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रुश्दी का सम्मान वापस लेने की माँग | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की राष्ट्रीय एसेंबली ने एक प्रस्ताव पारित करके सलमान रुश्दी को 'सर' का ख़िताब देने का विरोध किया है और माँग की है कि इसे वापस ले लिया जाए. पाकिस्तानी नेशनल एसेंबली में पारित किए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि रुश्दी को सम्मानित करने से "मुस्लिम भावनाएँ आहत हुई हैं." सलमान रुश्दी ने 1988 में 'सैटेनिक वर्सेस' नाम की किताब लिखी थी जिसका दुनिया के कई देशों में भारी विरोध हुआ था और भारत सहित कई देशों ने उसे प्रतिबंधित कर दिया था. इस किताब के प्रकाशन के बाद ईरान ने सलमान रुश्दी की हत्या करने का फ़तवा जारी कर दिया था. ईरान ने भी ब्रिटेन के इस फ़ैसले की आलोचना की है और कहा है कि सलमान रुश्दी को सम्मान देने से पता चलता है कि ब्रितानी प्रशासन में 'इस्लाम फ़ोबिया' कितना गहरा है. ब्रितानी विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि सलमान रुश्दी इस सम्मान के सच्चे हक़दार हैं. प्रस्ताव पाकिस्तान के संसदीय कार्य मंत्री शेर अफ़ग़ान ख़ान नियाज़ी ने यह प्रस्ताव संसद में रखा था जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. नियाज़ी कहते हैं, "सलमान रुश्दी को सम्मान दिए जाने से पैगंबर मोहम्मद की निंदा करने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा जो हमें मंज़ूर नहीं है." 59 वर्षीय सलमान रुश्दी का जन्म भारत में हुआ था, उनकी चौथी किताब 'सैटेनिक वर्सेस' में अच्छाई और बुराई के बीच की काल्पनिक लड़ाई दिखाई गई है जिसमें धर्म, इतिहास, दर्शन और फैंटसी का इस्तेमाल किया गया है. किताब के प्रकाशन के तुरंत बाद ही दुनिया के कई देशों में सनसनी फैल गई और ईरान के आयतुल्लाह ख़ुमैनी ने सलमान रुश्दी की मौत का फ़तवा जारी कर दिया. हालाँकि दस वर्ष ईरानी सरकार ने कहा कि वह इस फ़तवे का समर्थन नहीं करती है लेकिन कई लोगों का कहना है कि एक बार जारी किया गया फ़तवा रद्द नहीं हो सकता. सलमान रुश्दी ने इस सम्मान के लिए ब्रितानी सरकार के प्रति आभार प्रकट किया है और इसे अपनी लेखनी को मिली पहचान बताया है. | इससे जुड़ी ख़बरें इस्लाम में सुधार ज़रूरीः रुश्दी11 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना सलमान रुश्दी बुकर की दौड़ से बाहर09 सितंबर, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस रूश्दी लिखेंगे कहानी, प्रेमिका हीरोइन15 जनवरी, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस सलमान रुश्दी का मुंबई में विरोध12 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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