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मंगलवार, 21 अगस्त, 2007 को 09:10 GMT तक के समाचार
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'सबको मेरे जैसा नसीब मिले...'

अक्षय कुमार

हिंदी फ़िल्मों में एक समय बतौर एक्शन हीरो पहचान बनाने वाले 'खिलाड़ी नंबर वन' अक्षय कुमार इनदिनों कॉमेडी की 'भागमभाग' में व्यस्त है. हेराफेरी, गरम मसाला और दीवाने हुए पागल जैसी फ़िल्मों से उन्होंने दिखाया है कि अगर वह एक्शन के खिलाड़ी हैं तो कॉमेडी में भी अनाड़ी नहीं है.

अक्षय कहते हैं पिता बनने के बाद उनकी ज़िंदगी के मायने ही बदल गए हैं.

बीबीसी ने उनके फ़िल्मी करियर और आने वाली फ़िल्म हे बेबी के बारे में ख़ास बातचीत की. पेश है बातचीत के मुख्य अंश:

आज अक्षय कुमार को उन अभिनेताओं की श्रेणी में रखा जाता है जो अपने दम पर सोलो हिट दे सकते है जैसे शाहरुख़, सलमान और आमिर.जब आपने फ़िल्मी करियर शुरू किया था तो सोचा था कि यहाँ तक पहुँचेंगे.

सच कहूँ तो बिल्कुल नहीं सोचा था, कभी नहीं सोचा था. ये सिर्फ़ लोगों के प्यार की देन है. असल में उन्हीं की वजह से हमें मौका मिलता है काम करने का. और फिर उन्हीं की वजह से उत्साह मिलता है कि हम और ज़ोरों-शोरों से काम करें.

आप जब फ़िल्म उद्योग में आए थे तो एक आउटसाइडर थे. कोई गॉडफ़ादर नहीं था. मुझे याद है आपकी पहली फ़िल्म सौगंध. कितना मुश्किल होता है किसी बाहरवाले के लिए फ़िल्मी दुनिया में जगह बना पाना.

बहुत मुश्किल काम है फ़िल्मी दुनिया में अपने पाँव जमाना और टिकाना. शुरू में काम मिल भी जाता है- कभी किसी फ़िल्म में ब्रेक मिल गया या कोई और काम मिल गया. लेकिन सबसे मुश्किल होता है यहाँ टिके रहना. मैं बहुत खुशनसीब हूँ कि मुझे वो मकाम मिल पाया.

आज के ज़्यादातर नए हीरो स्टार सन हैं- पुराने ज़माने के बड़े-बड़े अभिनेताओं के बेटे, कुछ एक को छोड़ दें. तो क्या आज ज़्यादा मुश्किल हो गया है बाहर से आकर फ़िल्मी दुनिया में पैठ बना पाना.

 मैं तो ख़ुद से यही कहूँगा कि मैं बहुत खुशनसीब रहा हूँ अपने सफ़र में. भगवान करे बहुतों को ऐसा नसीब मिले जैसा मुझे मिला है, उन्हें भी उतना प्यार मिले जितना मुझे मिला है

मुश्किल ज़रूर है लेकिन नमुमकिन नहीं है. मेहनत तो बहुत करनी पड़ती है. ऐसे बहुत से लोग फ़िल्म उद्योग में आए भी हैं. कोई चरित्र किरदार निभाने लगा, कोई टीवी कलाकर बन गया, कोई मॉडलिंग में चला गया. कुछ भी हो लोग यहाँ मुंबई में आते ज़रूर हैं- पंजाब से लेकर बंगाल तक .आज तो देश के बाहर से भी लोग आ रहे हैं. रोकता कोई नहीं है और सबको कुछ काम मिल ही जाता है, ऐसी बात नहीं है.

आज बहुत सारे अभिनेता-अभिनेत्रियाँ कॉर्पोरेट हाउस के साथ डील साइन कर रहे हैं जहाँ शायद उनका भी योगदान होगा फ़िल्म की कहानी, निर्देशक वगैरह तय करने में. आपको लगता है इससे लोगों को बेहतर सिनेमा देखने को मिलेगा.

मुझे लगता है कि इसका बेहतर सिनेमा से कोई लेना-देना नहीं है. कॉर्पोरेट हाउस के साथ कोई डील साइन कर लो या किसी और के साथ, फ़िल्म तो बनती है स्क्रिप्ट से न कि किसी कॉर्पोरेट के आने से. दोनों का कोई तालमेल नहीं है.

आपने हाल के कुछ सालों में काफ़ी कॉमेडी फ़िल्मों में काम किया है- हेरी फेरी, भागमभाग, मुझसे शादी करोगी....कितना मुश्किल या आसान होता है सही कॉमिक टाइमिंग हासिल करना, लोगों का हँसा पाना.

अक्षय कुमार की कॉमेडी फ़िल्में काफ़ी हिट रही हैं

कहते हैं कि कॉमेडी बेहद मुश्किल काम है. मुझे ख़ुद भी नहीं पता था. आज से पाँच-छह साल पहले मैने देखा कि मुझमें कॉमेडी का एक स्ट्रीक है, एक पुट है, कि मैं भी हल्की-फ़ुल्की कॉमेडी कर सकता हूँ. काफ़ी लोग कहते थे कि मैं सिर्फ़ एक्शन कर सकता हूँ और कुछ नहीं. सो मैने कॉमेडी भी ट्राई की, रोमांटिक फ़िल्में भी कीं.

लोगों को रुलाना आसान है लेकिन कॉमेडी करना और लोगों को हँसाना मुश्किल है. आज के ज़माने में इतना तनाव है, मुश्किले हैं. अगर ऐसे में लोगों को हँसा जाओ तो बहुत ही बेहतरीन एहसास छोड़ जाता है ये.

आपकी नई फ़िल्म हे बेबी भी एक कॉमेडी है.उसके बारे में कुछ बताइए.

 हर ग़ैर शादी-शुदा लड़का एक बदलाव से गुज़रता है जब उसकी शादी होती है और वो बाप बनता है. मेरे घर में भी जब आरव, मेरा बेटा पैदा हुआ था तो ये मानना मुश्किल था कि अब मैं पिता हो गया हूँ.माँ बहुत जल्दी माँ बन जाती है. लेकिन पिता थोड़ा वक़्त लेता है. धीरे-धीरे बदलाव आता है और फिर वो संपूर्ण पिता बनता है

'हे बेबी' मेरे दिल के बहुत करीब है क्योंकि ये एक बच्चे और उसके पिता की कहानी है जो मुझे अपने बेटे की याद दिलाता है. क्या है कि हर ग़ैर शादी-शुदा लड़का एक बदलाव से गुज़रता है जब उसकी शादी होती है और वो बाप बनता है.

हे बेबी उसी बदलाव की कहानी है- एक कुँवारे लड़के से लेकर पिता बनने तक की. मैने सिचुएशनल कॉमेडी तो बहुत की है लेकिन ये स्लैपस्टिक कॉमेडी है और वो मैं पहली बार कर रहा हूँ.

हे बेबी की शायद सबसे प्यारी स्टार हैं वो छोटी सी बच्ची- शायद कुछ महीने की ही है वो. फ़िल्म उसके इर्द-गिर्द घूमती है. कैसा था पूरा अनुभव.

हे बेबी में अक्षय के साथ फ़रदीन और रितेश देशमुख हैं

मैने ज़िंदगी में बड़े-बड़े सुपरस्टारों के साथ काम किया है-अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ खान...और भी लोग हैं लेकिन ये बच्ची उनसे भी बड़ी सुपरस्टार थी. उसके साथ शूट पर दो नर्सें और एक डॉक्टर आता था. बच्चे के सात डुप्लिकेट बुलाए हुए थे हमेशा.

शूटिंग के दौरान बच्ची सो जाती थी तो हमें सबको चुप हो जाना पड़ता था. और फिर ये भी था बच्ची दिन में सिर्फ़ तीन घंटे काम करेगी. कई अच्छी-अच्छी चीज़ें देखने को मिली. बहुत मज़ा आया.

बतौर निर्देशक साजिद खान की ये पहली फ़िल्म है. उन्हें तो कॉमेडी में महारत हासिल है. टीवी पर लोग देख चुके हैं. तो सेट्स पर कैसे थो तो निर्देशक के नाते.

मैं तो यही कहूँगा कि हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री से बहुत अच्छा हास्य अभिनेता चला गया. बहुत ही अच्छा निर्देशक पाया है हमने साजिद खान के अंदर.

फ़रदीन खान, रितेश देशमुख और विद्या बालन के साथ कैसी रही केमिस्ट्री.

इन लोगों के साथ मैने पहली बार काम किया है. शुरू में ये लोग सेट पर मुझे सर कहकर बुलाते थे चूँकि काफ़ी सालों से हूँ मैं फ़िल्मों में .फिर ऐसी दोस्ती हुई कि ये लोग सर से कब पैर पर उतर आए मुझे पता ही नहीं चला.

हे बेबी का एक गाना काफ़ी चर्चा में है जिसमें शायद 20-21 हीरोइनों ने काम किया है. उस गाने के बारे में कुछ बताइए.

इतनी सारी हीरोइनों के साथ काम करना कोई मज़ाक बात नहीं है- वो भी एक ही गाने के अंदर. एक को संभालना मुश्किल होता है, यहाँ तो 20-20 हीरोइनें थीं.

आपने पहले कहा था कि आपको एक्शन हीरो माना जाता था. खिलाड़ी नंबर वन, मिस्टर खिलाड़ी कई नाम दिए गए. तो क्या एक्शन हीरो अब कॉमेडी में ग़ुम हो गया है.

हाँ करीब पाँच-छह साल हो गए मैने एक्शन को हाथ नहीं लगाया है. लेकिन अगले साल मैं एक्शन करने जा रहा हूँ. मुझे इंतज़ार रहेगा.

आप अपने स्टंट ख़ुद करते हैं, कितने भी ख़तरनाक क्यों न हो. स्टंट करते समय हॉलीवुड में कलाकारों की सुरक्षा को लेकर काफ़ी ध्यान दिया जाता है. क्या हिंदी फ़िल्मों में स्टंटमैन वगैरह की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाता है.

अक्षय अपने स्टंट ख़ुद करते हैं

पहले सुरक्षा पर इतना ज़ोर नहीं होता था लेकिन अब काफ़ी होने लगा है. अब लोग सेफ़टी पर, सुरक्षा पर काफ़ी ध्यान देने लगे हैं. हमेशा साथ में डॉक्टर रहते हैं, एम्बुलेंस रहती है लोगों के लिए.

क्या लोग अक्षय कुमार को हॉलीवुड में देखेंगे. हिंदी फ़िल्मों के कई सितारें हॉलीवुड का रुख़ कर रहे हैं.

फ़िलहाल तो मैं अपने हिंदुस्तान, भारतीय फ़िल्म उद्योग में ही खुश हूँ. अगर कोई बहुत बड़ा रोल मिला तो ज़रूर करूँगा लेकिन अभी इधर ही बहुत खुशी है, यहाँ बहुत सारे लोग हैं जो चाहते हैं कि मैं यहीं रहूँ और फ़िल्म करूँ.

संजय दत्त का मामला कोर्ट में है. उस पर कुछ कहना चाहेंगे?

नहीं इस बारे में मैं फ़िलहाल कुछ नहीं कहना चाहता.

जल्द ही आप 40 वर्ष के होने जा रहे हैं. करीब 16-17 साल तो फ़िल्म उद्योग में ही हो गए आपको. पीछे मुड़कर देखते हैं तो क्या सोचते हैं.

मैं तो ख़ुद से यही कहूँगा कि मैं बहुत खुशनसीब रहा हूँ अपने सफ़र में. भगवान करे बहुतों को ऐसा नसीब मिले जैसा मुझे मिला है, उन्हें भी उतना प्यार मिले जितना मुझे मिला है.

 हे बेबी हे बेबी की तस्वीरें
साजिद खान की फ़िल्म हे बेबी की तस्वीरें
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