं स्नूप डॉग का ही गाना सुन रहा हूँ. स्नूप डॉग तो एक लेजेंड हैं. मुझे याद है कि जब स्नूप डॉग ने मुझे पहली बार पगड़ी में देखा था तो उन्होंने कहा कि मेरा वार्डरोब निकाल दो, मैं भी पगड़ी पहनूँगा. उन्होंने अग्रेज़ी में कहा था, "आई वांट टू लुक लाइक माई ब्रदर अक्षय." बाकायादा उन्होंने भी शेरवानी पहनी और उनके लिए भी पगड़ी लाई गई. स्नूप डॉग पहचानने में नहीं आ रहे थे. एक दिलचस्प बात है कि पिछले दिनों भारतीय राजनीति में, संसद में जो कुछ हुआ उसके बाद आपकी फ़िल्म का टाइटल मनमोहन सिंह की जीत का परिचायक बन गया. ये तो इत्तेफ़ाक की बात है. हमने ऐसा सोचा नहीं था लेकिन हमारी फ़िल्म की लिए अच्छा ही है. इतना ही कह सकता हूँ कि सही वक़्त पर सही बात हो गई. पिछले साल आपका रिकॉर्ड 100 फ़ीसदी रहा. नमस्ते लंदन, हे बेबी, भूल भुलैया और वेल्कम. क्या ऐसे में आप किसी तरह का दवाब महसूस करते हैं क्योंकि हर बार जब आप स्क्रीन पर आएँगे लोग हिट की उम्मीद करेंगे. बिल्कुल दवाब तो आ जाता है. अभी मैं आपसे बात कर रहा हूँ तो दवाब में ही हूँ. मैं आपको बता नहीं सकता कि एक अभिनेता के दिल में दिमाग़ में, ज़हन में क्या-क्या बातें गुज़रती हैं. अभिनेता नौ से लेकर दस महीने तक फ़िल्म पर काम करता है, मेहनत करता है, फ़ाइट सीन करता है, डांस करता है, डबिंग करता है और दर्शक दो घंटा फ़िल्म देखकर दो मिनट में नतीजा बता देते हैं- या तो बकवास है या कमाल हो गई. दर्शक तो ये नहीं सोचेंगे कि फ़िल्म के पीछे कितनी मेहनत लगी. उसे फ़िल्म अच्छी लगी तो लगी वरना बोल देगी. इसलिए दवाब तो बहुत रहता है. आपकी फ़िल्में पिछले साल की सबसे बड़ी हिट फ़िल्मों में से थी. ये बात और है कि कई आलोचकों ने उन्हें उतनी अहमियत नहीं दी. आपके लिए बॉक्स ऑफ़िस पर लोगों की प्रतिक्रिया ज़्यादा अहमियत रखती है या आलोचकों की राय. मेरे लिए दर्शकों की प्रतिक्रिया ही अहम है. मेरे बारे में आलोचकों ने अच्छा भी कहा है, कुछ लोगों ने बहुत बुरा भी कहा है. ये उनकी अपनी सोच है, दिमाग़ है. मैं एक व्यावसायिक कलाकार हूँ, मैं कोई कलात्मक फ़िल्में नहीं कर रहा. मैं व्यावसायीकरण और मनोरंजन पर विश्वास रखता हूँ. इसी पर विश्वास करते-करते मैं फ़िल्में करते आया हूँ. लॉस एजेंलेस में किस फ़िल्म की शूटिंग कर रहे हैं? लॉस एजेंलेस में मैं फ़िल्म कम्बख़्त इश्क़ की शूटिंग में व्यस्त हूँ. इसमें बहुत सारे बड़े नाम जुड़े हैं लेकिन इस बारे में मैं अभी ज़्यादा नहीं बता सकता. |
इससे जुड़ी ख़बरें बॉलीवुड को हो रहा है राजनीतिज्ञों से फ़ायदा05 अगस्त, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'फ़िल्मों में टिकना है तो धैर्य चाहिए'04 अगस्त, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस सलमान-शाहरुख़ झगड़ा और कटरीना03 अगस्त, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'वर्ल्ड टूर का सिलसिला मैंने शुरु किया'29 जुलाई, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||