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एक शाम मीना कुमारी के नाम | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आपने फ़िल्म ‘साहब बीबी और ग़ुलाम’ या ‘पाकीज़ा’ का वह गीत तो सुना ही होगा जिसके सुनते ही मीना कुमारी के दो रूप आँखों के सामने आ जाते हैं यानी 'न जाओ सैंय्याँ छुड़ा के बय्याँ, क़सम तुम्हारी मैं रो पड़ूँगी' लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये पंक्तियाँ क्या कहती हैं. चाँद तन्हा है, आसमाँ तन्हा जी हाँ ये पंक्तियाँ मीना कुमारी की लिखी मशहूर ग़ज़लों के मुखड़े हैं. शनिवार को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में मीना कुमारी के जन्म दिन के मौक़े पर एक शाम आयोजित की गई जिसमें ग़ज़ल गायिका रश्मि अग्रवाल ने मीनाकुमारी की ग़ज़लों को आवाज़ दी. बड़ा है दर्द का रिश्ता, ये दिल ग़रीब सही फ़ैज़ आहमद फ़ैज़ का यह शेर इसलिए याद आ गया कि मीना कुमारी के इस प्रोग्राम को देखने के लिए इतनी संख्या में लोग पहुंचे कि ऑडिटोरियम भर जाने के बाद दूसरी जगह एक पर्दे पर इसको दिखाने का इंतिज़ाम करना पड़ा.
इस मौक़े पर मीना कुमारी के जीवन पर प्राण नेविल ने रौशनी डालते हुए कहा कि वह हिंदी सिनेमा की उन शीर्ष अभिनेत्रियों में शामिल हैं जिनके अभिनय का जादू सर चढ़ कर बोलता है. प्राण नेविल ने कहा कि मीना कुमारी के जीवन और उनके गीतों पर आधारित यह प्रोग्राम उस श्रृंखला का हिस्सा है जिसमें कमउम्र में ही दुनिया को अलविदा कहने वाले कलाकार आते हैं. इन कलाकारों का जीवन चाहे देखने में कितना ही चमकदार क्यों न हो वे अंदर से अधूरे रहे और उन्होंने इसके लिए अपने आप को शराब में डुबा दिया. प्राण नेविल ने कहा कि इससे पहले उन्होंने मदन मोहन पर भी ऐसा ही प्रोग्राम पेश किया था और वह गीता दत्त पर भी इसी तरह के प्रोग्राम की उम्मीद करते हैं. जीवन मीना कुमारी का जन्म एक अगस्त 1932 को हुआ था, और उनका नाम महजबीन बानो था. उनके माता पिता इक़बाल बेगम और अली बख़्श ने उन्हें जन्म के बाद एक यतीमख़ाने में छोड़ दिया था फिर दो-चार घंटे बाद वे उन्हें ले आए. वे पारसी थियेटर से जुड़े हुए थे. मीना कुमारी ने ‘फ़रजंदे-वतन’ में पहली बार सात साल की उम्र में काम किया और 1953 में उन्हें फ़िल्म ‘बैजूबावरा’ में अभिनय के लिए बेहतरीन अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया. मीना कुमारी के अभिनय का जौहर फ़िल्म ‘बैजूबावरा’ से निखर कर सामने आया. मीना कुमारी की शादी महान फ़िल्म निर्देशक कमाल अमरोही से हुई. उनकी यादगार फ़िल्मों में ‘पाकीज़ा’, ‘साहब बीबी और ग़ुलाम’ के अलावा, ‘आज़ाद’, ‘दिल अपना और प्रीत पराई’, ‘आरती’, ‘दिल एक मंदिर’, ‘फूल और पत्थर’ और ‘काजल’ जैसी बेहतरीन फ़िल्में थीं. गीतकार गुलज़ार के क़रीब आने के बाद उन्होंने फ़िल्म ‘मेरे अपने’ का निर्देशन भी किया. 31 मार्च 1972 को यह चाँद आसमाँ की गोद में छुप गया. पाकीजा़ की सफलता का राज़
प्राण नेविल ने यह भी बताया कि फ़िल्म ‘पाकीज़ा’ की अदभुत सफलता के पीछे मीना कुमारी की बेवक़्त मौत थी. पहले तो लोगों ने इस फ़िल्म पर कोई ख़ास उत्साह नहीं दिखाया लेकिन मीना कुमारी की मौत के बाद लोगों ने इस फ़िल्म को जिस तरह सराहा उसकी मिसाल नहीं मिलती है. एक ज़माना वह था कि कहीं भी चले जाइए किसी भी जश्न के मौक़े पर ये मधुर गीत आप को सुनाई देते. इन्ही लोगों ने ले लीन्हा दुपट्टा मेरा इस मौक़े से रश्मि अग्रवाल ने कहा कि मीना कुमारी की ग़ज़लों को आवाज़ देना जहां उनका सौभाग्य है वहीं उसके उतार चढ़ाव और नज़ाकत को निभा पाना उनके लिए बड़ी चुनौती है. उन्होंने इस मौक़े पर मीना कुमारी की ग़ज़लों के साथ साथ उनकी फ़िल्मों के वे गीत भी गाए जो उन पर फ़िल्माए गए थे. इस अवसर पर मीना कुमारी के अभिनय से सुसज्जित गीतों के प्रदर्शन के ज़रिए उनके जीवन के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला गया जिससे मीना कुमारी की एक प्यासी ज़िंदगी का तसव्वुर उभरता है. मीना कुमारी की गज़लों से कुछ पंक्तियाँ आप भी सुनते चलें बुझ गई आस छुप गया तारा आबला-पा कोइ दश्त में आया होगा पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है मीना कुमारी अपनी गज़लों में अपना तख़ल्लुस ‘नाज़’ रखती थीं. वाक़ई हिंदी सिनेमा को उन पर हमेशा नाज़ रहेगा. मीना कुमारी की मौत और पाकीज़ा के बारे में किसी ने क्या ख़ूब कहा है. मीना शराब पीती थी मजलिस में बैठ कर | इससे जुड़ी ख़बरें गीत गुमसुम है ग़ज़ल चुप है.....30 मार्च, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस भारत की शायरी बनाम पाकिस्तान की शायरी05 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'भर चुके ज़ख़्मों को अब न खरोंचा जाए'07 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस न्यूयॉर्क में 'मुस्लिम फ़िल्मोत्सव'20 अप्रैल, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस प्रेमचंद को गुलज़ार ने कैसे जाना30 अगस्त, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस अमिताभ ने जन्मदिन नहीं मनाया 11 अक्तूबर, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस रंग भरे जा रहे हैं पुरानी फ़िल्मों में04 अगस्त, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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