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आँगन के पारःनारी शक्ति के कई अलग-अलग पहलू | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट और बीबीसी हिंदी की साझा प्रस्तुति है आँगन के पार. एक कार्यक्रम जिसमें ग्रामीण महिलाओं के सरोकारों पर चर्चा होती है. यह कार्यक्रम बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट और हिंदी सेवा की इस साझी प्रस्तुति है. संपादन और संचालन रूपा झा का है. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: सातवीं कड़ी आंगन के पार की सातवीं कड़ी में चर्चा ग्रामीण इलाकों मे रोजगार के नए अवसर पैदा करने का दावा करते राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी क़ानून की. इस क़ानून को इस साल फ़रवरी में 200 जिलों में लागू किया गया.
इस क़ानून को सरकार ने ऐतिहासिक बताया है. पर क्या इस क़ानून ने गाँवों देहातों मे लोगों को रोजगार दिया? महिलाओ के लिए इस क़ानून में क्या विशेष प्रावधान है और लोगो को इसके बारे मे कितनी जानकारी है? चर्चा में भाग ले रहे हैं केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता शंकर सिंह और शामिल है ग्रामीण लोगों की राय भी. आँगन के पार: आठवीं कड़ी आंगन के पार की आठवीं कड़ी में चर्चा विश्व एडस दिवस के बहाने इस भंयकर समस्या की. आंगन के पार की यह कड़ी ख़ास है क्योंकि पहली दिसंबर यानी विश्व एड्स दिवस के लिए हमने दो विशेष कार्यक्रम तैयार किए है और ये कड़ी उन कार्यक्रमो का पहला अंक है. इसमे चर्चा हो रही है किस तरह यौनकर्मी और किन्नर समुदायों के लिए एच आई वी एड्स एक बड़ी चुनौती है. चर्चा मे हिस्सा ले रही है यौनकर्मी ज़रीना बेगम, किन्नर समुदाय का प्रतिनिधित्तव कर रही है लक्ष्मी जो अपने समुदाय के अधिकारो के लिए लंबे समय से काम कर रही है. इस क्षेत्र मे सरकार के कई प्रमुख नीति निर्धारित करने वाली एजेंसियो के साथ काम कर रहे जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता ड़ा सरजित जना ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया. ******************************************************* |
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