|
सरहदें नहीं जानता साहित्य | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में हिंदी भाषा के जानकार दूर-दूर तक नहीं मिलेंगे लेकिन अनूदित हिंदी साहित्यिक पुस्तकों और मासिक पत्रों को पढ़ने वाले कई मिल जाएँगे. कराची में हिंदी भाषा सीखने में भी लोगों की रुचि धीरे-धीरे बढ़ रही है. कराची में हिंदी उपन्यास, लघु-कहानी और आत्मकथा का उर्दू भाषा में अनुवाद किया जाता है. भारतीय लेखक निर्मल वर्मा, उदय प्रकाश, प्रेमचंद, रमेश बख्शी और गीतांजलीश्री लोकप्रिय हैं. सिटी प्रेस के मालिक और हिंदी उपन्यास और लघु-कहानियों का उर्दू में अनुवाद करने वाले अजमल कमाल का कहना है कि हिंदी साहित्य और विशेष रूप से हिंदी उपन्यास बहुत बेहतरीन और प्रभावशाली होते हैं. उन्होंने बताया, “मैं हर महीने भारत से साहित्यिक पत्रिका 'तदभव' मँगवाता हूँ और यहाँ उसका उर्दू भाषा में अनुवाद करता हूँ. इस पत्रिका को कराची में बहुत पसंद किया जाता है." अजमल ने बताया कि उन्होंने भारतीय लेखक उदय प्रकाश की बहुत सी किताबें उर्दू में अनुवाद करके छापी हैं. वो अपनी साहित्यिक पत्रिका 'आज' में भी हिंदी लघु-कहानियों का अनुवाद करके शामिल करते हैं. हिंदी भाषा से उर्दू में अनुवाद करने वाले आमिर अंसारी ने कहते हैं, “मैंने हिंदी की काफ़ी किताबों का उर्दू में अनुवाद किया है. मैंने यशपाल के उपन्यास 'झूठा सच' का उर्दू में अनुवाद किया था जो कराची के बाज़ारों में बहुत बिका." उन्होंने बताया कि उन्होंने ही निर्मल वर्मा की हिंदी की लघु कहानियों के पूरे वॉल्यूम का अनुवाद किया था जो सिटी प्रेस ने छापा था और लोगों ने बहुत पसंद किया था. कराची में किताबों की सबसे बड़ी मार्केट 'उर्दू बाज़ार' में अली बुक स्टोर के मालिक शहज़ाद ने बताया कि बहुत से पाठक हिंदी उपन्यास और लघु-कहानियों की माँग करते हैं जिनका उर्दू में अनुवाद किया हुआ होता है. उन्होंने बताया कि आजकल दुकानों पर प्रेमचंद और उदय प्रकाश जैसे लेखकों की पुस्तकें अधिक बिकती हैं. हिंदी साहित्य के पाठक अब्दुल वहीद ने कहते हैं, “मैं तो हिंदी साहित्य का दीवाना हूँ और मैंने हाल ही में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविताएँ और यशपाल का 'झूठा सच' उपन्यास पढ़ा है.”
वहीद ने हिंदी-उर्दू बोल-चाल पर किताब ख़रीदते हुए बताया कि उन्हें हिंदी भाषा सीखने का बहुत शौक़ है इसलिए वो यह किताब ख़रीद रहे हैं. हिंदी प्रेमी उर्दू बाज़ार में ही वेलकम बुक स्टोर के निसार अहमद ने बताया कि जब से पाकिस्तान और भारत के बीच संबंध ठीक हुए हैं और थार एक्सप्रेस चलने से दोनों देशों के लोगों का आना-जाना शुरू हुआ है तब से कराची के लोगों में हिंदी भाषा सीखने की रुचि बढ़ी है. उनका कहना था, “हमारी दुकान पर अधिकतर लोग हिंदी-उर्दू बोलचाल और हिंदी-उर्दू शब्दकोश ख़रीदने आते हैं. मज़ेदार बात ये है कि उनमें बड़ी संख्या युवकों की होती है.” उन्होंने कहा कि आजकल राजा राजेश्वर का 'हिंदी-उर्दू शब्दकोश' बहुत बिक रहा है जिसको 'अन्जुमने तरक्क़ी उर्दू' कराची ने छापा है. बुक स्टोर पर राजेश्वर का शब्दकोश ख़रीदते हुए एक नौजवान फ़राज़ ने बताया, “हमारे रिश्तेदार उत्तर प्रदेश और दिल्ली में रहते हैं और मेरा परिवार हर साल भारत जाता है. एक दो बार मैं भी गया हूँ और इसलिए मन में इच्छा है कि हिंदी भाषा बोलूँ और ठीक तरीके से लिखूँ.” फ़राज़ का कहना था कि भारत एक बहुत बड़ा लोकतांत्रिक देश है और वो तेज़ी से विकास की ओर बढ़ रहा है. भारत बहुत ज़ल्द विश्व के विकसित देशों की सूची में आ जाएगा और वहाँ रोज़गार के अवसर भी बढ़ेंगे. फ़राज़ का कहना था, “मैं इसलिए थोड़ी बहुत हिंदी सीख रहा हूँ ताकि मुझे वहाँ काम करने में कठिनाई न हो.” |
इससे जुड़ी ख़बरें लंदन में बिखरता हिंदी-उर्दू तर्जुमे का रंग22 नवंबर, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस वो भी क्या दिन थे......03 फ़रवरी, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'परवीन-नमकीन' तीखा निकला22 मई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस पर्ल पर आधारित फ़िल्म का प्रीमियर15 जून, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस पाकिस्तानी चैट शो पर सेंसर का ताला16 जून, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'आवारापन' से मालामाल पाकिस्तानी सिनेमाघर01 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस भारत की शायरी बनाम पाकिस्तान की शायरी05 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'भर चुके ज़ख़्मों को अब न खरोंचा जाए'07 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||