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मोत्ज़ार्ट की 250वीं जयंती पर समारोह | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाश्चात्य शास्त्रीय संगीत के महानायक वोल्फ़गैंग एमैडियस मोत्ज़ार्ट को उनकी 250वीं जयंती के अवसर पर पूरे विश्व में याद किया गया. मुख्य समारोह ऑस्ट्रिया के साल्ज़बर्ग शहर में आयोजित किया गया जहाँ ढाई सदी पहले 27 जनवरी को उनका जन्म हुआ था. ऑस्ट्रिया में तीन दिनों तक चलने वाले समारोहों का एक अन्य केंद्र है वियना जो कि विलक्षण प्रतिभा वाले मोत्ज़ार्ट की कर्मभूमि रही. मोत्ज़ार्ट ने केवल 35 वर्ष की आयु में वियना में ही अंतिम साँसें ली थीं. मोत्ज़ार्ट को संगीत के क्षेत्र में एक जीनियस की संज्ञा दी जाती रही है जिन्होंने बहुत छोटी उम्र में ही अपनी प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी थी. उन्होंने केवल 10 साल की उम्र में अपनी पहली सिम्फ़ोनी को रचा था और 12 साल की उम्र में एक ओपेरा तैयार कर लिया था. बहुत कम उम्र में ही दुनिया छोड़ जाने के बावजूद मोत्ज़ार्ट ने ऐसी सैकड़ों रचनाएँ रची हैं जिनकी धुन दो सदियों बाद भी पूरी दुनिया में गूँज रही है. समारोह
मोत्ज़ार्ट जयंती पर वियना के ओपेरा हाउस में मोत्ज़ार्ट की रचनाओं इडोमेनियो और द मैजिक फ़्ल्यूट का नया प्रदर्शन किया गया. वहीं साल्ज़बर्ग में मोत्ज़ार्ट जयंती पर सड़कों पर तीन दिन तक पार्टियाँ होंगी और वहाँ दो मीटर ऊँचा एक विशाल केक काटा गया. दोनों ही शहरों में पर्यटकों को मोत्ज़ार्ट से परिचित कराने के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे. पर्यटकों को मोत्ज़ार्ट से जुड़े स्थानों पर ले जाने के प्रबंध किए गए जिनमें उनका मनपसंद रेस्त्रां और उनके दोस्तों और दुश्मनों के घर शामिल हैं. वियना में एक ऐसी इमारत में एक नए संग्रहालय का उदघाटन किया गया जहाँ मोत्ज़ार्ट 1784 से 1787 तक रहे और वहाँ उन्होंने इम्प्रेसारियो और द मैरेज ऑफ़ फ़िगारो जैसी संगीत कृतियों को रचा. साल्ज़बर्ग में वियना फ़िलहार्मोनिक ऑर्केस्ट्रा मोत्ज़ार्ट के पियानो पर रचे प्रख्यात कंसर्ट नंबर 18 का प्रदर्शन हुआ जिसके बाद मशहूर संगीतकार रिकार्डो मुटि मोत्ज़ार्ट को एक संगीतमय श्रद्धांजलि दी. शुक्रवार को लंदन, मॉस्को, प्राग, टोक्यो, हवाना, न्यूयॉर्क और कई अन्य शहरों में मोत्ज़ार्ट जयंती पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए. | इससे जुड़ी ख़बरें 'प्रयोग हों लेकिन शास्त्रीय शुद्धता के साथ'23 जनवरी, 2006 | मनोरंजन ख़ूबसूरती की मिसाल थी नूरजहाँ: नौशाद 27 दिसंबर, 2005 | मनोरंजन 'जिसे सुनकर लोग रो पड़ें वो है संगीत'27 नवंबर, 2005 | मनोरंजन मैं अच्छा शागिर्द हूँ: बिरजू महाराज 12 नवंबर, 2005 | मनोरंजन 'रीमिक्स के नाम पर भद्दा मज़ाक'30 सितंबर, 2005 | मनोरंजन काबुल के रंगमंच पर शेक्सपियर के रंग09 सितंबर, 2005 | मनोरंजन इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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