BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 20 अप्रैल, 2006 को 16:43 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
न्यूयॉर्क में 'मुस्लिम फ़िल्मोत्सव'

यमन की फ़िल्म - ए न्यू डे का एक दृश्य
यमन की फ़िल्म - ए न्यू डे का एक दृश्य
अमरीका में 11 सितंबर 2001 के बाद से मुस्लिम और अरब मूल के लोगों को शक की नज़र से देखा जाता है. ऐसे माहौल में एक ख़ास तरह के फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया है जिसमें मुस्लिम देशों के फिल्मकारों की फिल्में दिखाई जा रही हैं.

आयोजकों को उम्मीद है कि इस प्रकार के समारोहों के ज़रिए शायद हालात बदलने में कुछ मदद मिले.

न्यूयॉर्क में इस अलवन फिल्म समारोह में मध्य पूर्व औऱ उत्तरी अफ्रीका के देशों के साथ-साथ अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान की भी फिल्में शामिल हैं.

इस समारोह में क़रीब 30 फिल्में दिखाई जा रही हैं जिनमें इराक, ईरान, अल्जीरिया, सीरिया, मिस्र और मोरक्को जैसे देशों की भी फिल्में हैं.

इस फिल्म महोत्सव में अरबी मूल के निर्देशकों और कलाकारों की फिल्मों को प्रमुखता दी गई है. इस महोत्सव में क़रीब आधा दर्जन फ़िल्में अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के निर्देशकों और फ़िल्मकारों ने बनाई हैं.

आयोजकों का कहना है कि इसे एक मुस्लिम फिल्म समारोह कहना ग़लत है, बल्कि यह एक ऐसे इलाक़े की साझी संस्कृति से जुड़ा समारोह है जहाँ मुस्लिम, इसाई और अन्य आस्थाओं के लोग रहते हैं.

समारोह के आयोजकों में एक दक्षिण एशियाई मूल की संस्था – थर्ड आई- भी शामिल है. इस संस्था की प्रेरणा रेड्डी कहती हैं, “यह समारोह न तो अरब और न ही मुस्लिम फिल्म समारोह है. इसका किसी धर्म से कोई नाता नहीं है. "

"यह तो एक ऐसे क्षेत्र के लोगों के बारे में है जिन्हें पश्चिमी देशों में शक की नज़र से देखा जाता है और उन्हें निशाना बनाया जाता है. ऐसे लोगों की आवाज़ हम अमरीका में आम लोगों तक पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं.”

मुश्किलें कम नहीं हैं

रेड्डी कहती हैं कि इस समारोह में शामिल होने के लिए बहुत से निर्देशकों और फिल्मकारों को अमरीका का वीज़ा नहीं दिया गया और जिन्हें वीज़ा मिला भी उन्हें कस्टम और इमीग्रेशन पर घंटों गहन पूछताछ का सामना करना पड़ा.

मीडिया और मुस्लिम
 अमरीका में मुख्यधारा के समाचार माध्यम मध्य पूर्व और मुस्लिम लोगों की ग़लत छवि पेश करते हैं, इसके मुक़ाबले में एक फिल्म समारोह तो ज़्यादा कुछ नहीं कर सकता, हाँ यह ज़रूर है कि हमें उम्मीद तो है कि अगर इसी प्रकार महोत्सव आयोजित होते रहें तो आम अमरीकी लोगों में व्याप्त ग़लत धारणा को बदलने में मदद मिलेगी
अहमद इसवी, अलवन

महोत्सव के मुख्य आयोजकों में अलवन नामक संस्था प्रमुख है. अलवन के अहमद इसवी कहते हैं, “अमरीका में मुख्यधारा के समाचार माध्यम मध्य पूर्व और मुस्लिम लोगों की ग़लत छवि पेश करते हैं."

"इसके मुक़ाबले में एक फिल्म समारोह तो ज़्यादा कुछ नहीं कर सकता, हाँ यह ज़रूर है कि हमें उम्मीद तो है कि अगर इसी प्रकार महोत्सव आयोजित होते रहें तो आम अमरीकी लोगों में व्याप्त ग़लत धारणा को बदलने में मदद मिलेगी.”

कुछ इसी तरह की आशाएं अरब मूल के फिल्मकारों की भी हैं. उन्हें भी शिकायत है कि पश्चिम में उनके बारे में बहुत ग़लत छवि बन गई है और वे अपनी फिल्मों के ज़रिए अमरीकी और अन्य पश्चिमी देशों में आम लोगों को अरब मूल के लोगों की ज़िंदगी, समाज औऱ परेशानियों के बारे में बताकर उनमें सही धारणा बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

इराक़ के फ़िल्म निर्देशक मोहम्मद दरादजी की फ़िल्म – एहलाम - इस समारोह में काफ़ी चर्चा में है. मोहम्मद दरादजी कहते हैं, “यह दुर्भाग्य है कि मीडिया ने अरबों और मुसलमानों की छवि बहुत बिगाड़ दी है लेकिन मैं अमरीका, जापान और यूरोप के कई देशों में अपनी फ़िल्म दिखाने गया हूँ."

"लोग पहले तो शक की नज़र से देखते हैं लेकिन फिल्म देखने के बाद वे ख़ुद आकर तरह-तरह के सवाल करते हैं और अरब देशों और इराक में आम लोगों के बारे में और जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं. उनका अरबों को देखने का अंदाज़ ही बदल जाता है.”

संस्कृति की झलक

अमरीका में रहने वाले अरब मूल के लोगों के लिए अपने इलाक़े, समाज और संस्कृति से जुड़ी फ़िल्में देखने का यह एक अच्छा मौक़ा भी है. यमन की फिल्म- अ न्यू डे इन ओल्ड सना-, इराकी निर्देशक मोहम्मद दरादजी की फिल्म-एहलाम- औऱ अफ़गानिस्तान की फ़िल्म-अर्थ एंड ऐशेज़- की ख़ासी चर्चा हुई है.

अल्जीरिया की फ़िल्म बेब अल वेब

मैनहैटन के ऐंथोलोजी थियेटर में शुरू हुए इस फ़िल्म समारोह में अरब मूल के लोग ही नहीं बहुत से अमरीकी भी इन फ़िल्मों को देखने के लिए उमड़ रहे हैं.

इस समारोह में ज़्यादातर फिल्मों को पहली बार दिखाया जा रहा है और इसके ज़रिए ख़ासकर मध्यपूर्व के गड़बड़ी वाले इलाकों के फ़िल्मकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिल रहा है. इनमें से ज़्यादातर फ़िल्मों की कहानी भी युद्व और आम लोगों पर उनके असर पर ही आधारित है.

इन फ़िल्मों में ईराक, अफ़गानिस्तान, मोरक्को और अल्जीरिया में लड़ाई-मार के कारण आम लोगों की ज़िंदगी पर होने वाले असर का बेहतरीन अंदाज़ में चित्रण किया गया है.

कुछ फिल्मों को बनाने में निर्देशकों को बेहद कठिन हालात का भी सामना करना पड़ा.

सबसे ज़्यादा परेशानी इराकी निर्देशकों को होती है जहाँ पिछले 15 वर्षों में सिर्फ एक या दो फिल्म ही बनी है. सिनेमा थियेटर के नाम पर पूरे देश में सिर्फ़ दो हॉल फिल्में दिखा रहे हैं और इसके अलावा देश में जारी हिंसा के कारण निर्देशकों औऱ फिल्मकारों को अमरीकी फौज और इराकी लड़ाकों की भी मार झेलनी पड़ती है.

इराक़ की फ़िल्म अहलाम

इराक के निर्देशक मोहम्मद दरादजी की फिल्म- एहलाम – दुनिया भर के कई फिल्म महोत्सव में शामिल है जिनमें न्यूयॉर्क अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह, मॉस्को और जापान के फ़िल्म समारोह शामिल हैं. मिस्र और बंग्लादेश के फिल्म समारोहों में इसे बेहतरीन अरबी फिल्म का ख़िताब मिला.

अपनी फिल्म- एहलाम – के बारे में बताते हुए दरादजी कहते कि उन्हें बग़दाद में अपनी फिल्म की शूटिंग करने में बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. वह कहते हैं, “यह समझ लीजिए कि मैं एक युद्व क्षेत्र में फिल्म बना रहा था और शुरू में तो मेरे दोस्त यार मुझे पागल ही समझ रहे थे."

"फिल्म की शूटिंग के लिए बाक़ायदा परमिट लेने के बावजूद शूटिंग के दौरान मुझे और मेरे साथियों को अमरीकी सैनिकों ने दो बार गिरफ़्तार किया गया. मेरे एक कर्मचारी के पैर में गोली मारी गई. हम सबको पांच दिनों तक जेल में रखकर गहन पूछताछ की गई. हमें संरक्षण देने वाले एक पुलिसकर्मी को भी इराकी लड़ाकों ने गोली मार दी. हम तो दोनों तरफ़ से पिट रहे थे.”

समारोह में अन्य चर्चित फिल्मों में पाकिस्तान की फिल्म – पाकिसतान्ज़ डबल गेम- भी शामिल है जिसमें पाकिस्तान की शीरीन ओबैद ने यह दिखाने की कोशिश की है कि आतंकवाद के खिलाफ़ युद्व में पाकिस्तान किस प्रकार शामिल है और किस प्रकार देश में अमरीका का विरोध भी बढ़ता जा रहा है. इस फ़िल्म में कराची से वज़ीरिस्तान तक पूरे देश के हालात का जायज़ा लिया गया है.

इसके अलावा पाकिस्तान कि एक और फिल्म – मिसएजुकेशन ऑफ़ पाकिस्तान – में देश के शिक्षा के चरमराते ढाँचे का लेखा जोखा दिया गया है.

23 अप्रैल तक चलने वाले इस महोत्सव में अन्य प्रमुख फिल्मों में अलजीरिया की - बाब अल वेब, इरान की – बाब अज़ीज़, मोरोक्को की - ज़ायना, इराक की - ज़मन, मिस्र की - डाउनटाउन गर्ल्ज़, मोरक्को की - स्लीपिंग चाईल्ड और तुर्की की – एंजल्स फॉल – भी शामिल हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>