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आँगन के पारःनारी शक्ति के कई अलग-अलग पहलू | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट और बीबीसी हिंदी की साझा प्रस्तुति है आँगन के पार. एक कार्यक्रम जिसमें ग्रामीण महिलाओं के सरोकारों पर चर्चा होती है. यह कार्यक्रम बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट और हिंदी सेवा के सौजन्य से प्रस्तुत किया जा रहा है. कार्यक्रम का संपादन और संचालन कर रही हैं रूपा झा. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: तीसरी कड़ी भारत सरकार के रिकॉर्ड के मुताबिक़ पूरे भारत में पचास से ज़्यादा प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल से कम में हो जाती है. बिहार-झारखंड में ये 71 प्रतिशत है. 21वीं सदी का एक कड़वा सच ये है कि आज भी बाल विवाह जारी है. तीसरी कड़ी में हम चर्चा कर रहे हैं कम उम्र में लडकियों की शादी और उससे उनके मानसिक और शारीरिक प्रभाव की. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: चौथी कड़ी
आँगन के पार की चौथी कड़ी मे चर्चा महिला शिक्षा पर. यूँ तो भारतीय संविधान के अनुसार 14 साल तक के बच्चों के लिए मुफ़्त शिक्षा का प्रावधान है लेकिन क्या इस प्रावधान से शिक्षा की स्थिति कुछ बेहतर हुई है? आँकड़ों की बात करें तो भारत में केवल 40 प्रतिशत महिलाएँ साक्षर हैं. कोई आश्चर्य नहीं कि महिला शिक्षा की पायदान में सबसे निचले स्तर पर हैं. इसी विषय पर चर्चा हो रही है इस कड़ी में और ये पड़ताल की कोशिश है कि इतनी मुश्किलों के बावजूद कौन हैं जो अपनी हिम्मत पर आगे बढ रही है. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * |
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