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आँगन के पारःनारी शक्ति के कई अलग-अलग पहलू | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट और बीबीसी हिंदी की साझा प्रस्तुति है आँगन के पार. एक कार्यक्रम जिसमें ग्रामीण महिलाओं के सरोकारों पर चर्चा होती है. इस कार्यक्रम को गढ़ने की ज़िम्मेदारी उठाई है बारह वैसी महिलाओ ने जो पेशेवर पत्रकार तो नहीं हैं लेकिन आपके आसपास जो ज़िंदगी बसर होती है उसके ताने-बाने को वे बखूबी समझती हैं. कार्यक्रम के संपादन और प्रस्तुतिकरण रूपा झा कर रही हैं. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * हर शुक्रवार को बीबीसी हिंदी और आकाशवाणी के 22 चैनलो पर प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम की पहली कड़ी मे चर्चा हो रही है एचआईवी-एड्स की. आँगन के पार: पहली कड़ी बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट और बीबीसी हिंदी की साझा प्रस्तुति है आँगन के पार. एक कार्यक्रम जिसमें ख़ास तौर पर ग्रामीण महिलाओं के सरोकारों, उनके स्वास्थ्य, उनके सशक्तिकरण और एचआईवी-एड्स पर चर्चा होती है. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: दूसरी कड़ी
भारतीय संविधान में स्थानीय प्रशासन मे एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है. कितनी भागीदारी हो रही है महिलाओ की पंचायती राज में. सरकारी आँकड़ो के अनुसार लगभग नौ लाख महिलाएँ आज पंचायती राज की अलग-अलग पायदान पर खड़ी होकर अपनी भागीदारी निभा रही हैं. इसी सवाल पर आँगन के पार की दूसरी कड़ी में दो वैसी महिलाओं को आंमत्रित किया गया जो बिहार की सीतामढ़ी और मधुबनी ज़िले से हैं. |
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