|
'आवारापन' से मालामाल पाकिस्तानी सिनेमाघर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय अभिनेता इमरान हाशमी जितने भारत में लोकप्रिय हैं उतने ही पाकिस्तान में भी. पूरे देश में प्रदर्शित उनकी नई फ़िल्म 'आवारापन' ने पाकिस्तान के सिनेमाघरों को एक नया जीवन दे दिया है. पाकिस्तान के कई सिनेमाघरों में छह जुलाई से फ़िल्म आवारापन का प्रदर्शन किया जा रहा है. इस फ़िल्म के निर्देशक मोहित सूरी हैं और शगुफ़्ता रफ़ीक़ इस फ़िल्म की लेखक हैं. ये फ़िल्म कराची के तीन सिनेमाघरों में दिखाई जा रही है. अभिनेता इमरान हाशमी के अलावा मुकेश भट्ट की इस फ़िल्म में श्रेया सरन, मृणालिनी शर्मा और आशुतोष राणा ने भी अभिनय किया है. कराची के सभी सिनेमाघरों के बाहर फ़िल्म देखने वालों की भीड़ लगी होती है जिनमें अधिकतर युवक होते हैं. भारतीय फ़िल्मों के प्रदर्शन से युवा पीढ़ी सिनेमाघरों का रुख़ करने लगी है क्योंकि पाकिस्तान की युवा पीढ़ी में भारतीय अभिनेता और अभिनेत्रियाँ काफ़ी लोकप्रिय हैं. कराची के निशात सिनेमा में 740 सीटें हैं और इसके मालिक का कहना है कि आजकल 90 प्रतिशत सीटें बुक हो जाती हैं. सिनेमा का टिकट 50, 70 और 120 रुपए का है. मज़ेदार नौजवान नदीम अहमद ने फ़िल्म देखने के बाद कहा कि इस फ़िल्म की कहानी बहुत अच्छी है, वे कहते हैं, “मैं इमरान हाशमी, शाहरुख़ ख़ान, आमिर ख़ान और ऐश्वर्या राय का दीवाना हूँ. मैंने बड़ी स्क्रीन पर कभी पाकिस्तानी फ़िल्म नहीं देखी क्योंकि मन ही नहीं करता था पाकिस्तानी फ़िल्में देखने को.” ग़ौरतलब है कि फ़िल्म 'आवारापन' से पहले भारतीय फ़िल्म 'ताजमहल' और 'मुग़ले आज़म' का भी पाकिस्तानी सिनेमाघरों में प्रदर्शन किया गया है जबकि जाने माने भारतीय अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की फ़िल्म 'ख़ुदा के लिए' भी 20 जुलाई को रिलीज़ हो चुकी है. सन्नी देयोल की फ़िल्म 'क़ाफ़िला' भी आगामी 10 अगस्त से पाकिस्तान में रिलीज़ हो रही है. सिराज अली ने बताया कि "पाकिस्तानी फ़िल्मों में शोर-शराबा और मार-धाड़ ज़्यादा होती है और भारतीय फ़िल्में हमेशा ख़ास होती हैं जिन्हें देखने को मन करता है." नईम रियाज़ अपने परिवार के साथ फ़िल्म 'आवारापन' देखने निशात सिनेमा पहँचे और उन्होंने कहा कि "मैंने पाकिस्तानी फ़िल्में अपने परिवार के साथ कभी नहीं देखीं क्योंकि पाकिस्तानी फ़िल्मों का स्तर अच्छा नहीं होता." उनका कहना था कि सभी भारतीय फ़िल्में पाकिस्तान के सिनेमाघरों में दिखाई जाएँ और पाकिस्तान सरकार को चाहिए कि भारत की सभी हिंदी फ़िल्मों को अनुमति दे. निशात सिनेमा के नवाब हसन सिद्दीक़ी ने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने कुछ भारतीय फ़िल्मों को अनुमति देने का जो निर्णय लिया है उससे पाकिस्तान के सिनेमाघरों में नई जान आ गई है. सिद्दीक़ी कहते हैं कि यह क़दम काफ़ी पहले उठाया जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अच्छी फ़िल्में नहीं बनने के कारण पहले पाकिस्तान में 782 सिनेमाघर थे अब केवल 252 रह गए हैं. उनका कहना था कि पाकिस्तान सरकार सभी भारतीय फ़िल्मों को सिनेमाघरों में प्रदर्शन करने की अनुमति दे तो मौजूदा सिनेमाघर बंद होने से बच सकते हैं और लोगों का मनोरंजन हो सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें हिरासत में मौत पर महेश भट्ट की फ़िल्म10 मार्च, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस कराची में बॉलीवुड सितारों का जमावड़ा11 दिसंबर, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'आमिर ख़ान या फ़ना से बड़ा है मुद्दा'04 जून, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस मीरा की 'नज़र' पर क्यों है ऐतराज़?28 फ़रवरी, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस महेश भट्ट पाकिस्तान जाकर फ़िल्म बनाएँगे18 अक्तूबर, 2003 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||